Kurukshetra News: पुलिस कार्यालय में हुआ अनुसंधानकर्ताओं का एक दिवसीय सेमिनार का आयोजन।

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जिला पुलिस द्वारा शुक्रवार को पुलिस अधीक्षक कार्यालय के सभागार में एक दिवसीय सेमिनार का आयोजन किया गया। सेमिनार में जिला पुलिस के विभिन्न थानों/चौंकियों से अनुसंधानकर्ता हाजिर रहे। अनुसंधानकर्ताओं को जिला उप न्यायवादी डॉ.चन्द्र मोहन ने भारत के माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा किशन भाई बरखिलाफ गुजरात व भारतीय साक्ष्य अधिनियम के बारे में के बारे में जारी दिशा निर्देशानुसार कारवाई करने के सम्बन्ध में जानकारी दी।

कुरुक्षेत्र: जिला पुलिस द्वारा शुक्रवार को पुलिस अधीक्षक कार्यालय के सभागार में एक दिवसीय सेमिनार का आयोजन किया गया।  सेमिनार में जिला पुलिस के विभिन्न थानों/चौंकियों से अनुसंधानकर्ता हाजिर रहे। अनुसंधानकर्ताओं को जिला उप न्यायवादी डॉ.चन्द्र मोहन ने भारत के माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा किशन भाई बरखिलाफ गुजरात व भारतीय साक्ष्य अधिनियम के बारे में के बारे में जारी दिशा निर्देशानुसार कारवाई करने के सम्बन्ध में जानकारी दी। 

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पुलिस अधीक्षक चन्द्र मोहन के आदेशानुसार शुक्रवार को पुलिस अधीक्षक कार्यालय के सभागार में सेमिनार का आयोजन किया गया।  सेमिनार में जिला उप न्यायवादी डॉ. चन्द्र मोहन ने जिला के अनुसंधानकर्ताओं को माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों की पालना करने बारे विस्तार से समझाया। उन्होंने कहा कि माननीय सर्वोच्च अदालत द्वारा किशन भाई बरखिलाफ गुजरात मामले में दिए गये दिशा-निर्देशों की पालना करना अति आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि किसी भी केस का अनुसंधान करते समय पूरी सावधानी बरतनी चाहिए तथा केस डायरी को पूर्ण रूप से लिखना चाहिए। जिला उप न्यायवादी ने बताया कि माननीय सर्वोच्च अदालत द्वारा निर्देश दिए गए हैं कि इस सम्बन्ध में सभी अनुसंधान अधिकारियों को सजग बनाने की आवश्यकता है। किसी भी अनुसंधान अधिकारी द्वारा इस सम्बन्ध में गलती न की जाए। उन्होंने कहा कि अनुसंधान के समय हमे चैन ऑफ कस्टडी को ध्यान में रखना है तथा सभी साक्ष्य सही तरीके से जोड़कर केस फ़ाइल तैयार करनी है। इसके अतिरिक्त साइंटिफिक एविडेंस जैसे कि डीएनए प्रोफाईलिंग आदि के बिना किसी खामी या लापरवाही के केस फाइल में शामिल करने बारे चेताया गया।

सेमिनार में जिला उप न्यायवादी डॉ.चन्द्र मोहन ने भारतीय साक्ष्य अधिनियम के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने बताया कि जांच में ढिलाई केवल एक प्रशासनिक गलती नहीं है, बल्कि यह न्यायोचित भी नही है। इस मौका पर जिला के विभिन्न थाना/चौंकियों से आए काफी संख्या में अनुसंधानकर्ता मौजूद रहे।

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