Nuh Mewat News: वाईएमडी कॉलेज पर हाईकोर्ट में डीसी का हलफनामा
जमाबंदी में जमीन हरियाणा सरकार के नाम, पर ब्रेन हाई स्कूल के नाम से 1982-83 में स्कूल का कैसे बदला इसका रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं।
नूंह स्थित यासीन मेव डिग्री कॉलेज से जुड़े मामले को लेकर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में जाहिद हुसैन बनाम हरियाणा सरकार रिट मामले में नूंह उपायुक्त अखिल पिलानी, आईएएस ने 5 अक्टूबर 2026 को अदालत में भूमि के पुराने राजस्व रिकॉर्ड और वर्तमान मौके की स्थिति का शपथपत्र देकर विवरण दिया है।
मेवात: नूंह स्थित यासीन मेव डिग्री कॉलेज से जुड़े मामले को लेकर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में जाहिद हुसैन बनाम हरियाणा सरकार रिट मामले में नूंह उपायुक्त अखिल पिलानी, आईएएस ने 5 अक्टूबर 2026 को अदालत में भूमि के पुराने राजस्व रिकॉर्ड और वर्तमान मौके की स्थिति का शपथपत्र देकर विवरण दिया है। वहीं याचिकाकर्ता जाहिद हुसैन का कहना है कि उन्होंने जो आरोप लगाए थे उन्ही को उपायुक्त ने अदालत में दिए अपने हलफनामे में तस्दीक कर दी है। उन्हें जल्द इंसाफ मिलने की उम्मीद है।

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के 28 अप्रैल 2025 के आदेश की अनुपालना में दाखिल रिपोर्ट के अनुसार यासीन मेव डिग्री कॉलेज भूमि विवाद के संबंध में राजस्व रिकॉर्ड की जांच तथा मौके का निरीक्षण कराया गया। हलफनामे में बताया गया है कि संबंधित अधिकारियों ने 29 सितंबर 2026 को मौके का निरीक्षण किया और उसके आधार पर तथ्यात्मक स्थिति रिपोर्ट तैयार की।
1972-73 की जमाबंदी में ब्रेन हाई स्कूल का नाम जबकि 1982-83 में नाम गायब:
डीसी के हलफनामे के अनुसार वर्ष 1972-73 और 1977-78 की जमाबंदी में विवादित भूमि के कास्त/कृषि संबंधी कॉलम में "ब्रेन मेव हाई स्कूल” का नाम दर्ज पाया गया। जबकि इसके बाद वर्ष 1982-83 की जमाबंदी में चौधरी मोहम्मद यासीन मेव हाई स्कूल का नाम दर्ज किया गया। प्रशासन के अनुसार यह प्रविष्टि बाद की जमाबंदियों में भी लगातार चली आ रही है। हालांकि रिपोर्ट का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा यह है कि प्रशासन ने कहा है कि 1982-83 की जमाबंदी में उक्त संस्था का नाम किस आधार अथवा किस प्राधिकरण के आदेश से दर्ज किया गया, इसका कोई रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है।
मालिकाना कॉलम में हरियाणा सरकार का नाम:
डीसी अखिल पिलानी के शपथपत्र में कहा गया है कि जमाबंदी के मालिकाना कॉलम में संबंधित भूमि हरियाणा सरकार के नाम दर्ज है। प्रशासन ने वर्तमान स्थिति का उल्लेख करते हुए बताया कि मौके के निरीक्षण में करीब आधा एकड़ भूमि कॉलेज ग्राउंड के भीतर चारदीवारी से घिरी हुई मिली और उस पर कब्रें बनी हुई हैं। रिपोर्ट के अनुसार मुख्य सड़क के साथ 35 दुकानें भी बनी हुई हैं। इसके अलावा शेष भूमि पर कॉलेज भवन, स्कूल, हॉस्टल और मस्जिद मौजूद होने की बात संबंधित अधिकारियों की रिपोर्ट के आधार पर कही गई है।
एसडीओ सिविल और तहसीलदार की रिपोर्ट के आधार पर तैयार हुआ जवाब:
