Gurugram News: पोस्टर विवाद ने खोली कांग्रेस की ‘लोकतांत्रिक सोच’ की पोल? जरावता ने साधा निशाना
दलित-सिख विधायक की आवाज दबाने पर राहुल गांधी से मांगा जवाब, बोले- सामाजिक न्याय भाषणों से नहीं, व्यवहार से साबित होता है
हरियाणा विधानसभा में कांग्रेस विधायक इंदुराज नरवाल द्वारा अपनी ही पार्टी के विधायक सरदार जरनैल सिंह के हाथ से पोस्टर छीने जाने की घटना को लेकर भाजपा प्रदेश महामंत्री एवं पटौदी के पूर्व विधायक सत्य प्रकाश जरावता ने कांग्रेस नेतृत्व पर तीखा हमला बोला है।
गुरुग्राम: हरियाणा विधानसभा में कांग्रेस विधायक इंदुराज नरवाल द्वारा अपनी ही पार्टी के विधायक सरदार जरनैल सिंह के हाथ से पोस्टर छीने जाने की घटना को लेकर भाजपा प्रदेश महामंत्री एवं पटौदी के पूर्व विधायक सत्य प्रकाश जरावता ने कांग्रेस नेतृत्व पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने इस घटना को लेकर कांग्रेस की लोकतांत्रिक सोच और सामाजिक न्याय के दावों पर सवाल खड़े किए हैं।

जरावता ने कहा कि विधानसभा लोकतंत्र का महत्वपूर्ण मंच है, जहां प्रत्येक निर्वाचित जनप्रतिनिधि को अपनी बात रखने का अधिकार है। यदि किसी सदस्य की गतिविधि सदन के नियमों के विपरीत हो तो उस पर कार्रवाई का अधिकार पीठासीन अधिकारी के पास है। ऐसे में किसी दूसरे विधायक द्वारा उसके हाथ से पोस्टर छीनना लोकतांत्रिक मर्यादाओं के अनुरूप नहीं माना जा सकता।
भाजपा नेता ने कहा कि सरदार जरनैल सिंह 1984 के सिख-विरोधी दंगों से जुड़े मुद्दे पर अपनी बात रखना चाहते थे। ऐसे संवेदनशील विषयों पर लोकतांत्रिक व्यवस्था में बहस और असहमति के लिए पर्याप्त स्थान होना चाहिए। उन्होंने कहा कि मामला केवल एक पोस्टर का नहीं, बल्कि एक निर्वाचित विधायक के सम्मान और अभिव्यक्ति के अधिकार से जुड़ा है।
जरावता ने कांग्रेस नेतृत्व और राहुल गांधी से सवाल किया कि कांग्रेस लगातार संविधान, लोकतंत्र और सामाजिक न्याय की बात करती है, तो उसकी अपनी पार्टी के भीतर एक दलित-सिख विधायक के साथ सदन में ऐसा व्यवहार क्यों हुआ। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को स्पष्ट करना चाहिए कि सामाजिक न्याय का उसका दावा केवल राजनीतिक भाषणों तक सीमित है या पार्टी अपने जनप्रतिनिधियों को भी सम्मानपूर्वक अपनी बात रखने का अवसर देती है।
उन्होंने कहा कि दलित और सिख समाज के सम्मान की बात केवल मंचों से करने के बजाय राजनीतिक दलों के व्यवहार में भी दिखाई देनी चाहिए। कांग्रेस नेतृत्व को इस पूरे प्रकरण को राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बजाय गंभीरता और संवेदनशीलता से देखना चाहिए।
जरावता ने कहा कि सिख समाज की ऐतिहासिक पीड़ा से जुड़े विषय अत्यंत संवेदनशील हैं और सभी राजनीतिक दलों को ऐसे मामलों में जिम्मेदारी के साथ अपनी बात रखनी चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी भी समुदाय की भावनाओं और निर्वाचित जनप्रतिनिधि के सम्मान को ठेस पहुंचाना लोकतांत्रिक व्यवस्था के हित में नहीं है।
उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि विधानसभा की गरिमा, जनप्रतिनिधियों के अधिकार और लोकतांत्रिक संवाद को राजनीतिक मतभेदों से ऊपर रखा जाना चाहिए। भाजपा का स्पष्ट मत है कि समाज के प्रत्येक वर्ग को सम्मान, सुरक्षा और न्याय मिलना चाहिए।
जरावता ने कांग्रेस नेतृत्व से पूरे मामले पर अपना पक्ष स्पष्ट करने की मांग करते हुए कहा कि संविधान और सामाजिक न्याय के प्रति प्रतिबद्धता का वास्तविक मूल्यांकन राजनीतिक बयानों से नहीं, बल्कि नेताओं के आचरण से होता है।

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