Palwal News : यूजीसी के नए नियमों के विरोध में पलवल बंद, मीनार गेट पर स्वर्ण समाज का धरना-प्रदर्शन
वक्ताओं ने नियमों को बताया काला कानून, मांगें नहीं मानी तो आंदोलन तेज करने की चेतावनी
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नए नियमों के विरोध में सोमवार को पलवल में स्वर्ण समाज की ओर से मीनार गेट पर धरना-प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शन के समर्थन में शहर के बाजार पूरी तरह से बंद रहे। धरने को देखते हुए जिला प्रशासन की ओर से सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे।
पलवल। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नए नियमों के विरोध में सोमवार को पलवल में स्वर्ण समाज की ओर से मीनार गेट पर धरना-प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शन के समर्थन में शहर के बाजार पूरी तरह से बंद रहे। धरने को देखते हुए जिला प्रशासन की ओर से सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। 

प्रदर्शनकारियों ने यूजीसी के नए नियमों को काला कानून बताते हुए इन्हें वापस लेने की मांग की। इस दौरान पृथला के पूर्व विधायक नैनपाल रावत जुलूस की शक्ल में हजारों समर्थकों के साथ पहुंचे और धरने को समर्थन दिया। धरने की अध्यक्षता पलवल ब्राह्मण सभा के अध्यक्ष अमन भारद्वाज ने की, जबकि संचालन सुशील शर्मा काले ने किया। पूर्व विधायक नयनपाल रावत ने कहा कि यूजीसी के नियमों को लेकर देशभर में विरोध हो रहा है। युवाओं को नौकरी और अन्य अवसर आर्थिक आधार पर मिलने चाहिए। उन्होंने एससी-एसटी एक्ट में सुधार की आवश्यकता बताते हुए सरकार से नए कानून में संशोधन करने की मांग की। करणी सेवा के राष्ट्रीय अध्यक्ष सूरजपाल अम्मू नेकहा कि यूजीसी की यह नियमावली समानता के नाम पर समाज को बांटने का काम कर रही है। संगठनों ने सरकार से नियमों पर पुनर्विचार कर आवश्यक संशोधन करने की मांग की। साथ ही चेतावनी दी कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर जल्द संज्ञान नहीं लिया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। हरियाणा प्रदेश व्यापार मंडल के प्रदेश संगठन मंत्री प्रवीण गर्ग ने कहा कि यूजीसी के विरोध में देशभर का सवर्ण समाज सड़कों पर है। उन्होंने सरकार से सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर कर यूजीसी के प्रावधानों को समाप्त करने की मांग की। उन्होंने कहा कि सरकार को इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।
पलवल ब्राह्मण सभा के अध्यक्ष अमन भारद्वाज ने कहा कि यदि सरकार ने नए नियमों को वापस नहीं लिया तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि मांगें नहीं मानी गईं तो भाजपा सरकार के खिलाफ भी आंदोलन किया जाएगा और उसे सत्ता से बाहर करने के लिए अभियान चलाया जाएगा।
व्यापारी राजेश्वर गर्ग ने कहा कि यूजीसी की यह व्यवस्था किसी भी समुदाय की मांग पर नहीं लाई गई है, बल्कि इसे केंद्र सरकार द्वारा सवर्ण समाज पर थोपा गया है। उन्होंने कहा कि इसका लगातार विरोध किया जा रहा है। यदि सरकार ने यूजीसी के नए नियम वापस नहीं लिए तो आंदोलन आगे भी जारी रहेगा। प्रदर्शन के दौरान संगठनों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अपनी मांगों को प्रमुखता से उठाया। धरने को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि बिना प्रमाण की शिकायतों के आधार पर सामान्य वर्ग के छात्रों को अपराधी की तरह देखना सरासर अन्याय है। उन्होंने आरोप लगाया कि नए नियम संविधान में प्रदत्त समानता के अधिकार की भावना के विपरीत हैं और इससे शिक्षा व्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। वक्ताओं ने कहा कि नए नियमों के तहत अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं अन्य पिछड़ा वर्ग के विद्यार्थियों को जाति आधारित भेदभाव की शिकायत पर विशेष संरक्षण दिया गया है, जबकि सामान्य वर्ग के छात्रों को बिना प्रमाण की शिकायतों के आधार पर भी कार्रवाई के खतरे में डाल दिया गया है।




