जिले में कानून व्यवस्था को और अधिक प्रभावी एवं परिणामोन्मुख बनाने के उद्देश्य से लघु सचिवालय रेवाड़ी स्थित सभागार में पुलिस अधीक्षक हेमेंद्र कुमार मीणा की अध्यक्षता में अपराध समीक्षा बैठक आयोजित की गई।
रेवाड़ी : जिले में कानून व्यवस्था को और अधिक प्रभावी एवं परिणामोन्मुख बनाने के उद्देश्य से लघु सचिवालय रेवाड़ी स्थित सभागार में पुलिस अधीक्षक हेमेंद्र कुमार मीणा की अध्यक्षता में अपराध समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में विभिन्न श्रेणियों के अपराधों की प्रगति की समीक्षा करते हुए आगामी कार्ययोजना पर विस्तृत चर्चा की गई।बैठक में डीएसपी हेडक्वार्टर डॉ रविन्द्र सिंह, डीएसपी बावल सुरेन्द्र श्योराण, डीएसपी कोसली विद्यानंद, डीएसपी ट्रैफिक पवन कुमार, सी डब्ल्यू सी चेयरपर्सन श्रुति शर्मा और डिप्टी डायरेक्टर प्रॉसिक्यूशन हरपाल समेत सभी थाना प्रबन्धक, पीओ स्टाफ इंचार्ज तथा सभी इंचार्ज कार्यालय पुलिस अधीक्षक रेवाड़ी मौजूद रहे।बैठक में शामिल पुलिस अधिकारी।
बैठक में पुलिस अधीक्षक हेमेंद्र कुमार मीणा ने जिले में कानून-व्यवस्था, अपराध के आंकड़ों का तुलनात्मक विश्लेषण और भविष्य की कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा की। नशा तस्करी से जुड़े मामलों की समीक्षा करते हुए निर्देश दिए कि अवैध गतिविधियों में संलिप्त व्यक्तियों, नेटवर्क एवं सप्लाई चैन पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए समन्वित एवं साक्ष्य-आधारित कार्रवाई की जाए।उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रत्येक प्रकरण में विवेचना की गुणवत्ता सुनिश्चित की जाए तथा मामलों का समयबद्ध निष्पादन किया जाए।
बैठक के दौरान संगठित अपराध, संपत्ति संबंधी अपराध, साइबर अपराध, महिला एवं बाल सुरक्षा से जुड़े मामलों, लंबित वारंटों तथा फरार आरोपियों की धरपकड़ की स्थिति की भी समीक्षा की गई। संवेदनशील क्षेत्रों में गश्त बढ़ाने, नियमित चेकिंग अभियान संचालित करने तथा सूचना तंत्र को सुदृढ़ करने पर विशेष बल दिया गया।
बाल कल्याण एवं लापता बच्चों पर चर्चा :
बैठक की शुरुआत में उन बच्चों के कल्याण पर विशेष जोर दिया गया जो लापता हैं, लावारिस पाए गए हैं या अपने परिवारों से बिछड़ गए हैं। इस सम्बंध में (CWC Chairperson) श्रीमती श्रुति शर्मा ने जेजे एक्ट (JJ Act) के तहत बच्चों के पुनर्वास और उनकी देखभाल के संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश साझा किए। एसपी ने निर्देश दिए कि जब भी कोई नाबालिग बच्चा मिले, तो पुलिस का व्यवहार अत्यंत संवेदनशील और मैत्रीपूर्ण होना चाहिए तथा सीडब्ल्यूसी से बच्चे की काउंसलिंग करवानी चाहिए। इसके अलावा महिला विरुद्ध अपराधों को गंभीरता से ले और तुरंत कार्रवाई करें ।
जांच में आधुनिक तकनीक और SOP की पालन :
बैठक के दौरान डिप्टी डायरेक्टर प्रॉसिक्यूशन श्री हरपाल ने कानूनी बारीकियों और साक्ष्यों (Evidence) के संकलन पर चर्चा की, ताकि कोर्ट में केस को मजबूती से रखा जा सके और अपराधियों को सख्त सजा दिलवाई जा सके। उन्होंने बताया की कोर्ट में चालान पेश करते समय और तफ्तीश के दौरान मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) का कड़ाई से पालन करनी चाहिए।
अपराध नियंत्रण और पुलिस व्यवहार
पुलिस अधीक्षक ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि कानून के प्रावधानों के अनुरूप निष्पक्ष एवं प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए तथा जनविश्वास को सर्वोपरि रखते हुए पुलिस कार्यप्रणाली में पारदर्शिता बनाए रखी जाए। पुलिस थानों में आने वाले हर आमजन से मैत्रीपूर्ण व्यवहार करे व गैर कानूनी कार्य करने वालों के खिलाफ सख्ती से निपटे।
"हमारा मुख्य उद्देश्य जिले में अपराध को कम करना और जनता के बीच सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करना है। पुलिस और जनता के बीच बेहतर तालमेल ही अपराध मुक्त समाज की नींव है।"