Nuh Mewat News: मेवात इंजीनियरिंग कॉलेज के धरने पर बैठे असिस्टेंट प्रोफेसरों ने खोली समस्याओं की परतें
सीईओ, प्रशासक और स्टाफ की संयुक्त बैठक ही हमारी पहली मांग
मेवात इंजीनियरिंग कॉलेज पल्ला में विभिन्न मांगों को लेकर प्रोफेसर, नॉन-टीचिंग व आउटसोर्सिंग कर्मचारी, गेस्ट फैकल्टी और छात्र-छात्राओं का धरना छठे दिन भी जारी रहा। धरने के दौरान कॉलेज के असिस्टेंट प्रोफेसरों ने अपनी समस्याओं को खुलकर सामने रखा।
मेवात: मेवात इंजीनियरिंग कॉलेज पल्ला में विभिन्न मांगों को लेकर प्रोफेसर, नॉन-टीचिंग व आउटसोर्सिंग कर्मचारी, गेस्ट फैकल्टी और छात्र-छात्राओं का धरना छठे दिन भी जारी रहा। धरने के दौरान कॉलेज के असिस्टेंट प्रोफेसरों ने अपनी समस्याओं को खुलकर सामने रखा। उनका कहना है कि हरियाणा वक्फ बोर्ड के प्रशासक जाकिर हुसैन दो बार धरना स्थल पर आ चुके हैं और छात्रों व कर्मचारियों से बातचीत भी हुई, लेकिन अभी तक उनकी मुख्य मांग पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।

धरने पर मौजूद असिस्टेंट प्रोफेसरों ने कहा कि उनकी सबसे पहली और प्रमुख मांग किसी विशेष व्यक्ति के खिलाफ नहीं है। वे चाहते हैं कि हरियाणा वक्फ बोर्ड के सीईओ, प्रशासक, कॉलेज प्रशासन और संबंधित स्टाफ की एक आधिकारिक संयुक्त बैठक एक ही टेबल पर आयोजित की जाए। उनका कहना है कि इस बैठक में सभी पक्ष अपनी बात रखें और मांगों पर स्पष्ट निर्णय लिया जाए। प्रोफेसरों ने बताया कि उन्होंने अपनी मांगों को लेकर अलग-अलग तारीखों में संबंधित अधिकारियों को लिखित ज्ञापन भी दिए हैं। उनका कहना है कि 17, 22 और 30 सितंबर तथा 1, 5, 6 और 7 अक्टूबर को भी अपनी समस्याओं से अधिकारियों को अवगत कराया गया। इसके बावजूद उनकी मुख्य मांग यानी संयुक्त बैठक अब तक नहीं हो सकी है।
एक असिस्टेंट प्रोफेसर ने अपनी स्थिति बताते हुए कहा कि वह करीब 12 वर्षों से कॉलेज में सेवाएं दे रहे हैं, जबकि कई अन्य शिक्षक 10 से 15 वर्षों से संस्थान से जुड़े हुए हैं। उनका कहना है कि शिक्षकों में पीएचडी और उच्च शिक्षित लोग शामिल हैं, लेकिन उन्हें उनकी योग्यता और पद के अनुरूप वेतन नहीं मिल रहा। उन्होंने मांग की कि एआईसीटीई तथा हरियाणा सरकार के निर्धारित मानकों के अनुरूप कर्मचारियों और शिक्षकों को उनका हक मिलना चाहिए। धरनारत कर्मचारियों ने कहा कि उनकी मांग केवल असिस्टेंट प्रोफेसरों तक सीमित नहीं है। स्वीपर, सिक्योरिटी गार्ड, डेली वर्कर, आउटसोर्सिंग कर्मचारी, गेस्ट फैकल्टी और अन्य स्टाफ की समस्याओं का भी समाधान किया जाना चाहिए। उनका कहना है कि जिस पद पर जो वेतन और सुविधा निर्धारित है, वह संबंधित कर्मचारी को मिलनी चाहिए।
प्रोफेसरों ने यह भी स्पष्ट किया कि कुछ शिक्षकों द्वारा अपने व्यक्तिगत अधिकारों को लेकर अदालत का रुख करने को पूरे धरने से जोड़ना उचित नहीं है। एक शिक्षक ने बताया कि उसका अदालत में चल रहा मामला व्यक्तिगत अधिकारों से संबंधित है और इसका अन्य कर्मचारियों की मांगों से सीधा संबंध नहीं है। धरनारत शिक्षकों का कहना है कि वे किसी राजनीतिक कार्यक्रम या केवल आश्वासन के बजाय आधिकारिक संयुक्त बैठक और लिखित समाधान चाहते हैं। उनका कहना है कि यदि सीईओ, प्रशासक और कॉलेज स्टाफ एक साथ बैठकर सभी बिंदुओं पर चर्चा करें तो लंबे समय से चली आ रही समस्याओं का समाधान निकाला जा सकता है। उन्होंने प्रशासन से जल्द संयुक्त बैठक बुलाकर मामले को सुलझाने की मांग की है।

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