पंजाब की ओर चले शाह, विधानसभा चुनाव 2027 साधने की तैयारी।

ड्रग के खिलाफ अभियान से पंजाब फतह का सपना।

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देश में 5 राज्यों में चुनाव अब समाप्त हो चुके हैं। पश्चिम बंगाल, असम, केरल, पुडुचेरी और तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के फाइनल नतीजे 4 मई को आएंगे।  लेकिन बीजेपी का अगला पड़ाव अब पंजाब की धरती पर होगा। इसी को देखते हुए मई की शुरुआत से अमित शाह मिशन पंजाब साधने में जुट गए हैं।  

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पांचों राज्यों में चुनाव के बाद अब बीजेपी का अगला टारगेट पंजाब पर अपनी पकड़ मजबूत करने का है। सूत्रों के अनुसार गृहमंत्री अमित शाह अब हर महीने पंजाब का दौरा  करेंगे और पूरे राज्य में ड्रग्स के खिलाफ एक बड़े जनजागरूकता अभियान चलाएंगे। हालाँकि बीजेपी इस मुद्दे के जरिए राज्य की आम आदमी पार्टी सरकार को घेरने की तैयारी में है। 

विधानसभा चुनाव में अभी एक साल बाकि है लेकिन बीजेपी ने अभी से तैयारी शुरू कर दी है। इसे काम साम दंड भेद हर तरीके से अपने पीला में लाने की तैयारी है। आपको बता दें कि बीजेपी पहले ही साफ़ कर चुकी है कि वो सभी 117 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ेगी। इसी को लेकर आरएसएस तो पहले यहाँ अपने काम में जुट गई थी। आरएसएस ने फरवरी में यहाँ रणनीति बनानी शुरू कर दी थी। मोहन भगवत ने हर कार्यकर्ता या स्वमसेवकों को हर दलित के घर पहुँचने को कहा। क्योंकि पंजाब में कुल 117 विधान सभा सीटें है और जिसमें 38 फीसदी आबादी दलितों की है यानि हर तीसरा व्यक्ति दलित है। 

Fighting alone in Punjab, what's the BJP pinning its hopes on ...

राजनितिक विश्लेषकों का कहना है कि जैसे दक्षिण के राज्यों में बीजेपी अपनी पकड़ नहीं बना पा रही है। बंगाल उसके लिए टेढ़ी खीर है वही पंजाब भी बीजेपी के लिए सपने जैसा है। अकाली दल के साथ बीजेपी का गठजोड़ जब तक था तब तक कृषि करने वाले और सिख समाज के लोग उससे जुड़ जाते थे और शहरी वर्ग भारतीय जनता पार्टी के साथ जुड़ जाता था। जो बीजेपी की जीत को सुनिश्चित करता था। अकाली दल जबसे कमजोर हुआ तबसे ग्रामीण और दलित वर्ग को साधना बीजेपी के लिए दूर की कौड़ी बन गया। अब भारतीय जनता पार्टी को सही नेता भी वहां नहीं मिल पा रहे हैं। हाल ही में आप पार्टी छोड़ बीजेपी में शामिल हुए राघव चड्ढा उनकी ढाल बन पाएंगे या नहीं ये आने वाला वक्त बतायेगा। इसलिए अपनी पकड मजबूत बनाने के लिए अमित शाह अब पंजाब का रुख करने जा रहे हैं। 

Amit Shah's Anti-Conversion Promise Opens a New Faultline in ...

बताया जा रहा है कि गृहमंत्री अमित शाह अब हर महीने पंजाब का दौरा  करेंगे और पूरे राज्य में ड्रग्स के खिलाफ एक बड़े जनजागरूकता अभियान की शुरुआत करेंगे। बीजेपी इसके जरिए राज्य की आम आदमी पार्टी सरकार को घेरने की तैयारी में है। पंजाब के साथ-साथ अगले साल फरवरी में चार और राज्यों- उत्तर प्रदेश, गोवा, उत्तराखंड और मणिपुर में विधानसभा चुनाव होने हैं। इन राज्यों पर बीजेपी की ही सरकारें हैं, लेकिन पंजाब में बीजेपी अपनी जमीन मजबूत करना चाहती है। 

अमित शाह का ये मिशन मई के आरम्भ से शुरू हो जायेगा। इस दौरान वो पूरे पंजाब में ड्रग्स के खिलाफ एक अभियान चलाएंगे इसके लिए यात्राओं की शुरुआत भी की जाएगी। इन यात्राओं में बीजेपी के छोटे बड़े सभी नेता भी समय समय पर जुड़ेंगे। जो जनता को ये भी बताएंगे कि पंजाब बॉर्डर राज्य है, जिस वजह से यहाँ ड्रग की सप्लाई आसानी से हो जाती है लेकिन जब यहाँ बीजेपी की सरकार बनाएगी तब डबल इंजन सरकार के प्रयासों से सीमा से ड्रग्स की तस्करी पर भी नकेल  लगाई लगाएगी। मतलब बीजेपी चुनावों से पहले ड्रग्स को एक बड़ा मुद्दा बनाना चाहती है। बीजेपी नेताओं का कहना है कि अमित शाह ने पूरे देश में ड्रग्स के खिलाफ लड़ाई छेड़ी हुई है और अब पंजाब को भी इस लत से मुक्त कराया जाएगा। 

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इस अभियान के जरिए उन परिवारों का समर्थन जुटाने की कोशिश की जाएगी जो इस समस्या से सीधे प्रभावित हैं। साथ ही पंजाब की आप सरकार की ड्रग्स पर नकेल कसने को लेकर नाकामी को भी जनता के सामने लाया जाएगा। बीजेपी का मनना है कि साल 2022 में आम आदमी पार्टी ने भी  ड्रग्स को विधानसभा चुनाव में एक बड़ा मुद्दा बनाया था और शायद आप की जीत का एक बड़ा कारण भी यही था। अब बीजेपी भी  यही करने जा रही है। अब पंजाब का भविष्य क्या होगा ये तो आने वाला वक्त ही बताएगा क्यों बीजेपी की कमजोर पकड़, आम आदमी पार्टी सरकार अपने वादे पूरे नहीं कर पाई तो वहीँ कांग्रेस अंदरूनी गुटबाजी से जुझ रही है। जबकि अकाली दल भी सरदार प्रकाश सिंह बादल के निधन के बाद आंतरिक मतभेदों में उलझी है। इन सबके लिहाज बीजेपी को इस बार पंजाब में अपनी पकड़ बना शायद आसान लग रहा है।

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