सिर्फ दूध नहीं अब गोबर बेच कर भी पैसा कमा सकेंगे किसान।
डंग फॉर डेरी प्लांट पशुपालकों से रोजाना खरीदेगा गोबर।
डेयरी प्लांटों द्वारा पशुपालकों से रोजाना गोबर खरीदने की पहल देश के 15 राज्यों में एक व्यापक मॉडल के रूप में उभर रही है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य किसानों की आय बढ़ाना और कचरे से ऊर्जा बनाना है। साथ ही इससे किसानो को दोहरा लाभ होगा। एक तरफ जहाँ वो दूध बेच कर पैसा कमाते हैं वहीँ अब वे गोबर भी बेच सकेंगे।

अक्सर दुग्ध उत्पादन के लिए किसान पशुपालन करते हैं, ताकि वे दूध बेच कर ज़्यादा से ज़्यादा आमदनी ले सकें। लेकिन उनके सामने बहुत बड़ी समस्या आती है गोबर निबटान की। डेयरी फार्मों में गोबर का सही प्रबंधन और निस्तारण एक बड़ी चुनौती है, गोबर को नालियों में बहाने से सीवर जाम और बीमारियाँ फैलने का खतरा रहता है। लेकिन सही तकनीक अपनाकर इसे अतिरिक्त आय के स्रोत में बदला जा सकता है। जैसे - पशुपालक जैविक खाद बना सकते है, बायोगैस प्लांट लगा सकते हैं, उपले या कंडे बना कर बेच सकते हैं, गौ आधारित कृषि कर सकते है ये सभी उपाय अपना कर वे अपनी आमदनी को दोना छोड़िये तिगुना कर सकते है।लेकिन सभी किसान ये उपाय नहीं सकते तो ऐसे में गोबर का निबटान बहुत बड़ी समस्या बन जाता है पशुपालकों के लिए। डेरी प्लांट उन लोगो से गोबर खरीद कर उनकी इस मुसीबत को कम कर सकता।

ये कैसे संभव होगा।?
देश के 15 राज्यों की 26 मिल्क कोऑपरेटिव को एक बड़ा सुझाव दिया गया है और ये सुझाव सहकारिता मंत्रालय की ओर से आया है। इसमे नेशनल डेयरी डवलपमेंट बोर्ड (NDDB) को भी शामिल किया गया है। सुजाहव में कहा गया है कि वे गोबर के निबटान के लिए कोई योजना बनाएं जिससे गन्दगी तो साफ़ होगी साथ ही कोऑपरेटिव इस पर काम करके अपनी लोगो को रोजगार भी दे सकते हैं। सुझाव की गंभीरता को देखते हुए कोऑपरेटिव इसकी तैयारी में लग गई हैं
8 से 10 करोड़ रुपये का गोबर रोजाना खरीदा जायेगा
सुझाव के मुताबिक खासतौर पर देश के 15 राज्यों में रोजाना 8 से 10 करोड़ रुपये का टनों गोबर खरीदा जाएगा। इसके लिए एनडीडीबी मिल्क कोऑपरेटिव के साथ समझौता करेगी। अगर खरीदे जाने वाले गोबर की मात्रा पर बात करें तो हर रोज करीब 16 करोड़ टन गोबर की खरीद की जाएगी।

सुबह शाम दूध के साथ बिकेगा गोबर
पशुपालक सुबह-शाम दूध और गोबर दोनों साथ बेच सकेंगे। कई जगह पर तो इसकी शुरुआत भी हो चुकी है। जैसे यूपी के बनारस और इसके आसपास के इलकों में इसकी शुरुआत हो चुकी है। इस योजना का मकसद किसानों और पशुपालकों की इनकम को बढ़ाने का है। आज बहुत से पशुपालक प्राइवेट कंपनियों को दूध बेचते हैं। जबकि सरकार उन्हें मिल्क कोऑपरेटिव के साथ जोड़ना चाहती है।
गोबर की खरीद से फायदे
इस योजना से तीन बड़े फायदे होंगे, पशुपालकों से गोबर खरीदकर कुशल खाद प्रबंधन किया जा सकेगा, ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा जिससे पर्यावरण को सुधारने का मौका भी मिलेगा। इससे डेयरी प्लांट की एनर्जी सप्लाई भी होगी और खेतों को नेचुरल खाद मिलेगी। बायोगैस बनाए में गोबर का इस्तेमाल किया जाएगा।

गोबर मैनेजमेंट के अन्य फायदे
अक्सर देखा जाता ही कि दूध के बड़े-बड़े प्लांटों में दूध की प्रोसेसिंग में बहुत ज़्यादा ऊर्जा की खपत होती है। गोबर खरीदकर डेयरी प्लांट अपनी जरूरत के मुताबिक उससे गैस और बिजली बना सकेंगे उस गैस या बिजली से प्लांट में दूध प्रोसेस करने की जरूरत को पूरा किया जायेगा। इसके लिए प्लांट परिसर में खर्च होने वाली बिजली की की भी पूर्ति की जाएगी। कुछ प्लांट जिनमे जिन्होंने इस काम की शुरुआत कर दी है वे अपनी ऊर्जा संबधी सभी जरूराओं को पूरा कर पा रहे है। इतना ही नहीं ये सब जरूरत पूरी होने के बाद गोबर की स्लरी जो बचती है। इस स्लरी को प्रोसेस कर तरल खाद बनाई जा रही है। इसी तरल खाद को दूध बेचने वाले पशुपालकों को सस्ते दाम पर दे दिया जा रहा है। इससे पशुपालक यानि किसानों को अच्छी खाद मिल जाती है, वहीं नेचुरल खाद से मिटटी की सेहत भी अच्छी हो रही है।
बनेंगे सुन्दर स्वच्छ गांव
पुराने समय में गौ आधारित खेती की जाती थी और गोबर के उपले बना कर खाना बनाए में उनका प्रयोग किया जाता था। लेकिन अब ज़्यादातर लोग गैस पर ही खाना बनाते हैं। जिससे गांव में गोबर और गन्दगी का अम्बार लग जाता है। बरसात के दिनों में हालात और भी ख़राब हो जाते हैं। Dung for Dairy Plant देश में रोजाना पशुपालकों से 50 पैसे किलो के हिसाब से गोबर की खरीद रहा है। गोबर के दोहरे इस्तेमाल के लिए ये योजना शुरू की जा रही है। इससे डेयरी प्लांट में बिजली सम्बंधित जरूरतें पूरी होंगी, सस्ते दामों पर खेतों को नेचुरल खाद मिलेगी और बायोगैस बह बनाई जाएगी। पशुपालक सुबह-शाम दूध और गोबर दोनों साथ बेच कर मुनाफा भी कमा सकेंगे। गोबर बेचने से उन्हें ज्यादा न सही थोड़ा ही सही फायदा तो होगा ही। साथ ही गाँव भी सुन्दर और स्वच्छ बनेगे।

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