Nuh Mewat News: नशा, साइबर अपराध व सामाजिक कुरीतियों से बचाव के लिए जागरूक रहें बच्चे : नेहा गुप्ता

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने घासेड़ा के राजकीय विद्यालय में आयोजित किया कानूनी जागरूकता कार्यक्रम

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जिला एवं सत्र न्यायाधीश-सह-अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (डीएलएसए) नूंह डॉ. सुशील कुमार गर्ग के मार्गदर्शन में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट-सह-सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण श्रीमती नेहा गुप्ता ने सोमवार को गांव घासेड़ा के राजकीय विद्यालय में विशेष कानूनी जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया।

नूंह: जिला एवं सत्र न्यायाधीश-सह-अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (डीएलएसए) नूंह डॉ. सुशील कुमार गर्ग के मार्गदर्शन में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट-सह-सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण श्रीमती नेहा गुप्ता ने सोमवार को गांव घासेड़ा के राजकीय विद्यालय में विशेष कानूनी जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया।

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कार्यक्रम को संबोधित करते हुए श्रीमती नेहा गुप्ता ने विद्यार्थियों को नशा मुक्ति, साइबर फ्रॉड, मानव तस्करी, दहेज प्रथा, बाल विवाह, बाल मजदूरी तथा पॉक्सो (POCSO) अधिनियम, 2012 के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि बच्चों की सुरक्षा, सम्मान और अधिकारों की रक्षा करना प्रत्येक नागरिक का दायित्व है। इसी उद्देश्य से पॉक्सो अधिनियम बनाया गया है, जो 18 वर्ष से कम आयु के सभी बच्चों को यौन शोषण, यौन उत्पीड़न एवं अन्य लैंगिक अपराधों से कानूनी संरक्षण प्रदान करता है। इस अधिनियम के तहत बाल-अनुकूल वातावरण में समयबद्ध जांच एवं सुनवाई का भी प्रावधान किया गया है।

उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि किसी भी प्रकार के अनुचित व्यवहार, उत्पीड़न या अपराध की जानकारी तुरंत अपने अभिभावकों, शिक्षकों अथवा संबंधित अधिकारियों को दें और किसी भी स्थिति में डरें या चुप न रहें।

नशा मुक्ति के संबंध में उन्होंने कहा कि नशा व्यक्ति, परिवार और समाज तीनों के लिए घातक है। युवाओं और विद्यार्थियों को किसी भी प्रकार के नशे से दूर रहकर स्वस्थ जीवनशैली अपनानी चाहिए। साइबर फ्रॉड के बारे में उन्होंने बच्चों को ऑनलाइन धोखाधड़ी से बचने, ओटीपी, बैंक खाते की जानकारी, पासवर्ड तथा अन्य व्यक्तिगत सूचनाएं किसी के साथ साझा न करने और इंटरनेट का सुरक्षित एवं जिम्मेदारी से उपयोग करने के लिए जागरूक किया।
मानव तस्करी, दहेज प्रथा, बाल विवाह और बाल मजदूरी जैसी सामाजिक बुराइयों पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि इन अपराधों के प्रति सजग रहना तथा ऐसी किसी भी घटना की जानकारी तुरंत संबंधित विभाग या पुलिस को देना प्रत्येक नागरिक का दायित्व है।

उन्होंने विद्यार्थियों और विद्यालय स्टाफ को बताया कि आर्थिक रूप से कमजोर एवं पात्र नागरिक जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, नूंह के माध्यम से निःशुल्क कानूनी सहायता प्राप्त कर सकते हैं।
कार्यक्रम के अंत में विद्यालय के स्टाफ ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा आयोजित इस प्रकार के जागरूकता कार्यक्रमों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम विद्यार्थियों एवं समाज के सभी वर्गों के लिए अत्यंत लाभकारी और प्रेरणादायक हैं।

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