Gurugram News: 24 करोड़ के "जुगाड़" से होगी शहर की सफाई!

-- डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन के लिए छह महीने के अस्थाई टेंडर का लिया सहारा -- टेंडर की शर्तों के मुताबिक कूड़ा कलेक्शन में लगेंगी 600 गाड़ियां

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शहर की सफाई अब 24 करोड़ के "जुगाड़" से होगी। खबर हास्यास्पद है लेकिन नगर निगम ने शहर के घरों से कूड़ा उठाने के लिए अस्थाई टेंडर का जुगाड़ किया है। शहर में कचरा प्रबंधन का 5 साल का बड़ा टेंडर रद्द होने के बाद से ही सफाई व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है, जिसके चलते निगम को इस छह महीने के ‘अस्थाई जुगाड़’ का सहारा लेना पड़ा।

गुरुग्राम: शहर की सफाई अब 24 करोड़ के "जुगाड़" से होगी। खबर हास्यास्पद है लेकिन नगर निगम ने शहर के घरों से कूड़ा उठाने के लिए अस्थाई टेंडर का जुगाड़ किया है। शहर में कचरा प्रबंधन का 5 साल का बड़ा टेंडर रद्द होने के बाद से ही सफाई व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है, जिसके चलते निगम को इस छह महीने के ‘अस्थाई जुगाड़’ का सहारा लेना पड़ा।
इसके तहत नगर निगम ने शहर के सभी आठ जोन में घरों से डोर-टू-डोर कूड़ा उठाने के लिए एक नई टेंडर प्रक्रिया शुरू की है। इस नई योजना के तहत शहर की गलियों और मुख्य मार्गों से कचरा उठाने के लिए कुल 600 नए  वाहनों को काम पर लगाया जाएगा। यह नया टेंडर आगामी छह महीनों (जुलाई से दिसंबर 2026 तक) के लिए वैध रहेगा, जिस पर निगम लगभग 24 करोड़ रुपये का भारी-भरकम बजट खर्च करने जा रहा है। WhatsApp Image 2026-06-16 at 12.43.33 AM
 
सभी जोन के लिए अलग अलग बजट 
नगर निगम ने सभी आठ जोन के लिए अलग-अलग बजट आवंटित किया है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, सबसे बड़ी राशि जोन-2 को आवंटित की गई है, जबकि सबसे कम बजट जोन-8 के खाते में आया है।
 
कहां कितनी राशि होगी खर्च 
 
जोन-1: ₹1 करोड़ 78 लाख
 
जोन-2: ₹4 करोड़ 76 लाख (सबसे अधिक)
 
जोन-3: ₹4 करोड़ 15 लाख
 
जोन-4: ₹1 करोड़ 58 लाख
 
जोन-5: ₹2 करोड़ 90 लाख
 
जोन-6: ₹2 करोड़ 02 लाख
 
जोन-7: ₹4 करोड़ 81 लाख
 
जोन-8: ₹1 करोड़ 53 लाख (सबसे कम)
 
बांधवाड़ी तक कूड़ा पहुंचाने के लिए अलग टेंडर 
घरों से कूड़ा उठाने के लिए खर्च होने वाले 24 करोड़ रुपये के अलावा, नगर निगम सेकेंडरी डंपिंग पॉइंटों की सफाई पर भी करोड़ों रुपये अलग से फूंक रहा है। शहर के अलग-अलग इलाकों में बने बड़े डंपिंग स्टेशनों से कचरा समेटकर मुख्य बंधवाड़ी वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट तक पहुंचाने के लिए एक अलग टेंडर जारी किया गया है। निजी एजेंसियों को सौंपे गए इस कार्य के लिए निगम की ओर से 10 करोड़ रुपये से अधिक की राशि अलग से खर्च की जाएगी।
नगर निगम की इस अस्थाई कार्यप्रणाली और बार-बार टेंडर बदलने की नीति से गुरुग्राम के स्थानीय निवासी और आरडब्ल्यूए बेहद नाराज हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि बड़ी कंपनियों के टेंडर रद्द होने के बाद छोटे-छोटे ठेकेदारों को काम दिया जा रहा है।
इन ठेकेदारों के पास न तो पर्याप्त संसाधन होते हैं और न ही आधुनिक गाड़ियां, जिसके कारण गलियों में नियमित रूप से कूड़े की गाड़ियां नहीं पहुंच पातीं। लोगों का कहना है कि जब तक नगर निगम 5 से 10 साल का कोई ठोस और परमानेंट एग्रीमेंट नहीं करता, तब तक शहर को खुले में पड़े कचरे और गंदगी के ढेरों से पूरी तरह मुक्ति मिलना नामुमकिन है। नगर निगम के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि छह महीने की अवधि के लिए आठों जोन में घरों से कूड़ा उठाने के टेंडर लगा दिए हैं। पहले जहां शहर में केवल 400 वाहनों की मदद से कूड़ा उठाया जा रहा था, वहीं अब इस बेड़े को बढ़ाकर 600  वाहन करने की योजना बनाई गई है। हमारा प्रयास है कि शहर की कचरा प्रबंधन व्यवस्था में जल्द से जल्द सुधार आएगा।
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नीलोफर हाशमी, देश रोजाना ऑनलाइन में सीनियर पत्रकार हैं। वे करंट अफेयर्स, ह्यूमन नेचर, सोशल और पॉलिटिक्‍स से जुड़ी खबरें बनाती हैं। मीडिया में नीलोफर को सालों का अनुभव है।

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