Nuh Mewat News: अलवी समाज का अगला एजेंडा तैयार, वक्फ बोर्ड से राजनीतिक हिस्सेदारी तक उठेगी आवाज
प्रतिनिधित्व से लेकर जमीन, शिक्षा और राजनीतिक हिस्सेदारी तक समाज के अधिकारों के लिए संघर्ष तेज करने की तैयारी
मेवात अलवी समाज के लिए अलवी भवन की मंजूरी को एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताते हुए समाज ने अब अपने विकास, अधिकारों और राजनीतिक हिस्सेदारी को लेकर अगले चरण की रणनीति तैयार कर ली है।
नूंह: मेवात अलवी समाज के लिए अलवी भवन की मंजूरी को एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताते हुए समाज ने अब अपने विकास, अधिकारों और राजनीतिक हिस्सेदारी को लेकर अगले चरण की रणनीति तैयार कर ली है। अलवी भवन की मंजूरी के बाद समाज ने पांच बड़े मिशनों को प्राथमिकता देते हुए इन्हें मजबूती से आगे बढ़ाने का संकल्प लिया है। वरिष्ठ पत्रकार एवं पूर्व जिला पार्षद यूनुस अलवी ने समाज की आगामी रूपरेखा साझा करते हुए कहा कि अब प्रयास केवल भवन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि शिक्षा, सामाजिक अधिकार, जमीन से जुड़े मामलों, संस्थागत प्रतिनिधित्व और राजनीतिक भागीदारी जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों को भी प्रमुखता से उठाया जाएगा।
यूनुस अलवी द्वारा जारी रूपरेखा के अनुसार, अलवी समाज आने वाले समय में पांच प्रमुख मुद्दों को लेकर व्यापक स्तर पर अभियान चलाने की तैयारी में है।

हरियाणा वक्फ बोर्ड में मिले उचित प्रतिनिधित्व:
समाज की मांग है कि हरियाणा वक्फ बोर्ड की कमेटी में अलवी समाज के कम से कम दो सदस्यों को प्रतिनिधित्व दिया जाए। समाज का मानना है कि संस्थागत स्तर पर उचित प्रतिनिधित्व मिलने से समुदाय से जुड़े वक्फ और सामाजिक मामलों को प्रभावी ढंग से उठाया जा सकेगा। क्योंकि प्रदेश में 99 फीसदी जो वक्फ बोर्ड की संपत्ति हे उसके 500 वर्षों से अल्वी समाज काश्तकार है।
दादा शाह चौखा की 3092 बीघा जमीन का मामला:
अलवी समाज के एजेंडे में दादा शाह चौखा की 3092 बीघा जमीन का मुद्दा भी प्रमुख है। समाज की मांग है कि जमीन की स्थिति की निष्पक्ष जांच कराकर जहां भी अवैध कब्जे हैं उन्हें कानून के अनुसार हटाया जाए और जमीन का उपयोग समाज एवं व्यापक जनहित में सुनिश्चित किया जाए। क्योंकि ये जमीन अकबर बादशाह ने अकबर अली उर्फ दादा शाह चोखा को दान की थी।
दादा शाह चौखा ट्रस्ट और उच्च स्तरीय कॉलेज की स्थापना:
समाज की तीसरी बड़ी मांग ‘दादा शाह चौखा ट्रस्ट’ के गठन की है। प्रस्ताव के अनुसार, शीतला माता मंदिर ट्रस्ट की तर्ज पर एक व्यवस्थित ट्रस्ट बनाया जाए तथा उपलब्ध भूमि के वैधानिक उपयोग की व्यवस्था करते हुए शाह चौखा गांव में उच्च स्तरीय कॉलेज की स्थापना की जाए। इससे मेवात क्षेत्र के विद्यार्थियों को अपने ही क्षेत्र में बेहतर उच्च शिक्षा के अवसर उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है।
भोंडेदारों को मिले वैध मालिकाना हक:
समाज लंबे समय से भोंडेदारों के जमीन संबंधी अधिकारों को लेकर भी आवाज उठाने की बात कर रहा है। मांग है कि पात्र भोंडेदारों को कानून एवं राजस्व रिकॉर्ड के आधार पर उनका वैध मालिकाना हक दिलाने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएं, ताकि वर्षों से चले आ रहे जमीन संबंधी विवादों का समाधान हो सके। कुछ गांवों के दबंग लोग गरीबों से जमीन छीनकर उनपर कब्जा कर रहे हैं।
आबादी और प्रभाव के अनुरूप राजनीतिक हिस्सेदारी:
पांचवें और सबसे महत्वपूर्ण मिशन के तौर पर मेवात और हरियाणा की राजनीति में अलवी समाज की उचित राजनीतिक हिस्सेदारी की मांग रखी गई है। समाज का कहना है कि आबादी, सामाजिक योगदान और राजनीतिक प्रभाव को देखते हुए उसे राजनीति में सम्मानजनक प्रतिनिधित्व और भागीदारी मिलनी चाहिए। उनका कहना है कि नूंह जिला में अलवी समाज की तकरीबन 15 फीसदी यानी 80 हजार के वोट है।
अलवी भवन शुरुआत है, मंजिल अभी बाकी:
यूनुस अलवी ने कहा कि अलवी भवन की मंजूरी समाज के लिए एक महत्वपूर्ण पड़ाव है, लेकिन इसे मंजिल नहीं बल्कि नई शुरुआत के रूप में देखा जाना चाहिए। आने वाले समय में समाज को शिक्षा, रोजगार, सामाजिक अधिकार, जमीन से जुड़े मामलों और राजनीतिक प्रतिनिधित्व जैसे मुद्दों पर संगठित होकर आगे बढ़ना होगा। उन्होंने कहा कि पांचों मिशनों को लेकर समाज के लोगों से संवाद किया जाएगा और जरूरत पड़ने पर लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक तरीके से संबंधित मंचों पर आवाज उठाई जाएगी।
अलवी समाज की इस नई रूपरेखा ने मेवात की सामाजिक और राजनीतिक चर्चाओं को भी एक नया मुद्दा दे दिया है। अब देखने वाली बात होगी कि इन पांच मिशनों को समाज किस प्रकार जमीनी स्तर पर आगे बढ़ाता है और संबंधित सरकारी एवं प्रशासनिक मंचों पर इन मांगों को किस तरह रखा जाता है।




