पृथ्वी दिवस पर जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन, महिलाओं को कानून व पर्यावरण संरक्षण के प्रति किया जागरूक
बाल विवाह निषेध, नशा मुक्ति और पर्यावरण संरक्षण पर दी गई महत्वपूर्ण जानकारी
जिला एवं सत्र न्यायाधीश एवं सदस्य सचिव, जगदीप सिंह व हरियाणा राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के आदेशानुसार तथा डॉ. सुशील कुमार गर्ग, जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह चेयरमैन, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, नूंह के निर्देशानुसार, नेहा गुप्ता, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट-सह-सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, नूंह की देखरेख में गांव खोड़ बसई में पृथ्वी दिवस के अवसर पर एक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
नूंह: जिला एवं सत्र न्यायाधीश एवं सदस्य सचिव, जगदीप सिंह व हरियाणा राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के आदेशानुसार तथा डॉ. सुशील कुमार गर्ग, जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह चेयरमैन, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, नूंह के निर्देशानुसार, नेहा गुप्ता, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट-सह-सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, नूंह की देखरेख में गांव खोड़ बसई में पृथ्वी दिवस के अवसर पर एक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

इस कार्यक्रम में मुख्य रूप से गांव की महिलाओं ने भाग लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य पृथ्वी दिवस के अवसर पर वैश्विक तापमान वृद्धि, पर्यावरण संरक्षण तथा प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों के प्रति जागरूकता फैलाना रहा।
कार्यक्रम में सीजेएम नेहा गुप्ता तथा प्रवीण कुमार, कॉर्डिनेटर, मंजरी फाउंडेशन ने मुख्य वक्ता के रूप में प्रतिभागियों को संबोधित किया। कार्यशाला का उद्देश्य जमीनी स्तर पर कार्यरत महिलाओं को कानूनों की सही जानकारी प्रदान कर समाज में जागरूकता बढ़ाना था, ताकि वे अपने-अपने क्षेत्र में प्रभावी भूमिका निभा सकें।
अपने संबोधन में सीजेएम नेहा गुप्ता ने बाल विवाह निषेध कानून एवं नशा मुक्ति जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने विश्व पृथ्वी दिवस के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पर्यावरण संरक्षण मानव अस्तित्व के लिए अत्यंत आवश्यक है और इसके लिए सभी को सामूहिक प्रयास करने होंगे।
कार्यक्रम में कुल 90 प्रतिभागियों ने भाग लिया। सत्र के दौरान बाल विवाह निषेध अधिनियम तथा नशा मुक्ति से जुड़े कानूनी प्रावधानों को सरल भाषा में समझाया गया और प्रतिभागियों की जिज्ञासाओं का समाधान भी किया गया।
कार्यक्रम के अंत में प्रतिभागियों ने इस प्रकार की जागरूकता कार्यशालाओं को समाज के लिए अत्यंत उपयोगी बताते हुए भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रमों के आयोजन की आवश्यकता पर बल दिया।

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