New Delhi News: नेशनल चिल्ड्रेंस साइंस कांग्रेस ( NCSC ) ने दिल्ली प्रदेश स्तरीय गाइड टीचर्स एवं बाल वैज्ञानिक उन्मुखीकरण कार्यशाला आयोजित की
दिल्ली विश्वविद्यालय से संबद्ध अरबिंदो कॉलेज में 32 वें राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस (NCSC 2026 ) का आयोजन सेमिनार हॉल में किया गया ।
नई दिल्ली: दिल्ली विश्वविद्यालय से संबद्ध अरबिंदो कॉलेज में 32 वें राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस (NCSC 2026 ) का आयोजन सेमिनार हॉल में किया गया । इस आयोजन को दिल्ली प्रदेश में बाल वैज्ञानिकों की प्रभावी सहभागिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से दिल्ली प्रदेश की राज्य नोडल एजेंसी व अरबिंदो कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय द्वारा गाइड टीचर्स एवं बाल वैज्ञानिकों के लिए राज्य स्तरीय उन्मुखीकरण एवं प्रशिक्षण कार्यशाला का एक दिवसीय कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यशाला का आयोजन मंगलवार को प्रातः 10 बजे से अरबिंदो कॉलेज के सेमिनार हॉल में आयोजित हुई।

इसमें ऑफलाइन के साथ-साथ ऑनलाइन माध्यम से भी प्रतिभागियों के जुड़ने की व्यवस्था की गई थी। कार्यशाला में छात्र , शोधार्थी व शिक्षकों ने बड़ी संख्या में भाग लिया । डॉ. संयम गुप्ता , डॉ. अनुपमा यादव , प्रोफेसर हंसराज सुमन , डॉ. विजित , डॉ. रिंकी , डॉ. ममता शर्मा , डॉ. ममता गर्ग , डॉ. नीतू द्विवेदी , श्री अमन कुमार , डॉ. सुनेना , डॉ. महेश आदि उपस्थित रहे । कार्यशाला में स्वागत भाषण डॉ. नीतू द्विवेदी ने किया , मंच संचालन डॉ. विजित ने किया । 
अरबिंदो कॉलेज के मीडिया संयोजक प्रोफेसर हंसराज सुमन ने बताया है कि कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य गाइड टीचर्स एवं बाल वैज्ञानिकों को राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस की कार्यप्रणाली, दिशा-निर्देशों, परियोजना निर्माण की वैज्ञानिक पद्धति तथा बाल वैज्ञानिकों के प्रभावी मार्गदर्शन के संबंध में व्यावहारिक जानकारी प्रदान करना था। कार्यक्रम के माध्यम से शिक्षकों को यह समझाने का प्रयास किया गया कि नेशनल चिल्ड्रेंस साइंस कांग्रेस ( NCSC ) केवल एक प्रतियोगिता नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, जिज्ञासा, रचनात्मकता, नवाचार एवं समस्या-समाधान की क्षमता विकसित करने का महत्वपूर्ण मंच है। इस मंच के माध्यम से ही भविष्य में युवा पीढ़ी को तैयार करने के उद्देश्य से शोध को बढ़ावा देना ही प्राथमिकता है। बेहतर शोध कार्य करने के लिए आवश्यक है कि उनमें रचनात्मकता , जिज्ञासा और वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करना है ताकि परिणाम अच्छे आयें।
कार्यक्रम के प्रारंभिक सत्र के उद्घाटन अवसर पर कॉलेज के प्राचार्य प्रो .अरुण चौधरी ने कार्यशाला में आए प्रतिभागियों को संबोधित किया। उन्होंने अपने संबोधन में विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने तथा उन्हें अपने आसपास की समस्याओं को समझने और उनके समाधान के लिए वैज्ञानिक ढंग से सोचने के लिए प्रेरित करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने गाइड टीचर्स की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि शिक्षक विद्यार्थियों को केवल परियोजना तैयार करने में सहायता न दें, बल्कि उन्हें स्वतंत्र रूप से सोचने, प्रश्न पूछने और नए समाधान खोजने के लिए भी प्रेरित करें।
