नगर निगम सदन की बैठक में पार्षद और कमिश्नर आमने-सामने
पार्षदों ने दिखाई नेतागिरी तो कमिश्नर उतरे अफसरी पर
नगर निगम गुरुग्राम की सोमवार को सेक्टर-18 स्थित हिपा में हुई सामान्य सदन बैठक हंगामेदार रही। बैठक में विभिन्न मुद्दों पर अधिकारी और पार्षद आमने सामने हो गए। पार्षद निगम कमिश्नर प्रदीप दहिया पर हमलवार रहे।
गुरुग्राम: नगर निगम गुरुग्राम की सोमवार को सेक्टर-18 स्थित हिपा में हुई सामान्य सदन बैठक हंगामेदार रही। बैठक में विभिन्न मुद्दों पर अधिकारी और पार्षद आमने सामने हो गए। पार्षद निगम कमिश्नर प्रदीप दहिया पर हमलवार रहे। जब पार्षदों ने नेतागिरी दिखाई तो कमिश्नर दहिया भी अफसरी पर उतर गए और पार्षदों को करारा जवाब दिया। उन्होंने यहां तक कह दिया कि ऐसा हाउस मैंने कभी नहीं देखा। उन्होंने पार्षदों को उनकी हद बताते हुए यह भी कह दिया कि हंगामा करके नेता बन जाओगे और सुर्खियां बटोर लोगे। बहस की शुरुआत पार्षद नारायण भड़ाना की के एक बयान से हुई। भडाना ने जब यह कहा कि काल और वाट्सअप का जवाब तक नहीं मिलता। इस पर निगमायुक्त ने जवाब देते हुए कहा कि कंपैरिजन मत करिए, अधिकारी भी जवाब देना जानते हैं। इसके बाद हंगामा बढ़ता गया। एक दूसरी ओर से आरोप प्रत्यारोप के बीच बड़ी मुश्किल से मामला शांत हुआ। 

बैठक की शुरुआत शहर में पेयजल व्यवस्था और बूस्टिंग स्टेशनों पर मोटर बंद-चालू होने की समस्या से हुई, लेकिन कुछ ही देर में पार्षदों ने निगमायुक्त प्रदीप दहिया को फोन नहीं उठाने और शिकायतों पर जवाब नहीं देने को लेकर कमिश्नर को तलब कर लिया।
अधिकारियों की कार्यशैली पर भड़के पार्षद
बैठक की शुरुआत में ही निशाने पर अधिकारियों की कार्यशैली रही।
वार्ड-36 के पार्षद नारायण भड़ाना ने कहा कि पार्षद जनता की समस्याएं लेकर अधिकारियों के पास जाते हैं, लेकिन निगमायुक्त फोन तक नहीं उठाते। उन्होंने कहा कि उनके वार्ड में 78 लाख रुपये खर्च होने के बाद भी पानी की मोटर बार-बार खराब हो रही है। शिकायत करने पर न तो काल रिसीव होती है और न ही वाट्सएप संदेशों का जवाब मिलता है। इस पर अन्य पार्षदों ने भी समर्थन करते हुए अधिकारियों की कार्यशैली पर नाराजगी जताई।

कमिश्नर ने दिया जवाब तो बढ़ गई बात
पार्षदों के आरोपों के बाद निगमायुक्त प्रदीप दहिया ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि कंपैरिजन मत करिए, अधिकारी भी जवाब देना जानते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसा हाउस उन्होंने पहले कभी नहीं देखा। निगमायुक्त ने टिप्पणी की कि नेता बनकर सुर्खियां बटोर लोगे, जिसके बाद सदन में शोर-शराबा और बढ़ गया। कई पार्षद अपनी सीटों से खड़े होकर विरोध जताने लगे।
पार्षदों में भी जूतम पैजार
बैठक के दौरान पार्षद अनूप सिंह और दलीप साहनी के बीच तीखी बहस हो गई। मामला उस समय बढ़ा जब अनूप सिंह ने सवाल उठाया कि उन्हें चमचा” क्यों कहा गया। दोनों पार्षदों के बीच बहस इतनी तेज हो गई कि सदन में कुछ देर के लिए कार्यवाही बाधित करनी पड़ी। लंच के बाद भी माहौल शांत नहीं हुआ और मेयर को कई बार पार्षदों को शालीनता बनाए रखने की अपील करनी पड़ी।
वार्डों में मैनपावर की मांग
पार्षदों ने शहर के सभी 36 वार्डों में बूस्टिंग स्टेशनों के लिए स्थायी मैनपावर उपलब्ध कराने की मांग उठाई। उनका कहना था कि कर्मचारियों की कमी के कारण पानी आपूर्ति व्यवस्था प्रभावित होती है और लोगों को परेशानी झेलनी पड़ती है। इस पर निगमायुक्त ने भरोसा दिलाया कि अगले छह महीने में तकनीक आधारित समाधान लागू किया जाएगा।
डाटा सेंटर से होगी मॉनिटरिंग
नगर निगम ने बैठक में जानकारी दी कि 24 घंटे पेयजल आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत करने के लिए माइक्रो डाटा सेंटर स्थापित करने की योजना बनाई जा रही है। इसके जरिए शहर के बूस्टिंग स्टेशन और मोटरों की निगरानी की जाएगी, ताकि खराबी होने पर तुरंत कार्रवाई हो सके। पानी व्यवस्था सुधारने के लिए एक एडहाक कमेटी बनाने का प्रस्ताव भी रखा गया।
बिजली व शिक्षा विभाग पर भड़के कमिश्नर
बैठक के दौरान बिजली विभाग और शिक्षा विभाग के बीईओ को सदन से बाहर जाने के निर्देश दिए गए। निगमायुक्त ने कहा कि स्कूल भवनों की मरम्मत और सफाई का कार्य नगर निगम करता है, ऐसे में डीईओ का बैठक में उपस्थित न होना गंभीर विषय है। इस मुद्दे पर भी पार्षदों ने अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग की।

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नीलोफर हाशमी, देश रोजाना ऑनलाइन में सीनियर पत्रकार हैं। वे करंट अफेयर्स, ह्यूमन नेचर, सोशल और पॉलिटिक्स से जुड़ी खबरें बनाती हैं। मीडिया में नीलोफर को सालों का अनुभव है।
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