आरटीओ या ई-चालान के नाम से आए लिंक पर क्लिक न करें, हो सकती है साइबर ठगी : एसपी विनोद कुमार
पुलिस अधीक्षक हांसी विनोद कुमार, आईपीएस ने आमजन को साइबर अपराधों के प्रति सतर्क करते हुए कहा कि डिजिटल युग में तकनीक जहां लोगों के जीवन को आसान बना रही है, वहीं साइबर ठग भी नई-नई तकनीकों का इस्तेमाल कर लोगों को ठगी का शिकार बना रहे हैं।
हांसी : पुलिस अधीक्षक हांसी विनोद कुमार, आईपीएस ने आमजन को साइबर अपराधों के प्रति सतर्क करते हुए कहा कि डिजिटल युग में तकनीक जहां लोगों के जीवन को आसान बना रही है, वहीं साइबर ठग भी नई-नई तकनीकों का इस्तेमाल कर लोगों को ठगी का शिकार बना रहे हैं। आजकल साइबर अपराधियों ने आरटीओ और ई-चालान के नाम पर फर्जी लिंक भेजकर ठगी करने का नया तरीका अपनाया है।
पुलिस अधीक्षक ने एडवाइजरी जारी करते हुए बताया कि साइबर ठग व्हाट्सएप ग्रुपों में “RTO”, “RTO E-Challan” या “Traffic Challan” के नाम से फर्जी एप्लीकेशन या लिंक भेजते हैं और लोगों से अपने वाहन का चालान चेक करने की अपील करते हैं। जैसे ही कोई व्यक्ति उस लिंक को खोलता है, उसका मोबाइल फोन हैक हो सकता है। इसके बाद साइबर ठग मोबाइल में मौजूद बैंकिंग डाटा, ओटीपी और अन्य निजी जानकारी का गलत इस्तेमाल कर बैंक खाते से पैसे निकाल लेते हैं।
पुलिस अधीक्षक ने एडवाइजरी जारी करते हुए बताया कि साइबर ठग व्हाट्सएप ग्रुपों में “RTO”, “RTO E-Challan” या “Traffic Challan” के नाम से फर्जी एप्लीकेशन या लिंक भेजते हैं और लोगों से अपने वाहन का चालान चेक करने की अपील करते हैं। जैसे ही कोई व्यक्ति उस लिंक को खोलता है, उसका मोबाइल फोन हैक हो सकता है। इसके बाद साइबर ठग मोबाइल में मौजूद बैंकिंग डाटा, ओटीपी और अन्य निजी जानकारी का गलत इस्तेमाल कर बैंक खाते से पैसे निकाल लेते हैं।उन्होंने बताया कि साइबर अपराधी हैक किए गए मोबाइल से उसी व्यक्ति के व्हाट्सएप ग्रुपों में आगे लिंक भेजते हैं, जिससे अन्य लोग भी ठगी का शिकार बन जाते हैं। चूंकि लिंक किसी परिचित व्यक्ति के नंबर से आता है, इसलिए लोग आसानी से उस पर भरोसा कर लेते हैं। जबकि वास्तव में वह लिंक साइबर ठगों द्वारा मोबाइल हैक करके भेजा जाता है।
एसपी विनोद कुमार ने कहा कि किसी भी प्रकार का ट्रैफिक चालान केवल अधिकृत सरकारी पोर्टल या ट्रैफिक पुलिस की आधिकारिक वेबसाइट एवं ऐप पर ही चेक करें। किसी भी अनजान लिंक, एप्लीकेशन या संदिग्ध संदेश पर क्लिक करने से बचें।
उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार की वित्तीय या ऑनलाइन धोखाधड़ी होने पर तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल कर शिकायत दर्ज करवाएं। इसके अलावा cybercrime.gov.in पोर्टल, साइबर क्राइम थाना अथवा संबंधित पुलिस थाने की साइबर हेल्प डेस्क पर भी शिकायत दी जा सकती है।
साइबर ठगी से बचने के लिए अपनाएं ये सावधानियां :
किसी भी अनजान लिंक या एप्लिकेशन को डाउनलोड न करें।• ट्रैफिक चालान का भुगतान केवल अधिकृत पोर्टल echallan.parivahan.gov.in पर ही करें।• मोबाइल ऐप केवल Google Play Store या अधिकृत स्रोत से ही डाउनलोड करें।• मोबाइल में “Google Play Protect” फीचर हमेशा सक्रिय रखें।• किसी भी अनजान ऐप को Accessibility Services की अनुमति न दें।• संदिग्ध मैसेज, ईमेल या व्हाट्सएप लिंक पर क्लिक करने से बचें।• मोबाइल फोन एवं एप्लिकेशन को समय-समय पर अपडेट करते रहें।• साइबर धोखाधड़ी की स्थिति में तुरंत 1930 हेल्पलाइन पर संपर्क करें।
पुलिस अधीक्षक ने कहा कि साइबर अपराधों से बचने के लिए जागरूकता और सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव है।

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नीलोफर हाशमी, देश रोजाना ऑनलाइन में सीनियर पत्रकार हैं। वे करंट अफेयर्स, ह्यूमन नेचर, सोशल और पॉलिटिक्स से जुड़ी खबरें बनाती हैं। मीडिया में नीलोफर को सालों का अनुभव है।



