बंगाल इलेक्शन से पहले टीएमसी नेताओं पर ईडी की छापेमारी को ममता ने बताया बीजेपी की साजिश !
मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आई-पैक निदेशक गिरफ़्तार, टीएमसी ने बताया चुनावी साज़िश
पश्चिम बंगाल में चुनाव से पहले सियासत गरमा गई है। 20 अप्रैल को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कोलकाता में बड़ी कार्रवाई करते हुए पुलिस के DCP शांतनु सिन्हा बिस्वास और कारोबारी जॉय कामदार के ठिकानों पर छापेमारी की है। यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग और ‘सोना पप्पू सिंडिकेट’ केस से जुड़ी बताई जा रही है, जिसमें करोड़ों की नकदी, सोना और हथियार बरामद होने का दवा भी किया हैं। शांतनु सिन्हा को ममता बनर्जी का करीबी माना जाता है। चुनाव से ठीक पहले लगातार हो रही ED और आयकर विभाग की कार्रवाइयों ने TMC बनाम BJP की लड़ाई को और तीखा बना दिया है। अब क्या ये भ्रष्टाचार पर कार्रवाई का मामला है … या चुनावी सियासत? इसे समझते हैं। लेकिन पहले एक नजर 2021 के चुनावों के दौरान और उसके बाद हुई जांच और छापे मारी पर एक नजर।

2021 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान और बाद में केंद्रीय जांच एजेंसियों (ED, CBI) ने टीएमसी के कई प्रमुख नेताओं, मंत्रियों और सहयोगियों पर शिकंजा कसा, जिसमें कोयला घोटाला, मवेशी तस्करी और नारद स्टिंग ऑपरेशन जैसे हाई-प्रोफाइल मामले शामिल थे। चुनावों से ठीक पहले और बाद में हुई। जैसे -विधानसभा चुनाव के तुरंत बाद, मई 2021 में, सीबीआई ने टीएमसी के कद्दावर नेताओं—फिरहाद हकीम, सुब्रत मुखर्जी, मदन मित्रा और पूर्व टीएमसी नेता शोभन चटर्जी को नारद स्टिंग ऑपरेशन मामले में गिरफ्तार किया था। जिसके विरोध में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद कोलकाता में सीबीआई के निजाम पैलेस कार्यालय पहुंच गई थीं और घंटों धरने पर बैठी थीं, जिससे केंद्र और राज्य के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया था।
अवैध कोयला खनन और मवेशी तस्करी मामलों में मनी लॉन्ड्रिंग की जांच। इससे जुड़े लिंक टीएमसी नेताओं और उनके सहयोगियों से भी तलाशे गए थे, जिसमें अभिषेक बनर्जी से भी पूछताछ की गई थी। चुनाव के बाद हुई हिंसा के मामलों में भी कई स्थानीय टीएमसी नेताओं को सीबीआई द्वारा नोटिस और छापे का सामना करना पड़ा था। टीएमसी ने इन कार्रवाइयों को "राजनीतिक प्रतिशोध" बताया और आरोप लगाया कि केंद्र सरकार बीजेपी के इशारे पर एजेंसियों का इस्तेमाल कर रही है। वहीं बीजेपी ने इसे भ्रष्टाचार के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' नीति बताया था।

