रेवाड़ी। साइबर थाना रेवाड़ी पुलिस ने तत्परता से कार्रवाई करते हुए एक महिला से सीबीआई अधिकारी बनकर 4.39 लाख रुपए की साइबर ठगी करने के मामले में एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। इसकी पहचान कर्ण राजपूत (निवासी: गुरु नानक नगर, एकता विहार, अम्बाला कैंट) के रूप में हुई है।
सहेली की गिरफ्तारी और ड्रग्स का डर दिखाकर की ठगी:
जांचकर्ता ने बताया कि मूल रूप से जिले के गांव लूला अहीर की रहने वाली और वर्तमान में रेवाड़ी के मोहल्ला यादव नगर में रह रही पीड़िता ज्योति यादव ने पुलिस को दी अपनी शिकायत में बताया था कि गत 26 मई को उसके व्हाट्सएप पर एक अनजान कॉल आई। कॉल करने वाले ने खुद को सीबीआई अधिकारी बताते हुए डराया कि उसकी सहेली को मुंबई एयरपोर्ट पर भारी मात्रा में सोने और ड्रग्स के साथ गिरफ्तार किया गया है। ठगों ने पीड़िता को डराया कि इस मामले में उसका भी हाथ है और जल्द ही सीबीआई उसके घर पर छापेमारी (रेड) करेगी।
डर के मारे ट्रांसफर किए 4.39 लाख रुपए :
इस झूठे आरोप और कानूनी कार्रवाई के डर से पीड़िता घबरा गई। इसके बाद ठगों ने अलग-अलग नंबरों से कॉल करके मामला रफा-दफा करने के नाम पर पैसों की मांग शुरू कर दी। डरी हुई महिला ने मई से जून माह के दौरान विभिन्न बैंक ट्रांजेक्शन के जरिए कुल 4.39 लाख रुपये ठगों द्वारा बताए गए बैंक खातों में ट्रांसफर कर दिए। जब आरोपियों ने और पैसों की मांग की, तब पीड़िता को अपने साथ हुई साइबर ठगी का अहसास हुआ, जिस पर पुलिस ने साइबर थाना रेवाड़ी में ठगी का मामला दर्ज करके जांच शुरू की।
साइबर थाना पुलिस ने तकनीकी विश्लेषण और बैंक खातों की कड़ियों को जोड़ते इस मामले में शुक्रवार को कार्रवाई करते हुए आरोपी कर्ण राजपूत को अम्बाला कैंट से गिरफ्तार कर लिया है। जांच अधिकारी के अनुसार आरोपी कर्ण राजपूत के बैंक खाते में ठगी गई राशि में से 42 हजार रुपए ट्रांसफर हुए थे। आरोपी को माननीय अदालत में पेश कर दो दिन के पुलिस रिमांड पर लिया गया है। रिमांड के दौरान आरोपी से कड़ाई से पूछताछ की जाएगी ताकि इस गिरोह में शामिल अन्य आरोपियों और मुख्य सरगना का पता लगाया जा सके तथा शेष राशि व वारदात में इस्तेमाल गैजेट्स बरामद किए जा सकें।
रेवाड़ी पुलिस की आमजन से अपील :
रेवाड़ी पुलिस आम जनता से अपील करती है कि किसी भी अनजान व्हाट्सएप कॉल,
वीडियो कॉल या खुद को सीबीआई,
ईडी,
पुलिस या कस्टम अधिकारी बताने वाले व्यक्तियों के झांसे में न आएं। कानूनन कोई भी जांच एजेंसी इस तरह फोन पर '
डिजिटल अरेस्ट'
नहीं करती और न ही पैसे मांगती है। यदि आपके पास ऐसा कोई संदिग्ध फोन आता है,
तो घबराएं नहीं,
तुरंत फोन काटें और अपने परिजनों या नजदीकी पुलिस स्टेशन को सूचित करें। किसी भी प्रकार की साइबर ठगी होने पर तुरंत साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें या www.cybercrime.gov.in पर अपनी शिकायत दर्ज कराएं।