पलवल में 14 मई को होगा आपदा प्रबंधन मॉक ड्रिल का आयोजन : उपायुक्त

उपायुक्त डा. हरीश कुमार वशिष्ठ ने अधिकारियों की बैठक लेकर मॉक ड्रिल की तैयारियों बारे की समीक्षा

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आगामी मानसून सत्र के मद्देनजर बाढ़, भूकंप, आगजनी जैसी आपदाओं से निपटने के लिए जिला पलवल सहित प्रदेश के विभिन्न जिलों में बृहस्पतिवार 14 मई को प्रस्तावित मॉक ड्रिल को लेकर जिला प्रशासन पूरी तरह सक्रिय हो गया है और तैयारियां तेज कर दी हैं।

पलवल:  आगामी मानसून सत्र के मद्देनजर बाढ़, भूकंप, आगजनी जैसी आपदाओं से निपटने के लिए जिला पलवल सहित प्रदेश के विभिन्न जिलों में बृहस्पतिवार 14 मई को प्रस्तावित मॉक ड्रिल को लेकर जिला प्रशासन पूरी तरह सक्रिय हो गया है और तैयारियां तेज कर दी हैं। हरियाणा सरकार में वित्त सचिव डीके बेहरा ने मॉक ड्रिल के मद्देनजर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से राज्य स्तरीय बैठक लेकर प्रदेश के विभिन्न जिलों की तैयारियों की समीक्षा की और संबंधित उपायुक्तों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
उपायुक्त एवं अध्यक्ष जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण डा. हरीश कुमार वशिष्ठ ने वीडियो कांफ्रेंसिंग उपरांत लघु सचिवालय के सभागार में संबंधित विभागों की जिला स्तरीय बैठक लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। बैठक में 14 मई को होने वाली मॉक ड्रिल के सफल आयोजन को लेकर विस्तृत रणनीति तैयार की गई और इसमें शामिल सभी विभागों की भागीदारी व जिम्मेदारियों की विस्तार से समीक्षा करते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि यमुना के निकट होने के कारण पलवल जिला अति संवेदनशील है। उन्होंने संबंधित विभागों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे जिला में बाढ़ जैसी किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह सतर्क और तैयार रहें। उन्होंने कहा कि पिछले अनुभवों से सबक लेकर बाढ़ बचाव के लिए बेहतरीन उपाय सुनिश्चित किए जाएं। उन्होंने कहा कि समय रहते प्रभावी कदम उठाना ही नुकसान को कम करने का सबसे बेहतर उपाय है।

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उपायुक्त डा. हरीश कुमार वशिष्ठ ने कहा कि बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाएं अचानक उत्पन्न होती हैं, इसलिए सभी विभागों को पहले से तैयार रहना बेहद जरूरी है। उन्होंने निर्देश दिए कि मेगा मॉक ड्रिल के दौरान हर विभाग अपनी भूमिका का गंभीरता से निर्वहन करे, ताकि किसी भी वास्तविक आपदा के समय जानमाल के नुकसान को न्यूनतम किया जा सके। उन्होंने सभी विभागों को निर्देश दिए कि वे आपसी समन्वय को मजबूत रखते हुए आपात स्थिति में तुरंत प्रतिक्रिया देने की क्षमता विकसित करें।
उपायुक्त ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जिला के बाढ़ संभावित सभी क्षेत्रों को मॉक ड्रिल में शामिल किया जाए और मॉक ड्रिल के दौरान संभावित परिस्थितियों जैसे बाढ़, जलभराव, भवन क्षति, लोगों के फंसने और राहत एवं बचाव कार्यों की चुनौतियों का वास्तविक रूप से अभ्यास किया जाए। साथ ही राहत शिविरों की स्थापना, घायलों के उपचार, एम्बुलेंस सेवाओं की उपलब्धता, ट्रैफिक प्रबंधन और संचार व्यवस्था को भी परखा जाए। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन का उद्देश्य इस मेगा मॉक ड्रिल के माध्यम से आपदा प्रबंधन प्रणाली को और अधिक मजबूत बनाना, विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करना और आमजन की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
उपायुक्त ने बाढ़ जैसी आपदा के समय त्वरित कार्रवाई के लिए पुलिस, स्वास्थ्य, अग्निशमन और राहत टीमों को अलर्ट मोड पर रहने तथा राहत शिविरों की व्यवस्था, आवश्यक दवाइयों की उपलब्धता और खाद्य सामग्री का भंडारण भी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि समय पर की गई तैयारियां निश्चित रूप से जनहानि और नुकसान को कम करने में मददगार साबित हो सकती हैं। यह अभ्यास ‘इंसिडेंट रिस्पांस सिस्टम’ के तहत हितधारकों की भूमिकाओं को परिभाषित करने और उन्हें समग्र प्रतिक्रिया तंत्र में एकीकृत करने पर भी ध्यान केंद्रित करेगा।
बैठक में सीईओ जिला परिषद जितेंद्र कुमार, एसडीएम पलवल भूपेंद्र सिंह, एसडीएम होडल बलीना, एसडीएम हथीन हरिराम, नगराधीश प्रीति रावत, डीएसपी साहिल ढिल्लों, डीआरओ बलराज ङ्क्षसह दांगी, डीडीपीओ उपमा अरोड़ा, पुलिस विभाग, स्वास्थ्य विभाग, लोक निर्माण विभाग, सिंचाई विभाग, नगर परिषद, बिजली निगम तथा आपातकालीन सेवाओं सहित अन्य संबंधित विभागों के अधिकारियों ने भाग लिया।

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