Gurugram News: मासूम फंसे, सिस्टम डूबा: गुरुग्राम में 7 घंटे तक स्कूल बसों में ‘कैद’ रहे बच्चे
सबहेड: 3.5 फीट पानी में बच्चों तक पहुंचने को मजबूर हुए अभिभावक, जलनिकासी और ट्रैफिक व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
सोमवार की बारिश ने एक बार फिर गुरुग्राम की चमकती तस्वीर के पीछे छिपी बदहाल व्यवस्था को सामने ला दिया। इस बार जलभराव और ट्रैफिक जाम का सबसे भयावह असर उन मासूम बच्चों पर पड़ा, जो स्कूल से घर लौटते समय घंटों तक बसों में फंसे रहे।
गुरुग्राम: सोमवार की बारिश ने एक बार फिर गुरुग्राम की चमकती तस्वीर के पीछे छिपी बदहाल व्यवस्था को सामने ला दिया। इस बार जलभराव और ट्रैफिक जाम का सबसे भयावह असर उन मासूम बच्चों पर पड़ा, जो स्कूल से घर लौटते समय घंटों तक बसों में फंसे रहे। कहीं बच्चे तीन घंटे तो कहीं छह-सात घंटे तक बसों में बैठे घर पहुंचने का इंतजार करते रहे। अभिभावकों के लिए यह इंतजार महज देरी नहीं, बल्कि डर और बेचैनी के घंटों में बदल गया।

सुभाष चौक और आसपास के इलाकों में हालात सबसे ज्यादा खराब रहे। भारी जलभराव के कारण करीब 20 स्कूल बसें घंटों तक जाम में फंसी रहीं। बसों में सवार सैकड़ों बच्चों को पानी और ट्रैफिक के बीच आगे बढ़ने का रास्ता नहीं मिला। हालात इतने खराब थे कि कई अभिभावकों को खुद बच्चों तक पहुंचने के लिए करीब साढ़े तीन फीट गहरे पानी में उतरना पड़ा। कुछ माता-पिता बच्चों को गोद में उठाकर पानी से बाहर लेकर आए।
सात घंटे का सफर बना खौफनाक इंतजार:
सेक्टर-47 के एक स्कूल से दोपहर करीब 12:30 बजे निकली कक्षा-2 की छात्रा कियारा को सेक्टर-51 स्थित अपने घर पहुंचने में रात करीब 8:30 बज गए। यानी कुछ किलोमीटर का सामान्य सफर करीब आठ घंटे में पूरा हुआ। इसी तरह कई अन्य बच्चे तीन से छह घंटे तक स्कूल बसों में फंसे रहे। इस दौरान अभिभावक लगातार स्कूल प्रबंधन, बस चालकों और एक-दूसरे से संपर्क करते रहे। व्हाट्सऐप ग्रुपों में बसों की लोकेशन और बच्चों की स्थिति साझा होती रही। हर गुजरते घंटे के साथ परिवारों की चिंता बढ़ती गई।
बच्चों को लेने पानी में उतरे माता-पिता:
जलभराव ने हालात को इस कदर बिगाड़ दिया कि कई अभिभावकों को अपनी गाड़ियों को दूर छोड़कर पैदल ही बच्चों तक पहुंचना पड़ा। सड़क पर जमा पानी कई स्थानों पर इतना गहरा था कि लोग पानी में उतरकर बसों तक पहुंचे। बच्चों को सुरक्षित निकालने के लिए माता-पिता ने उन्हें गोद में उठाया और पानी पार कराया।
बच्चों के लंबे समय तक बसों में फंसे रहने से उनके भूखे-प्यासे रहने और मानसिक तनाव में आने की चिंता भी सामने आई। अभिभावकों का सवाल था कि जब मौसम विभाग और प्रशासन को भारी बारिश की आशंका का पता था, तो स्कूलों से छुट्टी या बच्चों की सुरक्षित आवाजाही के लिए पहले से प्रभावी व्यवस्था क्यों नहीं की गई।
बारिश हर साल आती है, फिर सिस्टम क्यों डूबता है?:
गुरुग्राम में जलभराव कोई नई समस्या नहीं है। मानसून आते ही शहर के कई प्रमुख मार्गों पर पानी जमा होना आम बात बन चुका है। सुभाष चौक, राजीव चौक, सोहना रोड, गोल्फ कोर्स रोड, एमजी रोड और अन्य प्रमुख हिस्सों में भी बारिश के दौरान यातायात प्रभावित हुआ। लेकिन इस बार स्कूल बसों में बच्चों के घंटों फंसे रहने की घटना ने सवाल को और गंभीर बना दिया है। सवाल सिर्फ जलभराव का नहीं, बल्कि आपदा के समय यातायात प्रबंधन, जलनिकासी, स्कूल बसों की निगरानी और बच्चों की सुरक्षा के लिए आपातकालीन व्यवस्था का भी है।
करोड़ों की तैयारियों के बावजूद क्यों बेबस हुआ शहर?:
गुरुग्राम में हर मानसून से पहले नालों की सफाई, पंपिंग व्यवस्था और जलनिकासी की तैयारियों के दावे किए जाते हैं। बारिश के दौरान अधिकारी फील्ड में उतरते हैं और जलभराव वाले स्थानों से पानी निकालने के लिए पंप लगाए जाते हैं। इसके बावजूद कुछ घंटों की तेज बारिश में यदि बच्चों से भरी स्कूल बसें घंटों तक फंस जाएं और अभिभावकों को बच्चों को निकालने के लिए कमर तक पानी में उतरना पड़े, तो व्यवस्था की तैयारियों पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
यह घटना गुरुग्राम के लिए सिर्फ एक बारिश की कहानी नहीं है। यह उस सिस्टम की परीक्षा थी, जिसमें शहर के हजारों बच्चे रोजाना स्कूल से घर लौटते हैं। सोमवार को इस परीक्षा में मासूम बसों में फंसे रहे और सिस्टम पानी में डूबा नजर आया। अब सबसे बड़ा सवाल यही है जब गुरुग्राम में बारिश कोई असामान्य घटना नहीं है, तो हर बार शहर और उसके मासूम बच्चों को ऐसी स्थिति से गुजरने के लिए मजबूर क्यों होना पड़ता है?




