Gurugram News: किसने दी अधूरे घरों में रहने की मंजूरी? गुरुग्राम में 1500 ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट जांच के घेरे में
22 आवासीय परियोजनाओं की जांच में 14 में निर्माण कार्य जारी मिला; सड़क, पानी और बिजली जैसी सुविधाओं पर भी सवाल
साइबर सिटी में अपने सपनों का घर खरीदने वाले हजारों परिवारों के सामने अब सरकारी व्यवस्था से जुड़ा बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। जिन आवासीय परियोजनाओं को कागजों पर रहने योग्य बताते हुए ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट जारी कर दिए गए, उनमें से कई की जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग मिली। कहीं निर्माण कार्य अधूरा था, कहीं सड़क की सुविधा नहीं थी तो कहीं पानी और बिजली जैसी मूलभूत व्यवस्थाएं पूरी तरह तैयार नहीं थीं।
गुरुग्राम: साइबर सिटी में अपने सपनों का घर खरीदने वाले हजारों परिवारों के सामने अब सरकारी व्यवस्था से जुड़ा बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। जिन आवासीय परियोजनाओं को कागजों पर रहने योग्य बताते हुए ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट जारी कर दिए गए, उनमें से कई की जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग मिली। कहीं निर्माण कार्य अधूरा था, कहीं सड़क की सुविधा नहीं थी तो कहीं पानी और बिजली जैसी मूलभूत व्यवस्थाएं पूरी तरह तैयार नहीं थीं।
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मामला सामने आने के बाद अब करीब 1500 ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट जांच के घेरे में हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब किसी परियोजना को रहने योग्य घोषित करने के लिए ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट जारी किया जाता है, तो अधूरे निर्माण वाली परियोजनाओं को यह प्रमाणपत्र कैसे मिल गया?
22 में से 14 परियोजनाओं में निर्माण जारी: मामले की गंभीरता अप्रैल में किए गए आवासीय परियोजनाओं के औचक निरीक्षण के दौरान सामने आई। मुख्यमंत्री उड़नदस्ता और नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग की टीमों ने संयुक्त रूप से 22 आवासीय परिसरों का निरीक्षण किया। सभी परियोजनाओं के पास ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट मौजूद था, लेकिन 14 परियोजनाओं में निर्माण कार्य अभी भी जारी मिला। निरीक्षण के दौरान कई जगह भवन अधूरे पाए गए। कहीं पलस्तर नहीं हुआ था तो कहीं फर्श का काम बाकी था। कुछ परियोजनाओं में रसोई और स्नानघर की पाइपलाइन जैसी आवश्यक व्यवस्थाएं भी पूरी तरह तैयार नहीं थीं। ऐसे में अब सवाल उठ रहा है कि क्या ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट जारी करने से पहले वास्तविक स्थल निरीक्षण किया गया था? यदि किया गया था तो अधूरे निर्माण की स्थिति रिपोर्ट में क्यों नहीं आई?
घर की चाबी मिली, सुविधाओं का इंतजार: सेक्टर-108 स्थित आरओएफ अलांटे के निवासियों ने सोसायटी तक पहुंचने के लिए समुचित सड़क नहीं होने की शिकायत की है। पानी और बिजली की व्यवस्था को लेकर भी लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वहीं, एंबियंस लैगून के निवासियों ने भी परियोजना में वादे के मुताबिक सुविधाएं उपलब्ध नहीं होने की शिकायतें उठाई हैं। ऐसे में घर खरीदारों के सामने सवाल यह है कि यदि परियोजना को रहने योग्य घोषित कर दिया गया था तो जरूरी सुविधाएं अब तक अधूरी क्यों हैं?
1500 प्रमाणपत्रों की पड़ताल शुरू: अधिकारियों ने 1 जुलाई 2025 से 15 मार्च 2026 के बीच जारी किए गए ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट की जांच शुरू की है। इस अवधि में जारी करीब 1500 प्रमाणपत्र जांच के दायरे में बताए जा रहे हैं। जांच में यह देखा जा रहा है कि प्रत्येक परियोजना के लिए ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट जारी करने से पहले किस स्तर पर निरीक्षण किया गया, किसने रिपोर्ट तैयार की और परियोजना को रहने योग्य घोषित करने का आधार क्या था।
वास्तुविदों की भूमिका भी जांच के दायरे में: ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट जारी करने की प्रक्रिया में मौके पर निरीक्षण करने वाले वास्तुविदों की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। यदि किसी परियोजना की वास्तविक स्थिति अधूरी होने के बावजूद उसे तैयार बताया गया, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी, यह भी जांच का अहम हिस्सा है। गुरुग्राम में घर खरीदने के लिए लोग अपनी वर्षों की जमा पूंजी और जीवनभर की कमाई लगा देते हैं। ऐसे में सरकारी प्रमाणपत्र उनके लिए भरोसे का आधार होता है। यदि प्रमाणपत्र जारी होने के बाद भी उन्हें सड़क, पानी, बिजली और अन्य मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़े तो यह केवल बिल्डर की जवाबदेही का मामला नहीं रह जाता।
सिस्टम से सीधे सवाल:- अधूरे निर्माण वाली परियोजनाओं को ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट किस आधार पर जारी किए गए?
- 22 में से 14 परियोजनाओं में निर्माण जारी था तो निरीक्षण रिपोर्ट में क्या दर्ज किया गया?
- क्या प्रमाणपत्र जारी करने से पहले वास्तविक स्थल निरीक्षण हुआ था?
- यदि कमियां मिली थीं तो प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया क्यों नहीं रोकी गई?
- करीब 1500 ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट की जांच की जरूरत क्यों पड़ी?
- निरीक्षण करने वाले वास्तुविदों और संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही कौन तय करेगा?
- ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट मिलने के बावजूद मूलभूत सुविधाएं अधूरी रहने पर घर खरीदारों की जिम्मेदारी कौन लेगा?
- यदि जांच में लापरवाही सामने आती है तो दोषियों पर क्या कार्रवाई होगी?
22 में 14 परियोजनाओं में निर्माण जारी: औचक निरीक्षण में सामने आई जमीनी हकीकत- 22 आवासीय परियोजनाओं का निरीक्षण
- सभी के पास ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट मौजूद
- 14 परियोजनाओं में निर्माण कार्य जारी मिला
- कई स्थानों पर पलस्तर और फर्श अधूरे
- कुछ जगह रसोई व स्नानघर की व्यवस्थाएं भी पूरी नहीं
- प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया पर उठे सवाल
1500 ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट जांच में:
जांच की अवधि: 1 जुलाई 2025 से 15 मार्च 2026
जांच का दायरा: करीब 1500 ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट
मुख्य सवाल: क्या कुछ आवासीय परियोजनाओं को पूरी तरह तैयार होने से पहले ही रहने योग्य घोषित कर दिया गया?
घर खरीदारों का सवाल: “जब घर तैयार नहीं था तो ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट कैसे मिल गया?”घर खरीदार सरकारी प्रमाणपत्र को इस भरोसे के साथ स्वीकार करता है कि परियोजना रहने योग्य और निर्धारित मानकों के अनुरूप है। लेकिन यदि प्रमाणपत्र मिलने के बाद भी निर्माण अधूरा हो और बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध न हों, तो सवाल केवल बिल्डर पर नहीं, बल्कि उस पूरी व्यवस्था पर उठता है जिसने परियोजना को रहने योग्य प्रमाणित किया। अब देखना होगा कि 1500 ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट की जांच के बाद जिम्मेदारी किसकी तय होती है और घर खरीदारों को कब राहत मिलती है।

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