Gurugram News: मेयर पति की कथित दबंगई पर निगम की बैठक में हंगामा, एजेंसी ने किया काम ठप
भरी बैठक में कंपनी अधिकारियों ने मेयर पति पर लगाया कमीशन मांगने का आरोप
मानेसर नगर निगम में घर-घर से कचरा उठाने वाली निजी एजेंसी द्वारा काम बंद किए जाने के बाद शुक्रवार को बुलाई गई समन्वय समिति की बैठक हंगामे की भेंट चढ़ गई।
गुरुग्राम: मानेसर नगर निगम में घर-घर से कचरा उठाने वाली निजी एजेंसी द्वारा काम बंद किए जाने के बाद शुक्रवार को बुलाई गई समन्वय समिति की बैठक हंगामे की भेंट चढ़ गई। निगम आयुक्त प्रदीप सिंह की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में मेयर इंद्रजीत कौर यादव, पार्षदों और कचरा प्रबंधन एजेंसी के अधिकारियों के बीच जमकर तीखी नोक झोंक और बहस हुई। बैठक में निजी एजेंसी के सीईओ गौरव जोशी ने सीधे तौर पर मेयर पति पर गंभीर आरोप लगाए। एजेंसी प्रतिनिधि ने आरोप लगाया कि मेयर पति द्वारा उन पर लगातार दबाव बनाया जा रहा था कि वह टेंडर के मुनाफे का 50 फीसदी हिस्सा उन्हें दे। 

हालांकि, मेयर ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इन्हें पूरी तरह बेबुनियाद और झूठा बताया है। इस हाई-प्रोफाइल विवाद के बाद पार्षदों ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है। सीनियर डिप्टी मेयर प्रवीन यादव ने बताया कि पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए जिला उपायुक्त द्वारा गठित एक स्वतंत्र पैनल से इस पूरे मामले की जांच कराने की सिफारिश की गई है, जिसमें निगम का कोई अधिकारी शामिल नहीं होगा। इसके लिए ठेकेदार जिला उपायुक्त को लिखित शिकायत सौंपेगा।
एजेंसी ने किया वर्क सस्पेंड
दूसरी तरफ, कचरा कंपनी ने साफ कर दिया है कि जब तक उनके चालकों और हेल्परों को लिखित में सुरक्षा का आश्वासन नहीं मिलता और उनका उत्पीड़न बंद नहीं होता, तब तक वे घर-घर से कचरा उठाने का काम शुरू नहीं करेंगे। कंपनी के अनुसार, मेयर पति द्वारा अवैध रूप से काम में दखल दिया गया, कर्मचारियों के साथ दुर्व्यवहार हुआ और उनके फोन तक छीने गए। हालांकि निगम आयुक्त ने शनिवार से ही काम पर लौटने के निर्देश दिए थे, लेकिन कंपनी ने कहा कि वह शनिवार को पहले अपनी आंतरिक बैठक करेंगे और कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित होने के बाद ही काम शुरू करने पर फैसला लेंगे। इस टकराव के बीच मानेसर शहर की सफाई व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। बैठक में गाड़ियों के निरीक्षण को लेकर भी मेयर और अधिकारियों के बीच विरोध भी सामने आया। अधिकारियों ने कहा कि जब वह शाम चार बजे मौके पर थे तो मेयर वहां नहीं थीं, जिस पर मेयर ने जवाब दिया कि वह शाम 6:30 बजे वहां पहुंची थीं। इस पर पार्षदों ने सवाल उठाया कि तय समय के ढाई घंटे बाद जाने का क्या औचित्य था।
कम मिले कर्मचारी, एजेंसी का 70 लाख का भुगतान रोका
बैठक में शहर की सफाई व्यवस्था को लेकर कई और बड़े फैसले भी लिए गए। नियमों के उल्लंघन और लापरवाही को देखते हुए नगर निगम ने मैनुअल स्वीपिंग (सड़क सफाई) का काम देख रही एक अन्य निजी एजेंसी का करीब 70 लाख रुपये का बकाया भुगतान रोकने का निर्णय लिया है। इस एजेंसी पर आरोप है कि उसने अपने छह महीने के अस्थाई टेंडर के तहत तय संख्या से बेहद कम सफाई कर्मचारियों को काम पर लगाया हुआ था, जिससे शहर में गंदगी फैल रही थी।
शौचालयों के रखरखाव का टेंडर कैंसिल
सीनियर डिप्टी मेयर प्रवीन यादव द्वारा उठाए गए एक बेहद महत्वपूर्ण मामले पर कार्रवाई करते हुए निगम ने 34 सामुदायिक शौचालयों के संचालन और रखरखाव का ठेका भी तुरंत प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है। बताया गया कि इस निजी फर्म को इसी साल अप्रैल महीने में वर्क ऑर्डर जारी किया गया था, लेकिन दो महीने बीतने के बाद भी कंपनी ने धरातल पर एक भी शौचालय की मरम्मत या रखरखाव का काम शुरू नहीं किया है। जिस कारण निगम आयुक्त ने एजेंसी के कार्य को भी रद्द करने के निर्देश दिए हैं।
वार्डों के विकास में पार्षदों की मर्जी होगी अनिवार्य
अफसरशाही और पार्षदों के बीच चल रहे तालमेल के अभाव को दूर करने के लिए निगम ने एक बड़ा नीतिगत फैसला लिया है। अब से मानेसर नगर निगम के किसी भी वार्ड में सफाई व्यवस्था, विज्ञापन और अतिक्रमण हटाने से जुड़े जितने भी कार्य किए जाएंगे, उनके निष्पादन के लिए संबंधित वार्ड के पार्षद की सिफारिश और मंजूरी को पूरी तरह अनिवार्य कर दिया गया है। इसके बिना कोई भी काम आगे नहीं बढ़ेगा।

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नीलोफर हाशमी, देश रोजाना ऑनलाइन में सीनियर पत्रकार हैं। वे करंट अफेयर्स, ह्यूमन नेचर, सोशल और पॉलिटिक्स से जुड़ी खबरें बनाती हैं। मीडिया में नीलोफर को सालों का अनुभव है।



