यौन उत्पीड़न की रोकथाम के लिए जागरूकता कार्यशाला आयोजित
एसवीएसयू की आंतरिक शिकायत समिति द्वारा किया गया आयोजन, विशेषज्ञ के रूप में मेघना मक्कड़ ने किया जागरूक
श्री विश्वकर्मा कौशल विश्वविद्यालय की आंतरिक शिकायत समिति द्वारा मंगलवार को कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न की रोकथाम हेतु जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया गया। विशेषज्ञ के रूप में मेघना मक्कड़ ने स्टाफ एवं विद्यार्थियों को यौन उत्पीड़न की रोकथाम के विषय में कानूनी एवं व्यवहारिक जानकारी दी।
पलवल। श्री विश्वकर्मा कौशल विश्वविद्यालय की आंतरिक शिकायत समिति द्वारा मंगलवार को कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न की रोकथाम हेतु जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया गया। विशेषज्ञ के रूप में मेघना मक्कड़ ने स्टाफ एवं विद्यार्थियों को यौन उत्पीड़न की रोकथाम के विषय में कानूनी एवं व्यवहारिक जानकारी दी। 
उन्होंने कहा कि कार्यस्थल पर हमारा व्यवहार दूसरों के प्रति संवेदनशील एवं सम्मानजनक होना चाहिए। किसी भी स्तर पर लैंगिक भेदभाव स्वीकार्य नहीं है। महिलाओं के प्रति हमें सजगतापूर्ण व्यवहार करना चाहिए। उन्होंने समाज में स्त्री एवं पुरुष से जुड़ी अनेक धारणाओं के विषय में भी बताया और कार्यस्थल पर व्यवहार करने के तौर-तरीके पर चर्चा की। अपने व्याख्यान के दौरान उन्होंने कार्यस्थल एवं शैक्षणिक संस्थानों में होने वाले विभिन्न प्रकार के उत्पीड़न के बारे में विस्तार से जानकारी दी। मेघना मक्कड़ ने वास्तविक जीवन के उदाहरणों के माध्यम से प्रतिभागियों को यह समझाया कि किन परिस्थितियों को उत्पीड़न की श्रेणी में माना जा सकता है। साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसी व्यवहार या टिप्पणी का मूल्यांकन करते समय दूसरे व्यक्ति की मंशा एवं परिस्थिति की संवेदनशीलता को समझना अत्यंत आवश्यक होता है। कार्यशाला के दौरान पोश अधिनियम के अंतर्गत शिकायतों के निस्तारण हेतु निर्धारित विभिन्न समय-सीमाओं की जानकारी भी प्रतिभागियों को प्रदान की गई। आंतरिक शिकायत समिति की संयोजक प्रोफेसर उषा बत्रा ने स्वागत उद्बोधन में कहा कि कार्यस्थल पर सुरक्षित वातावरण उपलब्ध करवाना महत्वपूर्ण है। उन्होंने सभी अतिथियों, संकाय सदस्यों, कर्मचारियों एवं विद्यार्थियों का स्वागत करते हुए कहा कि पोश अधिनियम केवल कानूनी प्रावधान नहीं, बल्कि कार्यस्थल एवं शैक्षणिक संस्थानों में गरिमा, समानता एवं सुरक्षा सुनिश्चित करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। कार्यक्रम के अंत में समिति सदस्य डॉ. सविता शर्मा द्वारा धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया गया। समिति सदस्य एवं विधि अधिकारी केशव शर्मा, समिति सदस्य डॉ. भावना रूपराई, सोनिया शर्मा और शकील अहमद ने भी कार्यशाला में अपने सुझाव दिए और महिलाओं के लिए सुरक्षित वातावरण बनाए रखने के लिए अपने सुझाव दिए।

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