फसल अवशेष (पराली) जलाने पर होगी सख्त कानूनी कार्रवाई : उपायुक्त डा. हरीश कुमार वशिष्ठ
किसानों से फसल अवशेष न जलाने और वैज्ञानिक प्रबंधन अपनाने की अपील की
उपायुक्त डा. हरीश कुमार वशिष्ठ ने रबी फसल वर्ष 2025-26 के दौरान फसल अवशेष (पराली) के उचित प्रबंधन को लेकर किसानों से अपील करते हुए
पलवल: उपायुक्त डा. हरीश कुमार वशिष्ठ ने रबी फसल वर्ष 2025-26 के दौरान फसल अवशेष (पराली) के उचित प्रबंधन को लेकर किसानों से अपील करते हुए कहा कि वे फसल अवशेषों को जलाने की बजाय वैज्ञानिक तरीकों को अपनाएं, ताकि पर्यावरण संरक्षण एवं भूमि की उर्वरता को बनाए रखा जा सके।
उपायुक्त ने बताया कि पराली जलाने से न केवल वायु प्रदूषण बढ़ता है, बल्कि मानव स्वास्थ्य और मिट्टी की गुणवत्ता पर भी इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इसलिए किसान पराली को जलाने के स्थान पर हैप्पी सीडर, सुपर एसएमएस, मल्चर, रोटावेटर जैसी आधुनिक मशीनों का उपयोग कर उसे मिट्टी में मिलाएं या अन्य उपयोग जैसे चारे एवं जैव ईंधन के रूप में प्रयोग करें।

नियमों का उल्लंघन करने पर सख्त कार्रवाई
उपायुक्त ने स्पष्ट किया कि जो किसान फसल अवशेष जलाते हुए पाए जाएंगे, उनके विरुद्ध 5000 से 30,000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जाएगा तथा एफआईआर दर्ज की जाएगी। इसके साथ ही ‘मेरी फसल मेरा ब्यौरा’ पोर्टल पर रेड एंट्री भी दर्ज की जाएगी, जिससे संबंधित किसान दो सीजन तक अपनी फसल एमएसपी पर नहीं बेच पाएंगे।
कृषि उपनिदेशक डॉ. बाबू लाल ने जानकारी देते हुए बताया कि कृषि विभाग द्वारा गांव स्तर पर जागरूकता अभियान, प्रशिक्षण कार्यक्रम तथा कृषि यंत्रों के प्रदर्शन आयोजित किए जा रहे हैं, ताकि किसानों को वैकल्पिक उपायों के प्रति जागरूक किया जा सके। उन्होंने सभी किसानों से अपील करते हुए कहा कि वे फसल अवशेषों को न जलाएं और पर्यावरण संरक्षण में सहयोग दें। यह न केवल उनकी भूमि की उर्वरता को बढ़ाएगा, बल्कि स्वच्छ एवं स्वस्थ वातावरण के निर्माण में भी सहायक सिद्ध होगा।




