शहीदों और स्वतंत्रता सेनानियों की पावन धरती दमदमा का हाल बदहाल, जिम्मेदार बेपरवाह
देश के लिए अपने प्राण न्यौछावर करने वाले शहीदों और स्वतंत्रता सेनानियों की गौरवशाली धरा के तौर पर पहचान रखने वाला गांव दमदमा आज बुनियादी सुविधाओं के लिए जूझ रहा है। विडंबना यह है कि जिस मिट्टी ने देशभक्ति के इतिहास लिखे, उसी मिट्टी के लोग आज गंदगी, बदइंतजामी और प्रशासनिक उदासीनता के बीच जीवन जीने को मजबूर हैं।
सोहना: देश के लिए अपने प्राण न्यौछावर करने वाले शहीदों और स्वतंत्रता सेनानियों की गौरवशाली धरा के तौर पर पहचान रखने वाला गांव दमदमा आज बुनियादी सुविधाओं के लिए जूझ रहा है। विडंबना यह है कि जिस मिट्टी ने देशभक्ति के इतिहास लिखे, उसी मिट्टी के लोग आज गंदगी, बदइंतजामी और प्रशासनिक उदासीनता के बीच जीवन जीने को मजबूर हैं। गांव की गलियों में हालात इतने खराब हैं कि कूड़े और कीचङ के ढेर लगे हुए हैं। नालियां जाम पड़ी हैं और सफाई व्यवस्था पूरी तरह चरमराई हुई है। कई स्थानों पर कीचड़ इस कदर फैला है कि पैदल चलना तक मुश्किल हो गया है।
स्कूली बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को रोजाना इन हालातों से जूझना पड़ रहा है, लेकिन चुने गए प्रतिनिधियों के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही। बारिश का मौसम आते ही गांव की तस्वीर और भयावह हो जाती है। जलभराव दमदमा की सबसे बड़ी समस्या बन चुका है। हल्की बारिश में ही सड़कों और गलियों में पानी भर जाता है, जिससे घरों तक में पानी घुसने का खतरा बना रहता है। जल निकासी की कोई ठोस व्यवस्था न होने के कारण यह समस्या हर साल और गंभीर होती जा रही है। गंदे पानी के जमाव से मच्छरों का प्रकोप बढ़ता है, जिससे डेंगू, मलेरिया जैसी बीमारियों का खतरा भी मंडराने लगता है। गांव की सरपंच फिलहाल महिला है तो ग्रामीण आंचल और जागरूकता की कमी के कारण समस्याओ के लिए उनके प्रतिनिधि से संपर्क करना पङता है। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार सरपंच प्रतिनिधि को फोन कर शिकायत की गई, लेकिन या तो फोन उठाया नहीं जाता या फिर आश्वासन देकर बात को टाल दिया जाता है। इससे लोगों में भारी नाराजगी है और उन्हें लगने लगा है कि उनकी समस्याओं को जानबूझकर नजरअंदाज किया जा रहा है। हैरानी की बात यह है कि गांव में नेताओं की कमी नहीं अपितु भरमार है। इस गाँव के नेता वैसे तो विधानसभा और लोकसभा के स्तर की लङाई लङने का दंभ भरते है मगर उनके खुद के गाँव की हालात नारकीय है। गाँव में आगामी पंचायत चुनाव को लेकर करीब दर्जनभर लोग चुनाव मैदान में उतरने का मन बना रहे है लेकिन वे भी वोट के लालच के कारण मुद्दो की राजनीति से दूर है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर समय रहते सफाई व्यवस्था दुरुस्त नहीं की गई और जल निकासी की स्थायी व्यवस्था नहीं बनाई गई, तो आने वाले दिनों में हालात और भी बदतर हो सकते हैं।
अब बड़ा सवाल यह है कि आखिर चुने गए प्रतिनिधि और जिम्मेदार जन कब जागेंगे ? कब मिलेगा दमदमा को उसका हक, और कब शहीदों की इस धरती को मिलेगी वो इज्जत, जिसकी वो हकदार है?

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नीलोफर हाशमी, देश रोजाना ऑनलाइन में सीनियर पत्रकार हैं। वे करंट अफेयर्स, ह्यूमन नेचर, सोशल और पॉलिटिक्स से जुड़ी खबरें बनाती हैं। मीडिया में नीलोफर को सालों का अनुभव है।
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