अब अप्रैल 2026 में 23 और 29 तारिख को बंगाल में इलेक्शन है उससे पहले । सरकारी जांच एजेंसिया फिर से सक्रिय हो गई हैं। जिसमें टीएमसी के कई नेता कार्यकर्ता और बिज़नेस में लपेटे में आ गए हैं। ममता ने आरोप लगाया कि चुनाव के दौरान छापेमारी और मनी लॉन्ड्रिन जांच राजनितिक दुर्भावना से प्रेरित है। लेकिन बंगाल की जनता बीजेपी को सबक सिखाएगी
ममता बनर्जी ने इसे अपनी पार्टी के खिलाफ साजिश बताया है। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी को हर दिन ईडी की छापेमारी का सामना करना पड़ रहा है। रेड के जरिये उनकी पार्टी को डराया जा रहा है। कुछ राजनितिक विशेषज्ञ इसे बिहार इलेक्शन से जोड़ रहे है। जहाँ प्रशांत किशोर आये दिन बीजेपी के नेताओं और नितीश सरकार पर कर्रेप्शन के आरोप लगा रहे थे। लेकिन वहां कोई ईडी की करवाई देखने को नहीं मिली लेकिन, बंगाल में आये दिन नेताओं और कार्यकर्ताओं पर ईडी की कार्रवाई होरही है। विशेषज्ञों का मानना है की इसके पीछे चुनाव आयोग और केंद्र की सत्ता जिम्मेदार है। इसी का विरोध ममता अपने मंचो बार-बार कर रही हैं।
एक खबर ये भी है कि चुनाव में बाधा डालने वालों की एक लम्बी चौड़ी लिस्ट बनाई गई है, जिसमें तृणमूल के नेता, कार्यकर्त्ता और विधायकों के नाम शामिल है। चुनाव आयोग ने टीएमसी के 9 नेताओं की सूचि बनाई है जिन्हे ट्रबल मेकर बताया गया है। जो सूचि बनाई गई है उसमे करीब 100 लोगों के नाम शामिल हैं। 20 अप्रैल को एक रैली के दौरान ममता ने कहा कि मेरे कई कार्यकर्ताओं को गिरफ्ताज किया जा सकता है। उन्होंने बीजेपी के एक नेता पर करप्शन का आरोप लगाते हुए कहा कि ये उपद्रवियों की पार्टी है।

हालाँकि चुनाव के दौरान सुरक्षा में तैनात कर्मियों की मीटिंग की तस्वीरें जारी कर टीएमसी नेताओं ने आरोप लगाया है कि ये मीटिंग केंद्र सरकार द्वारा चुनाव को प्रभावित करने के लिए जा रही है। उनका कहना है जितनी फाॅर्स यहाँ लगाई गई है उससे आधी फाॅर्स ही काफी थी। टीएमसी नेता महुआ मोइत्रा ने ट्वीट किया कि बीजेपी के सारे पालतू आईपीएस यहाँ जमा है ताकि वे चुनाव में हेराफेरी कर सकें। हालाँकि हम इस बाद से सहमत नहीं क्योंकि चुनाव के समय फाॅर्स की इस तरह मीटिंग्स होती ही हैं। सेना को खास निर्देश दिए जाते हैं ताकि कोई अप्रिय घटना ना घटे।
वैसे आपको बता दे कि यहाँ SIR में जिस क्षेत्र से ज़्यादा लोगों के नाम कटे है उन क्षेत्रों पर सेना की ज्यादा तैनाती की गई है। चुनाव आयोग ने भी कुछ चुनाव बूथों को अति संवेदनशील घोषित किया है। क्योंकि वहां हर बूथ पर करीब 100 से 150 लोगों के नाम काटे गए हैं। पुलिस अधिकारियों का भी कहना कि जिनके नाम कटे हैं वो चुनाव के दिन हंगामा कर सकते हैं।
पश्चिम बंगाल में विधानसभा की 294 सीटें है। 2021 में टीएमसी को 215 सीटें मिली जबकि बीजेपी को 77 सीटें मिली। जबकि 2024 के लोकसभा चुनाव में बंगाल 42 लोकसभा सीटों में से टीएमसी को 29, बीजेपी को 12 तो कांग्रेस को एक सीट पर जीत मिली थी। अब 2026 में 23 और 29 अप्रैल को यहाँ चुनाव होने जिसका रिजल्ट 4 मई को घोषित होगा। अब देखना ये की पश्चिम बंगाल में चल रही राजनितिक उठा-पटक और आरोप-प्रत्यारोप और आये दिन चल रही छापेमारी चुनाव को किस और ले जाएगी। ममता भरेंगी हुंकार या बीजेपी का पलड़ा होगा भारी।

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