Narnaul News: रक्षाबंधन पर साल का आखिरी चंद्र ग्रहण- भारत में दिन होने से नहीं दिखेगा, सूतक काल मान्य नहीं, निर्बाध मनेगा त्योहार
आगामी शुक्रवार, 28 अगस्त को वर्ष का दूसरा और अंतिम चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है। यह एक गहरा आंशिक चंद्र ग्रहण होगा, जो खगोल प्रेमियों के लिए बेहद खास है। हालांकि, भारत के लोगों के लिए राहत की बात यह है कि इस दिन रक्षाबंधन (सावन पूर्णिमा) का त्योहार बिना किसी धार्मिक व्यवधान के पूरे उत्साह के साथ मनाया जा सकेगा।
नारनौल: आगामी शुक्रवार, 28 अगस्त को वर्ष का दूसरा और अंतिम चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है। यह एक गहरा आंशिक चंद्र ग्रहण होगा, जो खगोल प्रेमियों के लिए बेहद खास है। हालांकि, भारत के लोगों के लिए राहत की बात यह है कि इस दिन रक्षाबंधन (सावन पूर्णिमा) का त्योहार बिना किसी धार्मिक व्यवधान के पूरे उत्साह के साथ मनाया जा सकेगा।हरियाणा विज्ञान मंच के जिला संयोजक धर्मपाल शर्मा ने इस खगोलीय घटना की विस्तृत जानकारी साझा करते हुए बताया कि भारतीय समयानुसार यह ग्रहण सुबह 6:53 बजे शुरू होगा और दोपहर 12:32 बजे समाप्त होगा। ग्रहण का मुख्य आंशिक चरण सुबह 8:04 बजे से शुरू होकर 11:22 बजे तक रहेगा, जबकि सुबह 9:43 बजे परमग्रास (अधिकतम ग्रहण) की स्थिति होगी। इस ग्रहण की कुल अवधि लगभग 3 घंटे 18 मिनट की होगी।

भारत में मान्य नहीं होगा सूतक काल-
धर्मपाल शर्मा ने स्पष्ट किया कि यह चंद्र ग्रहण भारत में दिन के समय होने के कारण दिखाई नहीं देगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो ग्रहण जहां दिखाई नहीं देता, वहां उसका सूतक काल भी प्रभावी नहीं होता है। इसलिए भारत में इसका सूतक काल मान्य नहीं होगा और सावन पूर्णिमा व रक्षाबंधन के सभी धार्मिक अनुष्ठान व भाई-बहन के राखी बांधने के कार्यक्रम बिना किसी संशय या बाधा के संपन्न हो सकेंगे।
तांबे जैसे लाल रंग में दिखेगा चांद-
वैज्ञानिक दृष्टिकोण से यह ग्रहण बेहद खास है क्योंकि इस दौरान चंद्रमा का लगभग 93% से 96% हिस्सा पृथ्वी की छाया से ढंक जाएगा। इस स्थिति में चंद्रमा पूरी तरह काला होने के बजाय तांबे जैसे गहरे लाल रंग (ब्लड मून जैसा) का दिखाई देगा। यह नजारा उत्तरी और दक्षिणी अमेरिका, पश्चिमी यूरोप और अफ्रीका के हिस्सों में पूरी तरह से देखा जा सकेगा।
चंद्र ग्रहण देखना पूरी तरह सुरक्षित-
शर्मा ने बताया कि चंद्र ग्रहण एक सामान्य खगोलीय घटना है, जो तब होती है जब पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है और चंद्रमा पर पृथ्वी की छाया पड़ती है। उन्होंने कहा कि सूर्य ग्रहण के विपरीत, जिसे देखने के लिए विशेष चश्मों की आवश्यकता होती है, चंद्र ग्रहण को बिना किसी सुरक्षा या विशेष सावधानी के खुली आंखों से देखना पूरी तरह सुरक्षित है। इसके अलावा, सूर्य ग्रहण जहां पृथ्वी के एक छोटे हिस्से में ही दिखता है, वहीं चंद्र ग्रहण को पृथ्वी के रात वाले पूरे हिस्से से देखा जा सकता है।

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नीलोफर हाशमी, देश रोजाना ऑनलाइन में सीनियर पत्रकार हैं। वे करंट अफेयर्स, ह्यूमन नेचर, सोशल और पॉलिटिक्स से जुड़ी खबरें बनाती हैं। मीडिया में नीलोफर को सालों का अनुभव है।
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