गुरु शिष्य परंपरा प्रशिक्षण योजना के तहत आवेदन मांगे - गुरु, संगीतकार व शिष्यों को प्रतिमाह मिलेगी 7500, 3750 और 1500 रुपए छात्रवृति
भारत की समृद्घ सांस्कृतिक विरासत एवं लुप्त लोक कलाओं के संरक्षण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से उत्तर-मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र प्रयागराज की ओर से महानिदेशक कलां एवं सांस्कृतिक कार्य विभाग हरियाणा के माध्यम से गुरु शिष्य परंपरा प्रशिक्षण योजना के तहत लुप्त होती विभिन्न विद्याओं के लिए आवेदन मांगे गए हैं।
रेवाड़ी। भारत की समृद्घ सांस्कृतिक विरासत एवं लुप्त लोक कलाओं के संरक्षण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से उत्तर-मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र प्रयागराज की ओर से महानिदेशक कलां एवं सांस्कृतिक कार्य विभाग हरियाणा के माध्यम से गुरु शिष्य परंपरा प्रशिक्षण योजना के तहत लुप्त होती विभिन्न विद्याओं के लिए आवेदन मांगे गए हैं। 
डीसी अभिषेक मीणा ने बताया कि उत्तर-मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र प्रयागराज द्वारा राज्य से लुप्त होती विधाओं के गुरू, संगीतकार और शिष्यों को मासिक छात्रवृत्ति प्रदान जाएगी। इन विधाओं में लोक गायन, लोकगाथा, लोक चित्रकला, दुर्लभ वाद्य यंत्र, लोक नृत्य विधा शामिल है।

डीसी अभिषेक मीणा ने बताया कि उत्तर-मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र प्रयागराज द्वारा राज्य से लुप्त होती विधाओं के गुरू, संगीतकार और शिष्यों को मासिक छात्रवृत्ति प्रदान जाएगी। इन विधाओं में लोक गायन, लोकगाथा, लोक चित्रकला, दुर्लभ वाद्य यंत्र, लोक नृत्य विधा शामिल है। उन्होंने बताया कि ऐसे आवेदन करने के लिए आवेदक की आयु 50 वर्ष से कम नहीं हो तथा उनको संबंधित क्षेत्र में 20 वर्ष का अनुभव होना चाहिए। उन्होंने बताया कि गुरू, संगतकार और शिष्यों को क्रमश: 7500 रुपए, 3750 रुपए और 1500 रुपए मासिक छात्रवृति भी प्रदान जाएगी।
आवेदक अपने आवेदन महानिदेशक कला एवं सांस्कृतिक कार्य विभाग, हरियाणा को एससीओ नंबर-29, सेक्टर 7- सी, मध्य मार्ग, चंडीगढ़ के कार्यालय में भिजवाएं पर ताकि इन आवेदन को उत्तर - मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, प्रयागराज भिजवाया जा सके।
इस योजना की पात्रता एवं मापदंड
1. आवेदक की आयु 50 वर्ष से कम नहीं होनी चाहिए।
2. आवेदक के पास अपनी कला क्षेत्र का कम से कम 20 वर्ष का अनुभव होना चाहिए।
3. आवेदक अपने बायो-डाटा व नवीनतम छायाचित्र के साथ प्रार्थना पत्र भेजें।
4. अपने कला क्षेत्र में मिले प्रमाण पत्रों की स्व - प्रमाणित प्रतियां संलग्न करें।
5. सरकार या प्रमुख कला और संस्कृति से जुड़ी संस्था से मिले पुरस्कार या मान्यता प्राप्त प्रमाण पत्रों की प्रतियां संलग्न करें।
6. विधा के प्रशिक्षण के लिए एक गुरू, चार शिष्य (लोक गायन, लोकगाथा, लोक चित्रकला, दुर्लभ वाद्य यंत्रों, लोक नृत्यों), लोक नृत्यों में अधिकतम आठ एवं जिन विधाओं में संगतकारों की आवश्यकता होगी, उसमें एक या दो संगतकारों को रखना निर्धारित किया गया है।

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