Kaithal News: बंद पड़े नलकूपों को वर्षा जल संचयन से जोड़ने की पहल, कैथल में 100 नलकूपों पर पायलट प्रोजेक्ट होगा शुरू
जल संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए दीनबंधु फाउंडेशन के अध्यक्ष सुरेंद्र ढुल ने जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के अभियंता प्रमुख देवेंद्र दहिया को प्रदेश के बंद पड़े नलकूपों को वर्षा जल संचयन प्रणाली के रूप में उपयोग करने का प्रस्ताव सौंपा है।
कैथल : जल संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए दीनबंधु फाउंडेशन के अध्यक्ष सुरेंद्र ढुल ने जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के अभियंता प्रमुख देवेंद्र दहिया को प्रदेश के बंद पड़े नलकूपों को वर्षा जल संचयन प्रणाली के रूप में उपयोग करने का प्रस्ताव सौंपा है। पंचकूला स्थित कार्यालय में हुई बैठक के दौरान प्रस्तुत की गई विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) को विभाग ने प्राथमिकता के आधार पर स्वीकार कर लिया है। सुरेंद्र ढुल ने बताया कि उन्होंने गांव तितरम और हरसौला की पेयजल समस्याओं के समाधान के साथ-साथ पूरे प्रदेश में जल संरक्षण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से यह प्रस्ताव रखा है। उन्होंने कहा कि हरियाणा में हजारों बंद पड़े नलकूप ग्राम पंचायत, सिंचाई विभाग और शिक्षा संस्थानों की भूमि पर मौजूद हैं, जिन्हें वर्षा जल संचयन संरचनाओं में परिवर्तित कर भूजल स्तर बढ़ाने में उपयोग किया जा सकता है।

बैठक में अभियंता प्रमुख देवेंद्र दहिया ने इस प्रस्ताव को सराहते हुए आश्वासन दिया कि सिंचाई, पंचायत एवं शिक्षा विभाग के सहयोग से इसे लागू किया जाएगा। इसके तहत प्रथम चरण में जिला कैथल में 100 बंद नलकूपों पर पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं। सुरेंद्र ढुल के अनुसार यदि इस योजना को प्रदेशभर में लागू किया जाता है तो एक नलकूप के माध्यम से प्रतिवर्ष 8 से 10 लाख लीटर वर्षा जल सीधे भूजल में पहुंचाया जा सकेगा। उन्होंने दावा किया कि प्रदेश के लगभग 3000 बंद नलकूपों का उपयोग होने पर हर साल करीब 2400 करोड़ लीटर पानी का भूजल रिचार्ज संभव होगा, जिससे कैथल, कुरुक्षेत्र और जींद जैसे डार्क जोन क्षेत्रों में भूजल संकट को काफी हद तक कम किया जा सकेगा।
उन्होंने कहा कि इस योजना से खुले बोरवेलों में दुर्घटनाओं की संभावना समाप्त होगी, किसानों को सिंचाई के लिए बेहतर जल उपलब्ध होगा, सरकारी संपत्तियों का पुनः उपयोग हो सकेगा तथा स्कूलों, पंचायत घरों और स्वास्थ्य केंद्रों को वर्षभर पानी की सुविधा मिल सकेगी। इसके अलावा यह पहल जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने और जल संरक्षण के प्रति नई पीढ़ी को जागरूक करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। सुरेंद्र ढुल ने मुख्यमंत्री से मांग करते हुए कहा कि कैथल से शुरू होने वाले इस पायलट प्रोजेक्ट को सफल बनाकर इसे राज्य की स्थायी जल नीति का हिस्सा बनाया जाए। उन्होंने कहा कि दीनबंधु फाउंडेशन इस अभियान में सरकार को हर संभव तकनीकी सहयोग देने के लिए तैयार है।

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