जिला में दहेज निषेध अधिनियम-1961 का सख्ती से हो पालन : उपायुक्त

दहेज प्रथा को समाप्त करने के लिए लोगों की संकीर्ण मानसिकता को बदलना आवश्यक, बोले उपायुक्त डा. हरीश कुमार वशिष्ठ

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राज्य में दहेज प्रथा उन्मूलन और दहेज निषेध अधिनियम-1961 के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर बुधवार को मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी की अध्यक्षता में वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से राज्य स्तरीय बैठक आयोजित की गई। मुख्य सचिव द्वारा बैठक में विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ दहेज से जुड़े मामलों पर गंभीर चर्चा की गई।

पलवल:  राज्य में दहेज प्रथा उन्मूलन और दहेज निषेध अधिनियम-1961 के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर बुधवार को मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी की अध्यक्षता में वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से राज्य स्तरीय बैठक आयोजित की गई। मुख्य सचिव द्वारा बैठक में विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ दहेज से जुड़े मामलों पर गंभीर चर्चा की गई। उपायुक्त डा. हरीश कुमार वशिष्ठ ने जिला पलवल से वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से बैठक से जुडकऱ मुख्य सचिव द्वारा दिए गए निर्देशों को सुना और उनकी जिला में गंभीरता के साथ पालना सुनिश्चित करने का आश्वासन दिया।

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उपायुक्त डा. हरीश कुमार वशिष्ठ ने वीसी उपरांत संबंधित अधिकारियों की बैठक लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने सभी अधिकारियों को निर्देश दिए कि जिला में दहेज निषेध अधिनियम 1961 का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि इस संबंध में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि कई बार जागरूकता की कमी के कारण नागरिक शिकायत दर्ज कराने से हिचकते हैं। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को व्यापक स्तर पर जन-जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए ताकि लोग अपने अधिकारों के प्रति जागरूक और सचेत हो सकें। उन्होंने बताया कि दहेज प्रथा को समाप्त करने के लिए संबंधित एसडीएम को दहेज निषेध अधिकारी नियुक्त किया गया है। कोई भी नागरिक दहेज से संबंधित शिकायत के लिए संबंधित दहेज निषेध अधिकारी से संपर्क कर सकता है।

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दहेज प्रथा को समाप्त करने के लिए लोगों की संकीर्ण मानसिकता को बदलना आवश्यक
उपायुक्त डा. हरीश कुमार वशिष्ठ ने कहा कि दहेज प्रथा को समाप्त करने के लिए सबसे पहले लोगों की संकीर्ण मानसिकता में बदलाव लाना आवश्यक है। जब तक समाज में दहेज को प्रतिष्ठा और परंपरा से जोडक़र देखा जाएगा, तब तक इस कुप्रथा का अंत संभव नहीं है। इसके उन्मूलन के लिए धार्मिक और सामाजिक संगठनों को जागरूकता फैलानी होगी और सरल विवाह को बढ़ावा देना होगा। साथ ही, युवाओं को भी आगे आकर दहेज लेने और देने से इंकार करना चाहिए। कानून का सख्ती से पालन और शिक्षा का प्रसार भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। दहेज प्रथा उन्मूलन के लिए विभिन्न धार्मिक एवं सामाजिक संगठनों के साथ-साथ समाज के प्रत्येक वर्ग को आगे आना होगा। समाज के हर वर्ग के सामूहिक प्रयास से ही दहेज प्रथा को पूरी तरह समाप्त किया जा सकता है।
उपायुक्त ने कहा कि भारत में दहेज प्रथा को समाप्त करने के उद्देश्य से लागू किया गया दहेज प्रतिषेध अधिनियम, 1961 महिलाओं की सुरक्षा के लिए ढाल का काम करता है। इस कानून के तहत दहेज लेना, देना या दहेज के लिए उकसाना एक दंडनीय अपराध है, जिसके लिए सख्त सजा और जुर्माने का प्रावधान किया गया है। सुप्रीम कोर्ट की ओर से दहेज प्रतिषेध अधिनियम 1961 का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए हुए हैं। उन्होंने बताया कि यह अधिनियम महिलाओं को दहेज से जुड़ी हिंसा, उत्पीड़न और शोषण से बचाने के उद्देश्य से बनाया गया है।
उपायुक्त डा. वशिष्ठ ने कहा कि  कि कानूनन विवाह से पहले, विवाह के दौरान या विवाह के बाद किसी भी रूप में दहेज की मांग या लेन-देन पूरी तरह प्रतिबंधित है। इसमें नकद राशि, संपत्ति, आभूषण या कोई अन्य कीमती वस्तु शामिल हो सकती है। यदि कोई व्यक्ति दहेज मांगता है, देता है या इसके लिए प्रेरित करता है, तो उसे अधिकतम 5 वर्ष तक की कैद और 15 हजार रुपये या दहेज की कीमत (जो अधिक हो) तक का जुर्माना हो सकता है। उन्होंने युवाओं और अभिभावकों से आग्रह किया कि वे दहेज मुक्त विवाह को बढ़ावा दें और एक समान, सम्मानजनक समाज के निर्माण में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें।

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उपायुक्त ने स्पष्ट किया कि दहेज से जुड़े मामलों में कानून काफी सख्त है। ऐसे अपराधों को संज्ञेय और गैर-जमानती श्रेणी में रखा गया है, जिससे पुलिस बिना वारंट के कार्रवाई कर सकती है। उन्होंने आम जनता से अपील की कि वे इस कानून के प्रति जागरूक रहें और किसी भी प्रकार की दहेज मांग या उत्पीडऩ की स्थिति में तुरंत प्रशासन या पुलिस को सूचित करें। उन्होंने कहा कि दहेज प्रथा को समाप्त करने के लिए केवल कानून ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि समाज की सोच में बदलाव भी आवश्यक है। शिक्षा, जागरूकता और सामूहिक प्रयासों के माध्यम से ही इस कुप्रथा को जड़ से खत्म किया जा सकता है।
बैठक में एसडीएम पलवल एवं दहेज निषेध अधिकारी भूपेंद्र सिंह, एसडीएम होडल एवं दहेज निषेध अधिकारी बलीना, एसडीएम हथीन एवं दहेज निषेध अधिकारी हरि राम सहित अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।

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