Nuh Mewat News: दो खंभों के सहारे स्कूल पहुंच रहे फलेंडी के बच्चे, प्रशासन की अनदेखी से हादसे का खतरा
नाले पर रखे तीन बिजली के खंभों में से एक गिरा, बरसात में बढ़ा जोखिम; ग्रामीणों ने सुरक्षित रास्ते की मांग की
पिनगवां क्षेत्र के गांव फलेंडी में सरकारी स्कूल जाने वाले बच्चों की राह इन दिनों बेहद खतरनाक बनी हुई है। स्कूल तक पहुंचने के लिए बच्चों को नाला पार करना पड़ता है, जहां रास्ते के तौर पर रखे गए तीन बिजली के खंभों में से एक खंभा गिर चुका है। अब छोटे-छोटे बच्चे महज दो खंभों के सहारे संतुलन बनाकर नाला पार करने को मजबूर हैं। इसके बाद उन्हें खेतों की संकरी मेढ़ से होकर स्कूल तक पहुंचना पड़ता है। बरसात के दिनों में नाले और आसपास के खेतों में पानी भरने से यह रास्ता और भी जोखिम भरा हो जाता है।
मेवात: पिनगवां क्षेत्र के गांव फलेंडी में सरकारी स्कूल जाने वाले बच्चों की राह इन दिनों बेहद खतरनाक बनी हुई है। स्कूल तक पहुंचने के लिए बच्चों को नाला पार करना पड़ता है, जहां रास्ते के तौर पर रखे गए तीन बिजली के खंभों में से एक खंभा गिर चुका है। अब छोटे-छोटे बच्चे महज दो खंभों के सहारे संतुलन बनाकर नाला पार करने को मजबूर हैं। इसके बाद उन्हें खेतों की संकरी मेढ़ से होकर स्कूल तक पहुंचना पड़ता है। बरसात के दिनों में नाले और आसपास के खेतों में पानी भरने से यह रास्ता और भी जोखिम भरा हो जाता है।
ग्रामीणों का कहना है कि बच्चों के लिए सुरक्षित रास्ते की मांग लंबे समय से की जा रही है, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ। अब एक खंभा गिर जाने के बाद खतरा पहले से कहीं अधिक बढ़ गया है। दो खंभों पर संतुलन बनाकर नाला पार करना छोटे बच्चों के लिए किसी जोखिम भरे करतब से कम नहीं है। जरा-सी चूक होने पर बच्चा नाले में गिर सकता है और गंभीर हादसा हो सकता है।
ग्रामीण इदरिश बोहरा, कादिर खान, मकसूद खान और शाहिद खान ने बताया कि बरसात में नाले में पानी का बहाव तेज हो जाता है। खंभों पर फिसलन होने के कारण बच्चों के लिए उन्हें पार करना और मुश्किल हो जाता है। अभिभावकों को रोजाना बच्चों के स्कूल जाने और वापस लौटने तक हादसे की चिंता सताती रहती है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि मौके का निरीक्षण कर बच्चों के लिए नाले पर सुरक्षित पुलिया अथवा अन्य स्थायी व्यवस्था की जाए और स्कूल तक पक्का रास्ता बनाया जाए। ग्रामीणों का कहना है कि कुछ महीने पहले उनके गांव में डीसी और एसपी का रात्रि ठहराव कार्यक्रम हुआ था। इस समस्या को उनके सामने भी रखा था लेकिन अभी तक इस समस्या का समाधान नहीं हो सकता है। ग्रामीण का कहना है कि अगर जल्दी समस्या का समाधान नहीं हुआ तो बड़ा हादसा हो सकता है।
ग्रामीणों के मुताबिक, सुरक्षित रास्ता नहीं होने का असर बच्चों की स्कूल आने-जाने की सुविधा और उनकी नियमित उपस्थिति पर भी पड़ रहा है। उनका कहना है कि जिस उम्र में बच्चों के हाथों में किताबें होनी चाहिए, उस उम्र में उन्हें स्कूल पहुंचने के लिए जान जोखिम में डालकर नाला पार करना पड़ रहा है। अब ग्रामीणों का सवाल है कि प्रशासन किसी बच्चे के नाले में गिरने या बड़े हादसे का इंतजार क्यों कर रहा है? लोगों ने मांग की है कि मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल मौके का निरीक्षण कराया जाए और बच्चों के लिए सुरक्षित रास्ते की स्थायी व्यवस्था की जाए।
स्कूल के मुख्य अध्यापक जितेंद्र कुमार ने भी माना कि स्कूल तक पहुंचने के लिए सुरक्षित और पक्का रास्ता नहीं होने से विद्यार्थियों को परेशानी होती है। उन्होंने बताया कि नाले पर रखे तीन खंभों में से एक गिर जाने के बाद बच्चों के लिए खतरा और बढ़ गया है। जिला शिक्षा अधिकारी राजेंद्र शर्मा ने कहा कि मामला उनके संज्ञान में है। स्कूल तक पहुंचने वाले रास्ते और नाले पर गिरे खंभे की समस्या की जानकारी ली जा रही है। विद्यार्थियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए जल्द ही उचित कार्रवाई की जाएगी।

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