Narnaul News: पैरा शॉटपुट में शर्मिला धनखड़ का स्वर्णिम थ्रो, भारत को दिलाया दूसरा गोल्ड मेडल

छितरौली गांव की शर्मिला धनखड़ ने 9.81 मीटर थ्रो के साथ जीता गोल्ड

Desh Rojana
On

हरियाणा की बेटियों ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय खेल मंच पर देश का मस्तक गर्व से ऊंचा कर दिया है। कॉमनवेल्थ गेम्स की महिला पैरा शॉटपुट एफ-57 स्पर्धा में महेंद्रगढ़ जिले की शर्मिला धनखड़ ने स्वर्णिम थ्रो फेंककर गोल्ड मेडल पर कब्जा जमाया।

नारनौल: हरियाणा की बेटियों ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय खेल मंच पर देश का मस्तक गर्व से ऊंचा कर दिया है। कॉमनवेल्थ गेम्स की महिला पैरा शॉटपुट एफ-57 स्पर्धा में महेंद्रगढ़ जिले की शर्मिला धनखड़ ने स्वर्णिम थ्रो फेंककर गोल्ड मेडल पर कब्जा जमाया। सोमवार को हुए इस कड़े मुकाबले में शर्मिला ने 9.81 मीटर का अपना सीजन बेस्ट थ्रो दर्ज करते हुए पहला स्थान हासिल किया। उनकी इस ऐतिहासिक कामयाबी के साथ ही इन खेलों में भारत के खाते में दूसरा स्वर्ण पदक भी जुड़ गया है। शर्मिला की इस स्वर्णिम सफलता की खबर मिलते ही महेंद्रगढ़ समेत पूरे हरियाणा में खुशी की लहर दौड़ गई। उनके पैतृक गांव छितरौली में परिजनों और ग्रामीणों ने ढोल-नगाड़ों की थाप पर मिठाइयां बांटकर जश्न मनाया। गांव के लोगों का कहना है कि शर्मिला ने न केवल अपने परिवार बल्कि पूरे जिले और देश को गौरवान्वित किया है।
 
throw
 
 
2 साल की उम्र में पोलियो, 34 की उम्र में संभाला शॉटपुट:
शर्मिला धनखड़ की यह जीत सिर्फ एक मेडल नहीं, बल्कि मुश्किलों के खिलाफ उनके कभी न झुकने वाले हौसले की मिसाल है। जब वह महज 2 साल की थीं, तब पोलियो की चपेट में आने से उनका एक पैर पूरी तरह प्रभावित हो गया था। पिता एक छोटे किसान थे, जिसके कारण आर्थिक तंगी के चलते उन्हें बचपन में बेहतर इलाज नहीं मिल सका। कम उम्र में ही उनकी शादी भी कर दी गई, लेकिन उनके अंदर कुछ बड़ा करने का जुनून जिंदा रहा। आखिरकार 34 साल की उम्र में उन्होंने कोच टेकचंद और देवेंद्र के मार्गदर्शन में एफ-57 कैटेगरी की सीटेड शॉटपुट इवेंट की पेशेवर ट्रेनिंग शुरू की।
 
 
ट्रेनिंग के लिए बेच दिया घर, किराए के मकान में रहकर की मेहनत:
शर्मिला के लिए पैरा एथलेटिक्स का यह सफर कांटों से भरा रहा। खेल के खर्च और ट्रेनिंग की फीस जुटाना उनके परिवार के लिए बेहद कठिन था। हालात इतने खराब हो गए कि साल 2023 में अपनी ट्रेनिंग जारी रखने के लिए शर्मिला को अपना मकान तक बेचना पड़ गया। घर बिकने के बाद पूरा परिवार किराए के मकान में रहने लगा, लेकिन शर्मिला ने अपने कदमों को पीछे नहीं हटने दिया और लगातार अभ्यास जारी रखा। आज उसी त्याग और अटूट समर्पण के बदौलत उन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स के मंच पर तिरंगा फहराकर इतिहास रच दिया है।
Desh Rojana Hiring Ad

About The Author

NELOFER HASHMI Picture

नीलोफर हाशमी, देश रोजाना ऑनलाइन में सीनियर पत्रकार हैं। वे करंट अफेयर्स, ह्यूमन नेचर, सोशल और पॉलिटिक्‍स से जुड़ी खबरें बनाती हैं। मीडिया में नीलोफर को सालों का अनुभव है।

संबंधित समाचार

Desh Rojana Hiring Ad