जीवन में सफलता के लिए आत्म निरीक्षण बहुत जरूरी

संजय मग्गू
इंसान में जब से प्रकृति प्रदत्त चेतना से इतर चेतना पैदा हुई है, तब से वह यह जानने की कोशिश में लगा हुआ है कि वह कौन है? हर व्यक्ति जानना चाहता है कि वह क्या है? उसमें कितनी प्रतिभा है, उसके अवगुण क्या हैं, लेकिन वह पूरी तरह अपने आपको जान नहीं पाता है। सदियों से इंसान के सामने यह प्रश्न अनुत्तरित ही रहा है कि आखिर इस संपूर्ण ब्रह्मांड में उसकी हैसियत क्या है? वह मानव समाज में कितना आगे जा सकता है? दरअसल, अगर हम दार्शनिक अंदाज में कहें, तो हमारा जीवन खुद को समझने, जानने और पहचाने की अनंत यात्रा है। अनंत इसलिए कि हम जीवन भर लाख प्रयास करने के बावजूद अपने आप को पहचान नहीं पाते हैं। कुछ न कुछ हमारे व्यक्तित्व का हिस्सा हमारी पकड़ से छूट जाता है। हम अपने आपको समग्र रूप से नहीं जान पाते हैं। इसके बावजूद हमें यही दंभ रहता है कि हम न केवल अपने आपको जानते हैं, बल्कि दूसरों को भी जानते हैं। इस मामले केवल यही कहा जा सकता है कि इंसान अपनी अच्छाइयों को तो जानना चाहता है, कई मामलों में वह जानता भी है, लेकिन अपनी बुराइयों को न तो जानना चाहता है और न ही जानने की कोशिश करता है। ऐसी दशा में कोई इंसान यह कैसे कह सकता है कि वह अपने आप को अच्छी तरह से जानता है। आत्म ज्ञान इतनी आसानी से हासिल नहीं होता है।
आत्म ज्ञान के लिए जरूरी है कि मनुष्य अपनी प्रतिभा, प्रशंसा और बुराइयों से आगे बढ़कर आत्म निरीक्षण की ओर बढ़े। वह आत्म निरीक्षण के जरिये ही जान सकता है कि वह अपने को कितना जानता है। यदि कोई व्यक्ति अत्यंत प्रतिभाशाली है, लेकिन अधीरता उसके स्वभाव में है, तो वह जीवन की इस यात्रा में अपने को साबित नहीं कर पाएगा। उसे जो भी सफलता मिलेगी, हो सकता है कि वह अस्थायी हो। अपनी आदतों को पहचानना ही, आत्म ज्ञान की पहली शर्त है। जब तक हम दूसरों को धोखा देने, छल करने और झूठ बोलने की प्रवृत्ति से मुक्त नहीं हो जाते, तब तक एक अच्छे इंसान नहीं बन सकते हैं। अब एक कारीगर को लीजिए। वह जब किसी वस्तु का निर्माण करता है, तो वस्तु तैयार होने के बाद उसका निरीक्षण करता है। वह यह तो देखता है कि उस वस्तु में क्या-क्या अच्छा है, खूबसूरत है। लेकिन वह यह देखना नहीं भूलता है कि उसकी बनाई गई वस्तु में क्या क्या खराब है? क्या अच्छा नहीं बन पाया है? उसमें सुधार की कितनी गुंजाइश है। वह निरीक्षण के बाद उस कमी को दूर करने का प्रयास करता है। जब वह संतुष्ट हो जाता है, तब वह बाजार में पेश करता है। इंसान को अपना जीवन एक कारीगर के नजरिये से जीना चाहिए। आत्म निरीक्षण जीवन में सफलता हासिल करने के लिए बहुत जरूरी है। अगर कोई आपको आपकी कमियों की ओर इशारा करता है, तो उसका आभारी होना चाहिए। कम से कम वह आलोचना करके कमी को दूर करने को प्रोत्साहित तो कर रहा है। जो लोग खुले मन से अपनी कमियों को स्वीकार करते हैं, दरअसल वह अपने जीवन के प्रति ईमानदार, साहसी और विनम्र होते हैं।

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नीलोफर हाशमी, देश रोजाना ऑनलाइन में सीनियर पत्रकार हैं। वे करंट अफेयर्स, ह्यूमन नेचर, सोशल और पॉलिटिक्स से जुड़ी खबरें बनाती हैं। मीडिया में नीलोफर को सालों का अनुभव है।
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