महिला आरक्षण नहीं देश के संघीय ढांचे को बदलने का षड्यंत्र कर रही बीजेपी सरकार: आफ़ताब अहमद

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मेवात:लोकसभा में संविधान में संशोधन का बिल गिरने के बाद बीजेपी और कांग्रेस में अब आरोप प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। हरियाणा के नूंह से कांग्रेस विधायक चौधरी आफताब अहमद ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि बीजेपी की मोदी सरकार की 
 महिला विरोधी नीयत उजागर हो गई है। केंद्र सरकार ने देश की महिलाओं की आंखों में धूल झोंकने का काम किया है। उन्होंने कहा कि बीजेपी सरकार महिलाओं को आरक्षण देना ही नहीं चाहती बल्कि उनकी आड़ में राजनीतिक डीलिमिटेशन करना चाहती है ताकि अपने हिसाब से देश भर में परिसीमन कर सके।
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विधायक आफताब अहमद ने कहा कि महिला आरक्षण की आड़ में केंद्र सरकार का असली लक्ष्य सिर्फ राजनीतिक डीलिमिटेशन करना था। ये पूरी तरह से भाजपा का एक चुनावी प्रोपेगेंडा था, जो अब जनता को समझ आ गया है। आफ़ताब अहमद ने कहा कि कांग्रेस पार्टी सहित विपक्ष की माँग स्पष्ट है कि इसे तुरंत 543 सीटों में लागू किया जाए। कांग्रेस सरकार को तब तक चैन की नींद सोने नहीं देगी जब तक महिला आरक्षण देश में लागू नहीं हो जाता।
विधायक आफताब अहमद ने इसे केवल एक राजनीतिक ढोंग करार देते हुए आरोप लगाया कि सरकार की मंशा महिलाओं को वास्तव में आरक्षण देने की कभी थी ही नहीं।
 
विधायक आफताब अहमद ने कहा कि संविधान में संशोधन का बिल लोकसभा में पास नहीं हो पाया है। उन्होंने कहा कि सरकार वह बिल लेकर आए, जिसे 2023 में सभी दलों ने समर्थन दिया था कांग्रेस सहित सभी दल इसको समर्थन देंगे। आफ़ताब अहमद ने भाजपा व एनडीए पर आरोप लगाया कि वह पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु के वोटरों को गुमराह कर रही है। उन्होंने कहा कि विपक्ष पर आरोप लगाया जा रहा है कि वह महिला विरोधी हैं। जबकि यह बिल्कुल भी सही नहीं है। जिस पुराने बिल की बात आफताब अहमद कर रहे हैं, वह नारी शक्ति वंदन अधिनियम है, जो 2023 में पास हुआ था। इसमें महिलाओं के लिए संसद और राज्य विधानसभाओं में 33 फीसदी आरक्षण की बात कही गई है।
विधायक आफताब अहमद ने रविवार को कहा कि महिला आरक्षण से संबंधित संविधान संशोधन विधेयक देश के संघीय ढांचे को बदलने का षड्यंत्र था। लोकसभा में इसका गिरना लोकतंत्र, संविधान एवं विपक्षी एकजुटता की जीत है। उन्होंने पत्रकारों से कहा कि कल लोकतंत्र की बहुत बड़ी जीत हुई है। मोदी सरकार ने लोकतंत्र को कमजोर करने और संघीय ढांचे को बदलने की साजिश की थी, जिसे विपक्ष ने हरा दिया। ये संविधान की जीत है, देश की जीत है, विपक्षी एकता की जीत है। आफताब अहमद ने कहा कि यह विपक्षी एकजुटता के लिए निर्णायक क्षण है।
 
विधायक आफताब अहमद ने कहा कि सरकार द्वारा जो साजिश रची गई, उसका उद्देश्य सत्ता हासिल करना है। इसके लिए सरकार ने महिलाओं का इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा कि सरकार चाहती थी कि महिला आरक्षण के नाम पर विपक्ष यह विधेयक पारित करवा दे ताकि उन्हें मनमाने तरीके से परिसीमन की आजादी मिल जाए जिससे मोदी सरकार को जातिगत जनगणना का सहारा न लेना पड़े।
कांग्रेस विधायक आफताब अहमद ने दावा किया कि यह महिला आरक्षण विधेयक की बात नहीं थी। यह बात परिसीमन से जुड़ी हुई थी। मोदी सरकार को परिसीमन इस आधार पर करना था, जिसमें उसे जातिगत जनगणना के आंकड़ों को देखने की जरूरत नहीं होती और मनमानी करने की पूरी आजादी मिलती। ऐसे में मुमकिन ही नहीं था कि विपक्ष मोदी सरकार का साथ दे। कांग्रेस विधायक आफताब अहमद ने कहा कि पूरे देश ने देख लिया है कि जब विपक्ष एकजुट होता है तो कैसे मोदी सरकार को हराया जाता है। आफ़ताब अहमद ने कहा कि मोदी सरकार को पहली बार धक्का लगा है, इसलिए इसे ‘काला दिन’ कह रही है। ये धक्का लगना बहुत जरूरी था।
 
विधायक आफताब अहमद ने कहा कि केंद्र सरकार का मानना था कि अगर विधेयक पारित होगा तो उनकी जीत होगी और विधेयक पारित नहीं हुआ तो विपक्ष को महिला विरोधी बता देंगे। भाजपा ऐसा कर खुद को महिलाओं का मसीहा साबित करना चाहती थी। आफ़ताब अहमद ने हाथरस, उन्नाव और महिला पहलवानों के मामलों का हवाला देते हुए कहा कि भाजपा का एक इतिहास है और सदन में इसके विपरीत कुछ कहने से कोई फर्क नहीं पड़ेगा। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार महिलाओं का मसीहा बनना चाहती है।
विधायक आफ़ताब अहमद ने कहा कि जिस तरह से महिला आरक्षण में अनुसूचित जनजाति (एसटी) और अनुसूचित जाति (एससी) के लिए आरक्षण होगा, उसी तरह संख्या के अनुरूप ओबीसी आरक्षण भी होना चाहिए।
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