इस अवसर पर दिल्ली साइंस कांग्रेस की प्रदेश संयोजक डॉ. अनुपमा यादव ने कार्यशाला के महत्व एवं इसकी प्रमुख विशेषताओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस की भावना के अनुरूप बाल वैज्ञानिकों को स्थानीय समस्याओं के वैज्ञानिक अध्ययन के लिए प्रोत्साहित करने तथा गाइड टीचर्स को प्रभावी मार्गदर्शक की भूमिका निभाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने परियोजनाओं में विद्यार्थियों की मौलिक भागीदारी, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और स्थानीय समस्याओं से जुड़ाव को महत्वपूर्ण बताया।
कार्यशाला के तकनीकी सत्र में विशेषज्ञ द्वारा राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस की विस्तृत रूपरेखा प्रस्तुत की गई। प्रतिभागियों को साइंस कांग्रेस की विभिन्न प्रक्रियाओं, परियोजना निर्माण, विषय चयन, वैज्ञानिक पद्धति, आँकड़ा-संग्रह, विश्लेषण, निष्कर्ष, परियोजना फाइल तैयार करने तथा परियोजना प्रस्तुतीकरण के संबंध में विस्तार से जानकारी दी गई। साथ ही, परियोजनाओं के मूल्यांकन से संबंधित महत्वपूर्ण बिंदुओं पर भी चर्चा की गई।प्रशिक्षण के दौरान गाइड टीचर्स को बताया गया कि किसी भी परियोजना की शुरुआत विद्यार्थियों के आसपास मौजूद वास्तविक समस्या की पहचान से होनी चाहिए। इसके बाद समस्या को शोध-प्रश्न में परिवर्तित करते हुए उद्देश्य निर्धारित किए जाएँ और वैज्ञानिक पद्धति के माध्यम से आँकड़े एवं प्रमाण एकत्र किए जाएँ। प्राप्त आँकड़ों के विश्लेषण के आधार पर निष्कर्ष निकालते हुए समस्या के व्यावहारिक एवं नवाचारी समाधान प्रस्तुत किए जाएँ।
कार्यशाला में विशेष रूप से बाल वैज्ञानिकों के मार्गदर्शन पर भी चर्चा की गई। गाइड टीचर्स को बाल वैज्ञानिकों की जिज्ञासा एवं रचनात्मकता को प्रोत्साहित करने, उन्हें स्वयं परियोजना कार्य करने का अवसर देने तथा परियोजना के प्रत्येक चरण में आवश्यक मार्गदर्शन प्रदान करने के लिए प्रेरित किया गया। इस बात पर जोर दिया गया कि परियोजना में शिक्षक की भूमिका मार्गदर्शक एवं सहायक की होनी चाहिए, जबकि विद्यार्थी परियोजना के मुख्य शोधकर्ता की भूमिका में रहें।
इस कार्यशाला के सफल आयोजन में दिल्ली प्रदेश के जिला समन्वयकों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। उन्होंने अपने-अपने जिलों के विद्यालयों, गाइड टीचर्स एवं बाल वैज्ञानिकों के बीच समन्वय स्थापित किया तथा प्रतिभागियों को कार्यशाला से जोड़ने, आवश्यक सूचनाएँ पहुँचाने और कार्यक्रम की व्यवस्थाओं को सुचारु बनाने में सक्रिय सहयोग दिया। जिला समन्वयकों ने गाइड टीचर्स एवं बाल वैज्ञानिकों को नेशनल चिल्ड्रेंस साइंस कांग्रेस ( NCSC ) की गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित किया और कार्यशाला के दौरान प्राप्त मार्गदर्शन को विद्यालय एवं जिला स्तर तक पहुँचाने का आश्वासन दिया।

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