Mewat News: गुब्बारा टंकी फटने से पांच मासूम बेटियों के सिर से उठा पिता का साया, मदद को आगे आई जमीयत उलेमा
नूंह जिले के गांव जमालगढ़ में दो दिन पहले हुए एक दर्दनाक हादसा ने पूरे इलाके को झकझोर गया है।
मेवात। नूंह जिले के गांव जमालगढ़ में दो दिन पहले हुए एक दर्दनाक हादसा ने पूरे इलाके को झकझोर गया है। हाइड्रोजन गैस से भरी गुब्बारे की टंकी के अचानक फटने से एक मेहनतकश मजदूर की जान चली गई, और पीछे छूट गया एक बेबस परिवार—पांच छोटी-छोटी बेटियां और टूटा हुआ घर। यह सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि गरीबी, लाचारी और व्यवस्था की खामियों की एक कड़वी सच्चाई भी है।

मृतक मुस्ताक, जो पिनगवां खंड के गांव मामलीका के रहने वाले थे, अपनी रोजी-रोटी के लिए मजदूरी के साथ-साथ गुब्बारे बेचने का काम करते थे। हादसे वाले दिन भी वह उम्मीदों से भरे गुब्बारे बेचने गांव जमालगढ़ में पहुंचे थे, लेकिन किसे पता था कि यही गुब्बारे उनके जीवन की आखिरी डोर बन जाएंगे। अचानक टंकी में विस्फोट हुआ और तेज धमाके के साथ सब कुछ बदल गया। इस हादसे में मुस्ताक बुरी तरह घायल हो गए—उनके शरीर में कांच के टुकड़े धंस गए, खासकर पेट में गहरी चोटें आईं।
परिजन उन्हें तुरंत अस्पताल लेकर दौड़े, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। अस्पताल के गेट तक पहुंचते-पहुंचते मुस्ताक ने दम तोड़ दिया। यह मंजर इतना दर्दनाक था कि जिसने भी सुना, उसकी आंखें नम हो गईं। हादसे में कई मासूम बच्चे भी घायल हुए, जिससे गांव में दहशत और दुख का माहौल फैल गया।
मुस्ताक की मौत के बाद उनके परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। पांच छोटी बेटियां अब अपने पिता की राह ताक रही हैं, जो कभी लौटकर नहीं आएंगे। परिवार पहले से ही गरीबी से जूझ रहा था, लेकिन अब हालात और भी बदतर हो गए हैं। घर में कमाने वाला कोई नहीं बचा, और भविष्य अंधकारमय नजर आ रहा है। परिजनों की आंखों में आंसू और दिल में एक ही सवाल है—अब उनका सहारा कौन बनेगा?
इस दर्दनाक घटना के बाद समाज के कुछ लोग और संगठन मदद के लिए आगे आए हैं। जमीयत उलेमा मेवात की एक टीम ने पीड़ित परिवार से मुलाकात की और उन्हें आर्थिक सहायता प्रदान की। टीम के प्रतिनिधि साबिर मजाहिरी ने इस हादसे को बेहद दुखद बताते हुए कहा कि जैसे ही उन्हें घटना की जानकारी मिली, उन्होंने तुरंत परिवार की मदद का फैसला किया।
उन्होंने कहा, “मुस्ताक एक मेहनतकश इंसान था, जो दिन-रात मेहनत करके अपने बच्चों का पेट पालता था। आज उसकी मौत ने एक पूरे परिवार को बेसहारा कर दिया है। यह हमारी जिम्मेदारी है कि हम ऐसे परिवारों के साथ खड़े हों।”
उन्होंने प्रशासन और सरकार से मांग की कि पीड़ित परिवार को जल्द से जल्द उचित मुआवजा दिया जाए और उनके पुनर्वास की व्यवस्था की जाए।
जमीयत उलेमा ने यह भी ऐलान किया कि वह मुस्ताक की पांचों बेटियों की शिक्षा की जिम्मेदारी उठाने को तैयार है। यह पहल न सिर्फ एक राहत है, बल्कि उन बच्चियों के भविष्य के लिए एक उम्मीद की किरण भी है।
वहीं ग्राम पंचायत मामलीका के प्रतिनिधियों ने भी इस मामले को गंभीरता से लेते हुए परिवार की मदद का आश्वासन दिया है। उन्होंने कहा कि पंचायत स्तर पर इस परिवार को आवास या जमीन उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा, ताकि उनके सिर पर छत बनी रह सके। साथ ही जिला प्रशासन से विशेष सहायता दिलाने की भी कोशिश की जाएगी।
यह हादसा सिर्फ एक परिवार की त्रासदी नहीं है, बल्कि पूरे समाज के लिए एक चेतावनी भी है। ऐसे खतरनाक गैस सिलेंडरों और उपकरणों के उपयोग में सुरक्षा मानकों की अनदेखी किस तरह जानलेवा साबित हो सकती है, यह घटना उसका जीता-जागता उदाहरण है।
आज जरूरत है कि प्रशासन इस मामले को गंभीरता से ले, न केवल पीड़ित परिवार को न्याय और सहायता दे, बल्कि भविष्य में ऐसे हादसों को रोकने के लिए सख्त कदम भी उठाए। वहीं समाज को भी आगे आकर इस परिवार का सहारा बनना होगा, ताकि पांच मासूम बेटियों की जिंदगी अंधेरे में न डूबे।
यह कहानी एक बाप की है, जिसने अपनी जिंदगी अपने बच्चों के लिए खपा दी—और अंत में उन्हीं के लिए संघर्ष करते हुए दुनिया से चला गया। अब जिम्मेदारी हमारी है कि उस अधूरी कहानी को सहारा देकर पूरा करें।

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नीलोफर हाशमी, देश रोजाना ऑनलाइन में सीनियर पत्रकार हैं। वे करंट अफेयर्स, ह्यूमन नेचर, सोशल और पॉलिटिक्स से जुड़ी खबरें बनाती हैं। मीडिया में नीलोफर को सालों का अनुभव है।
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