डीसी ने हाईकोर्ट को बताया कि अदालत के निर्देश के बाद विवादित भूमि और उसके वर्तमान इस्तेमाल की विस्तृत रिपोर्ट सब-डिविजनल ऑफिसर (सिविल), नूंह से मांगी गई थी। एसडीओ सिविल ने तहसीलदार नूंह से राजस्व एवं तथ्यात्मक रिपोर्ट प्राप्त करने के बाद मौके के निरीक्षण और सरकारी रिकॉर्ड के आधार पर स्टेटस रिपोर्ट तैयार की। 5 अक्टूबर 2026 को सत्यापित शपथपत्र में डीसी ने कहा कि रिपोर्ट में दिए गए तथ्य उनके कार्यालय में उपलब्ध आधिकारिक रिकॉर्ड तथा संबंधित अधिकारियों की रिपोर्ट पर आधारित हैं और कोई महत्वपूर्ण तथ्य छिपाया नहीं गया है।
याचिकाकर्ता जाहिद हुसैन ने कहा जो आरोप लगाए वे ही सत्य पाइये हुए:
याचिकाकर्ता जाहिद हुसैन ने प्रशासन की ओर से दाखिल हलफनामे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनकी याचिका का उद्देश्य किसी संस्था या व्यक्ति को परेशान करना नहीं, बल्कि सरकारी रिकॉर्ड, भूमि के स्वामित्व और उसके वास्तविक इस्तेमाल की कानूनी स्थिति स्पष्ट कराना है। जाहिद हुसैन के अनुसार जब सरकारी रिकॉर्ड में भूमि का मालिकाना हक हरियाणा सरकार के नाम दर्ज है और 1982-83 की जमाबंदी से पहले दर्ज ब्रेन मेव हाई स्कूल की जगह चौधरी मोहम्मद यासीन मेव हाई स्कूल का नाम कैसे दर्ज हो गया। जिला प्रशासन के पास रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है, तो इससे जाहिर होता है कि राजस्व रिकॉर्ड में तब्दीली की गई है।
उन्होंने सवाल उठाया कि सरकारी स्वामित्व वाली भूमि पर संस्था का नाम किस आदेश या अधिकार के आधार पर दर्ज हुआ? 1982-83 की प्रविष्टि का मूल आधार क्या था? मुख्य सड़क पर बनी 35 दुकानों की भूमि की कानूनी स्थिति क्या है? कॉलेज परिसर में करीब आधा एकड़ भूमि पर चारदीवारी और कब्रें किस अनुमति से बनीं तथा वर्तमान भूमि उपयोग की वैधानिक स्थिति क्या है? जाहिद हुसैन ने कहा कि मामला केवल पुराने राजस्व रिकॉर्ड की एक प्रविष्टि तक सीमित नहीं है। उनके मुताबिक सरकारी हलफनामे में पुराने रिकॉर्ड की महत्वपूर्ण कड़ी उपलब्ध नहीं होने और मौके पर विभिन्न निर्माण मौजूद होने की स्थिति सामने आई है।
उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य शिक्षण संस्था की गतिविधियों को प्रभावित करना नहीं, बल्कि सरकारी भूमि से जुड़े रिकॉर्ड, स्वामित्व और इस्तेमाल में पारदर्शिता तथा कानून का पालन सुनिश्चित कराना है। उन्होंने मांग की कि जांच में जो भी व्यक्ति दोषी पाया जाए, उसके खिलाफ नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जाए।
अब हाईकोर्ट के आगामी आदेश पर नजर:
प्रशासन की स्टेटस रिपोर्ट और याचिकाकर्ता के आरोपों के बाद अब विवादित भूमि के स्वामित्व, राजस्व रिकॉर्ड में संस्था का नाम दर्ज होने के आधार और वर्तमान निर्माण एवं इस्तेमाल से जुड़े सवाल हाईकोर्ट के सामने हैं। फिलहाल प्रशासन की रिपोर्ट में दर्ज तथ्यों और याचिकाकर्ता के आरोपों के आधार पर किसी व्यक्ति या संस्था को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा। मामले की अंतिम कानूनी स्थिति हाईकोर्ट के आगामी आदेश और आगे होने वाली कार्यवाही से स्पष्ट होगी।

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