Mewat/Tawdu News: शुद्धिकरण की राजनीति के खिलाफ सामाजिक बराबरी की लड़ाई जारी रहेगी : शाहीन शम्स

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हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की रैली के बाद भाषण स्थल के कथित शुद्धिकरण का मामला केवल एक राजनीतिक विवाद नहीं है, बल्कि यह सामाजिक बराबरी, मानव सम्मान और संवैधानिक मूल्यों से जुड़ा गंभीर विषय है। 

तावडू: हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की रैली के बाद भाषण स्थल के कथित शुद्धिकरण का मामला केवल एक राजनीतिक विवाद नहीं है, बल्कि यह सामाजिक बराबरी, मानव सम्मान और संवैधानिक मूल्यों से जुड़ा गंभीर विषय है। यह बात कांग्रेसी नेता शाहीन शम्स ने कही है उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इस मामले का विरोध करते हुए दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की, लेकिन इसके बजाय उनके खिलाफ ही एफआईआर दर्ज कर दी गई। उन्होंने कहा कि सवाल उठाने वालों के खिलाफ कार्रवाई करना लोकतांत्रिक जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

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शाहीन शम्स ने कहा कि भारत में जातिगत भेदभाव और सामाजिक असमानता के खिलाफ संघर्ष सदियों पुराना है। कबीर, रविदास, तुकाराम और बसवन्ना जैसे संतों ने सामाजिक ऊंच-नीच और भेदभाव के खिलाफ आवाज उठाई। इसके बाद महात्मा ज्योतिराव फुले और सावित्रीबाई फुले ने शिक्षा को सामाजिक बदलाव और मुक्ति का माध्यम बनाया। दक्षिण भारत में पेरियार ने आत्मसम्मान आंदोलन के माध्यम से जातिगत वर्चस्व और सामाजिक असमानता के खिलाफ संघर्ष किया। वहीं बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर ने समानता और सामाजिक न्याय के संघर्ष को संवैधानिक अधिकारों की नई दिशा दी।

उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान ने सभी नागरिकों को समानता और सम्मान का अधिकार दिया है। संविधान का अनुच्छेद 14 कानून के समक्ष समानता, अनुच्छेद 15 भेदभाव पर रोक, अनुच्छेद 16 सार्वजनिक रोजगार में समान अवसर और अनुच्छेद 17 अस्पृश्यता को समाप्त करने की व्यवस्था करता है। उन्होंने कहा कि यह केवल संवैधानिक प्रावधान नहीं हैं, बल्कि सदियों से सामाजिक बराबरी के लिए किए गए संघर्षों का परिणाम हैं।

शाहीन शम्स ने कहा कि आज भी समाज में जाति और सामाजिक पहचान के आधार पर भेदभाव की घटनाएं सामने आती रहती हैं। ऐसे में यदि किसी व्यक्ति या समूह की सामाजिक पहचान के आधार पर किसी सार्वजनिक स्थल के कथित शुद्धिकरण की बात सामने आती है तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में सवाल उठाने वालों पर कार्रवाई करने के बजाय प्रशासन को आरोपों की गंभीरता से जांच करनी चाहिए और दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई करनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस कार्यकर्ता राहुल गांधी के खिलाफ दर्ज एफआईआर और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के भाषण स्थल के कथित शुद्धिकरण के विरोध में आवाज उठा रहे हैं। हमारी लड़ाई केवल एक एफआईआर या एक घटना तक सीमित नहीं है, बल्कि उस सोच और मानसिकता के खिलाफ है जो इंसान को उसके जन्म और जाति के आधार पर छोटा-बड़ा मानती है।

शाहीन शम्स ने कहा कि कांग्रेस सामाजिक न्याय, समानता और संविधान की रक्षा के लिए लगातार संघर्ष करती रहेगी। उन्होंने कहा कि सामाजिक बराबरी केवल चुनावी मुद्दा नहीं है, बल्कि लोकतंत्र की बुनियाद है। जब तक देश में हर नागरिक को उसकी जाति, धर्म और सामाजिक पृष्ठभूमि से ऊपर उठकर समान सम्मान और अधिकार नहीं मिलते, तब तक सामाजिक न्याय की लड़ाई अधूरी रहेगी।

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