Narnaul News: महेंद्रगढ़ और कैथल से शुरुआत, अब किसान एडवांस में बुक कर सकेंगे सब्सिडी वाली खाद
हरियाणा के किसानों के लिए राहत भरी खबर है। फसल बुवाई के पीक सीजन में खाद की किल्लत, डीएपी-यूरिया के लिए दुकानों के चक्कर काटने और लंबी कतारों में खड़े रहने की समस्या से जल्द ही मुक्ति मिलने जा रही है।
नारनौल। हरियाणा के किसानों के लिए राहत भरी खबर है। फसल बुवाई के पीक सीजन में खाद की किल्लत, डीएपी-यूरिया के लिए दुकानों के चक्कर काटने और लंबी कतारों में खड़े रहने की समस्या से जल्द ही मुक्ति मिलने जा रही है। प्रदेश सरकार ने सब्सिडी वाले उर्वरकों की पारदर्शी और सुगम बिक्री सुनिश्चित करने के लिए ‘डिजिटल बुकिंग’ व्यवस्था शुरू करने का निर्णय लिया है। इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत किसान अपने खेत की जरूरत के हिसाब से खाद की एडवांस बुकिंग करा सकेंगे, जिससे उन्हें तय समय पर बिना किसी परेशानी के खाद मिल सकेगी।

महेंद्रगढ़ और कैथल से होगी शुरुआत, मुख्य सचिव ने दी मंजूरी:
हरियाणा के मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी की अध्यक्षता में हुई एक उच्चस्तरीय प्रशासनिक बैठक में इस नई व्यवस्था के खाके को अंतिम रूप दिया गया। सरकार ने शुरुआती चरण में इस डिजिटल प्रोजेक्ट को परीक्षण के तौर पर लागू करने के लिए महेंद्रगढ़ और कैथल जिलों का चयन किया है।
अधिकारियों के मुताबिक, इन दोनों जिलों में पायलट प्रोजेक्ट के सफल क्रियान्वयन और व्यावहारिक नतीजों का आकलन करने के बाद इस पूरी व्यवस्था को चरणबद्ध तरीके से राज्य के बाकी सभी 20 जिलों में लागू कर दिया जाएगा। सरकार का मुख्य मकसद वास्तविक मांग के आंकड़ों के आधार पर ही जिलों और सोसायटियों को खाद की आपूर्ति का सटीक ढांचा तैयार करना है।
क्यूआर कोड और टोकन से मिलेगी खाद, कालाबाजारी पर लगेगी रोक:
नई व्यवस्था के तहत किसानों को एक विशेष मोबाइल एप्लीकेशन या डिजिटल वेब पोर्टल की सुविधा दी जाएगी। किसान अपने मोबाइल से ही जमीन के ब्योरे के साथ आवश्यक यूरिया या डीएपी की मांग दर्ज कराएंगे। आवेदन मंजूर होते ही किसान के मोबाइल पर एक डिजिटल क्यूआर कोड या यूनिक टोकन नंबर भेजा जाएगा। इसके बाद किसान अपनी सुविधानुसार नजदीकी कृषि बिक्री केंद्र या पैक्स जाकर वही क्यूआर कोड दिखाकर अपनी निर्धारित खाद प्राप्त कर सकेगा।

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नीलोफर हाशमी, देश रोजाना ऑनलाइन में सीनियर पत्रकार हैं। वे करंट अफेयर्स, ह्यूमन नेचर, सोशल और पॉलिटिक्स से जुड़ी खबरें बनाती हैं। मीडिया में नीलोफर को सालों का अनुभव है।
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