गुरुग्राम से निकला नीट - यूजी पेपर लीक का सीधा कनेक्शन

राजस्थान के स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप ने गुरुग्राम के फर्रूखनगर इलाके से एक बीएएमएस स्टूडेंट को किया गिरफ्तार

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देश की सबसे बड़ी चिकित्सा प्रवेश परीक्षा नीट -यूजी 2026 के पेपर लीक मामले का सीधा कनेक्शन गुरुग्राम से जुड़ गया है। इस स्कैंडल का "मिडिल मैन" गुरुग्राम के फर्रूखनगर के गांव खुरमपुर का है।

गुरुग्राम। देश की सबसे बड़ी चिकित्सा प्रवेश परीक्षा नीट -यूजी 2026 के पेपर लीक मामले का सीधा कनेक्शन गुरुग्राम से जुड़ गया है। इस स्कैंडल का "मिडिल मैन" गुरुग्राम के फर्रूखनगर के गांव खुरमपुर का है। राजस्थान की स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप ने तकनीकी इनपुट के आधार पर एक बीएएमएस छात्र को गिरफ्तार किया है, जिससे इस बड़े रैकेट की कड़ियों को जोड़ने में मदद मिल रही है।IMG_20260514_232230
 
ऐसे हुआ पेपर लीक का पर्दाफाश
जांचकर्ताओं के अनुसार, पेपर लीक का असली खुलासा राजस्थान में एक व्हाट्सएप मैसेज के नीचे लिखे ऑटोमैटिक नोट ‘ फॉरवर्ड्स मैनी टाइम्स’ से शुरू हुआ। एक संदिग्ध ‘गेस पेपर’ की जांच के दौरान पुलिस को यह मैसेज मिला, जिससे साफ हो गया कि मामला किसी छोटे स्तर का नहीं, बल्कि एक सुनियोजित नेटवर्क का है।
सीकर के एक शिक्षक ने इस मामले में सबसे पहले हिम्मत दिखाई। उन्हें उनके मकान मालिक ने एक हाथ से लिखा हुआ ‘गेस पेपर’ दिखाया था, जो उनके बेटे ने केरल से भेजा था। जब शिक्षक ने इसकी जांच की, तो पाया कि इसमें दिए गए सवाल हूबहू असली परीक्षा जैसे थे। उन्होंने तुरंत पुलिस और बाद में नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) को 60 पन्नों की एक विस्तृत पीडीएफ फाइल के साथ शिकायत भेजी, जिसमें केमिस्ट्री और बायोलॉजी के असली सवाल मौजूद थे।
 
असली कड़ी है खुरमपुर का यश 
गुरुग्राम के खुरमपुर गांव का रहने वाला यश, जो उत्तराखंड के एक मेडिकल कॉलेज में प्रथम वर्ष का छात्र है, इस पूरे सिंडिकेट की एक महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है। यश सीकर में रहकर कोचिंग लेता था, जहां वह इस गिरोह के संपर्क में आया। पुलिस को शक है कि यश के पास परीक्षा से पहले ही पेपर पहुंच चुका था। वह मुख्य गिरोह और परीक्षार्थियों के बीच ‘मिडिल मैन’ के रूप में काम कर रहा था और उसने यह पेपर अन्य लोगों तक पहुंचाया। 
 
 ‘गेस पेपर’ की आड़ में 15 लाख में हुई डील 
एसओजी के सूत्रों के मुताबिक, इस पेपर को सिंडिकेट ने बड़े पैमाने पर भुनाने की योजना बनाई थी। एक-एक पेपर की कॉपी 10 से 15 लाख रुपए में बेची गई।
 माफिया ने पेपर लीक का स्मार्ट तरीका अपनाया। असली पेपर को सीधे नहीं बेचा, बल्कि इसे ‘गेस पेपर’ का नाम दिया। इस कथित गेस पेपर में 400 से अधिक सवाल थे, लेकिन उनके बीच बायोलॉजी के सभी 90 और केमिस्ट्री के 45 असली सवाल छिपे हुए थे।
 
अब सीबीआई कर रही है जांच 
इस मामले की गंभीरता और लाखों छात्रों के भविष्य को देखते हुए, एनटीए ने 12 मई को परीक्षा रद्द करने का फैसला लिया था। अब पूरे मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी गई है। एसओजी ने पैसों के लेन-देन के डिजिटल सबूत भी सीबीआई के साथ साझा किए हैं ताकि इस रैकेट में शामिल डॉक्टरों, कोचिंग सेंटर मालिकों और अन्य बड़े नामों को बेनकाब किया जा सके।
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