Palwal News : जल संरक्षण एवं फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने के लिए गांव कोट में हुआ किसान मेले का आयोजन
हरियाणा सरकार की जल संरक्षण एवं फसल विविधीकरण नीति को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से कृषि एवं किसान कल्याण विभाग द्वारा जिला पलवल के खंड हथीन के गांव कोट में किसान मेले का आयोजन किया गया।
पलवल। हरियाणा सरकार की जल संरक्षण एवं फसल विविधीकरण नीति को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से कृषि एवं किसान कल्याण विभाग द्वारा जिला पलवल के खंड हथीन के गांव कोट में किसान मेले का आयोजन किया गया। मेले में क्षेत्र के सैकड़ों किसानों ने भाग लेकर कपास उत्पादन, आधुनिक कृषि तकनीकों, फसल संरक्षण तथा विभिन्न कृषि कल्याणकारी योजनाओं की विस्तृत जानकारी प्राप्त की। 
उप-मंडल कृषि अधिकारी सुनील दत्त ने किसानों का स्वागत करते हुए कहा कि प्रदेश सरकार कम पानी में अधिक उत्पादन देने वाली फसलों को लगातार प्रोत्साहित कर रही है। उन्होंने किसानों से आह्वान किया कि वे धान के साथ-साथ कपास जैसी कम पानी की आवश्यकता वाली फसलों को अपनाकर जल संरक्षण में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएं। उन्होंने कहा कि फसल विविधीकरण से प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण होने के साथ-साथ किसानों की आय में भी वृद्धि संभव है। कार्यक्रम में कृषि विभाग की ओर से खंड कृषि अधिकारी प्रदीप मलिक, कृषि विकास अधिकारी रूबी, खंड तकनीकी प्रबंधक मुकेश कुमार सहित सभी कृषि पर्यवेक्षक उपस्थित रहे। उप-मंडल कृषि अधिकारी सुनील दत्त ने किसानों से 'मेरी फसल मेरा ब्यौरा', 'मेरा पानी मेरी विरासत', प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना तथा प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना सहित कृषि विभाग की विभिन्न योजनाओं का लाभ उठाने के लिए समय पर ऑनलाइन पंजीकरण कराने की अपील की। उन्होंने कहा कि विभाग की अधिकांश योजनाओं का लाभ कृषि विभाग के पोर्टल पर पंजीकरण के आधार पर ही प्रदान किया जाता है।
खंड कृषि अधिकारी प्रदीप मलिक ने किसानों को कपास की फसल में लगने वाले प्रमुख कीट एवं रोगों की पहचान, रोकथाम तथा वैज्ञानिक उपचार की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि भविष्य में जल संसाधनों की उपलब्धता को देखते हुए किसानों को ऐसी फसलों की ओर बढ़ना होगा जिनमें सिंचाई की कम आवश्यकता होती है। कपास की खेती धान की अपेक्षा कम पानी एवं कम लागत में बेहतर उत्पादन और लाभ देने वाली फसल है। उन्होंने किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन (पराली प्रबंधन) के महत्व की जानकारी देते हुए बताया कि सरकार कृषि यंत्रों पर अनुदान उपलब्ध करा रही है। साथ ही इन-सीटू एवं एक्स-सीटू पराली प्रबंधन अपनाने वाले किसानों को 1200 रुपये प्रति एकड़ की प्रोत्साहन राशि भी प्रदान की जा रही है।
कृषि विज्ञान केंद्र, मंडकोला के जिला समन्वयक डा. अशोक देशवाल, मत्स्य पालन विभाग के अजय तथा पशुपालन विभाग के अधिकारियों ने भी किसानों को अपने-अपने विभागों की योजनाओं एवं आधुनिक तकनीकों की जानकारी दी। कार्यक्रम में गांव कोट, बुराका, हथीन, आलीमेव, नांगल जाट, बहीन तथा उटावड़ सहित आसपास के गांवों के सैकड़ों किसानों ने भाग लिया। किसानों ने विभाग द्वारा आयोजित किसान मेले की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम आधुनिक खेती, नई कृषि तकनीकों तथा सरकारी योजनाओं की जानकारी किसानों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने का सशक्त माध्यम हैं।

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