Nuh Mewat News: पशुपालकों को ज़ूनोटिक बीमारियों के प्रति किया जागरूक, 'वन हेल्थ' दृष्टिकोण अपनाने का आह्वान
विश्व ज़ूनोसिस दिवस पर पशुपालन एवं डेयरी विभाग, नूंह ने आयोजित किया विशेष जागरूकता कार्यक्रम व वेबिनार
हरियाणा सरकार के पशुपालन एवं डेयरी विभाग के निर्देशानुसार विश्व ज़ूनोसिस दिवस के अवसर पर पशुपालन एवं डेयरी विभाग, नूंह द्वारा जिले के पशुपालकों, पशु चिकित्सकों तथा फील्ड स्टाफ को ज़ूनोटिक बीमारियों के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से विशेष जागरूकता कार्यक्रम एवं वेबिनार का आयोजन किया गया।
नूंह: हरियाणा सरकार के पशुपालन एवं डेयरी विभाग के निर्देशानुसार विश्व ज़ूनोसिस दिवस के अवसर पर पशुपालन एवं डेयरी विभाग, नूंह द्वारा जिले के पशुपालकों, पशु चिकित्सकों तथा फील्ड स्टाफ को ज़ूनोटिक बीमारियों के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से विशेष जागरूकता कार्यक्रम एवं वेबिनार का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की इस वर्ष की थीम 'वन हेल्थ रही, जिसका उद्देश्य मानव, पशु एवं पर्यावरण के स्वास्थ्य के बीच समन्वित प्रयासों को बढ़ावा देकर सुरक्षित एवं स्वस्थ समाज का निर्माण करना है। पशुपालन एवं डेयरी विभाग, नूंह के उपनिदेशक डॉ. वीरेंद्र सहरावत ने बताया कि प्रत्येक वर्ष 6 जुलाई को महान वैज्ञानिक लुई पाश्चर द्वारा वर्ष 1885 में रेबीज के प्रथम सफल टीके के विकास की ऐतिहासिक उपलब्धि की स्मृति में विश्व ज़ूनोसिस दिवस मनाया जाता है। उन्होंने कहा कि ज़ूनोटिक रोग ऐसे संक्रामक रोग हैं, जो प्राकृतिक रूप से पशुओं से मनुष्यों तथा मनुष्यों से पशुओं में फैल सकते हैं। इसलिए इनकी रोकथाम के लिए समय रहते आवश्यक सावधानियां अपनाना अत्यंत जरूरी है।

उन्होंने पशुपालकों से आह्वान किया कि पशुधन को ज़ूनोटिक बीमारियों से सुरक्षित रखने के लिए पारंपरिक तरीकों के साथ-साथ आधुनिक एवं वैज्ञानिक पशुपालन पद्धतियों को अपनाएं। उन्होंने कहा कि सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण दूध, घी, पनीर सहित अन्य पशु उत्पादों की उपलब्धता तथा खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पशुओं का समयबद्ध टीकाकरण, संतुलित आहार एवं नियमित स्वास्थ्य परीक्षण आवश्यक है।
डॉ. सहरावत ने कहा कि यदि किसी पशु में संक्रामक रोग के प्रारंभिक लक्षण दिखाई दें तो पशुपालक स्वयं उपचार करने के बजाय तुरंत अपने निकटतम राजकीय पशु चिकित्सालय में संपर्क कर विभागीय पशु चिकित्सक से परामर्श लें। विभागीय दिशा-निर्देशों एवं वैज्ञानिक प्रबंधन के प्रभावी पालन से न केवल ज़ूनोटिक बीमारियों पर नियंत्रण संभव होगा, बल्कि पशुधन की उत्पादकता बढ़ने से ग्रामीण परिवारों की आय में भी वृद्धि होगी।
उन्होंने बताया कि "विश्व ज़ूनोसिस दिवस-2026 : एम्पावरिंग फील्ड वेटेरिनेरियंस फॉर ज़ूनोटिक डिजीज प्रिवेंशन एंड वन हेल्थ" विषय पर आयोजित वेबिनार का संचालन उपनिदेशक डॉ. वीरेंद्र सहरावत के मार्गदर्शन में उपमंडलीय पशुपालन अधिकारी डॉ. सुनील दत्त शर्मा, डॉ. योगेंद्र सिंह सांगवान एवं डॉ. राम मेहर मलिक की देखरेख में किया गया। वेबिनार का उद्देश्य पशु सर्जनों, पैरा-वेट फील्ड स्टाफ एवं पशुपालकों को 'वन हेल्थ' अवधारणा तथा ज़ूनोटिक रोगों की रोकथाम के प्रति संवेदनशील बनाना था।
कार्यक्रम के दौरान जिले एवं आसपास के क्षेत्रों में ब्रुसेलोसिस, रेबीज तथा बोवाइन ट्यूबरकुलोसिस (टीबी) जैसी बीमारियों की रोकथाम एवं रोग निगरानी प्रणाली को सुदृढ़ बनाने पर भी विस्तार से चर्चा की गई। इसी क्रम में अश्व प्रजाति के पशुओं (घोड़े, खच्चर आदि) में ग्लैंडर रोग की जांच के लिए सीरो-सर्विलांस अभियान के तहत विशेष सैंपलिंग की गई। डिस्ट्रिक्ट डिजीज डायग्नोस्टिक प्रयोगशाला द्वारा एकत्रित सीरम नमूनों को जांच के लिए स्टेट डिजीज डायग्नोस्टिक लेबोरेटरी, सोनीपत भेजा जाएगा तथा आवश्यकता पड़ने पर पुष्टिकरण परीक्षण के लिए आईसीएआर-राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केंद्र, हिसार भी भेजा जाएगा।
इस अवसर पर पशु चिकित्सक डॉ. मनीष हुड्डा, डॉ. इस्लाम, डॉ. हरेंद्र सिंह, डॉ. प्रवीण यादव, डॉ. अंकुर, डॉ. इरफान, डॉ. सतीश, डॉ. साजिद, डॉ. गजेंद्र, डॉ. करमवीर, डॉ. सुभाष, डॉ. शिवकुमार, डॉ. अजय, डॉ. रामबीर सहित विभाग के अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

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