Palwal News : हरियाणा बिजली कर्मचारी एवं इंजीनियर संयुक्त संघर्ष मोर्चा के आह्वान पर किया विरोध प्रदर्शन

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बुधवार को पलवल सर्कल के समक्ष हरियाणा बिजली कर्मचारी एवं इंजीनियर संयुक्त संघर्ष मोर्चा के आह्वान पर प्रदर्शन किया। जिसकी अध्यक्षता ऑल हरियाणा पॉवर कारपोरेशन वर्कर यूनियन सर्कल सचिव राजेश शर्मा, हरियाणा बिजली बोर्ड वर्कर यूनियन सर्कल सचिव और हरियाणा पॉवर इंजीनियर एसोसिएशन कुलदीप यादव एक्सएन ने सयुक्त रूप से की। संचालन समून ख़ान के द्वारा किया गया।

बुधवार को पलवल सर्कल के समक्ष हरियाणा बिजली कर्मचारी एवं इंजीनियर संयुक्त संघर्ष मोर्चा के आह्वान पर प्रदर्शन किया। जिसकी अध्यक्षता ऑल हरियाणा पॉवर कारपोरेशन वर्कर यूनियन सर्कल सचिव राजेश शर्मा, हरियाणा बिजली बोर्ड वर्कर यूनियन सर्कल सचिव और हरियाणा पॉवर इंजीनियर एसोसिएशन कुलदीप यादव एक्सएन ने सयुक्त रूप से की। संचालन समून ख़ान के द्वारा किया गया। dd

प्रदर्शन के बाद अधीक्षक अभियंता कार्यालय से उपायुक्त पलवल के कार्यालय तक पैदल मार्च करते हुए प्रदेश के मुख्यमंत्री हरियाणा सरकार के नाम ज्ञापन अतिरिक्त उपायुक्त उत्सव आनंद के मार्फ़त दिया गया। कर्मचारियों को संबोधित करते हुए आल हरियाणा पावर कॉर्पोरेशन वर्कर्स यूनियन के राज्य उपप्रधान जितेन्द्र तेवतिया, कार्यकारी अभियंता कुलदीप यादव, राकेश बनचारी ने कहा कि हरियाणा सरकार बिजली में समानांतर वितरण लाइसेंस स्मार्ट मीटर एग्री डिस्कॉम के फैसलों को तत्काल निरस्त करने की मांग करता है। ज्ञापन में आयोग द्वारा गठित तथाकथित विशेषज्ञ समिति को भी तत्काल भंग करने की मांग की गई। ज्ञापन में कहा गया कि यह समिति मनमाने एवं असंवैधानिक तरीके से गठित की गई है तथा इस महत्वपूर्ण सार्वजनिक मामले में निष्पक्ष निर्णय लेने की आवश्यक विश्वसनीयता और निष्पक्षता से वंचित है। उल्लेखनीय है कि इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड कंपनी ने नूंह व गुरुग्राम में बिजली वितरण का लाईसेंस देने की याचिका हरियाणा पावर रेगुलेटरी कमीशन दायर की है। जिसका बिजली कर्मचारियों व इंजीनियर्स के अलावा संयुक्त किसान मोर्चा के नेता डॉक्टर रघुबीर सिंह ने भी किसानों तरफ़ से अपना आंदोलन में समर्थन किया गया। ऑल हरियाणा पावर कारपोरेशनज वर्कर यूनियन के उप प्रधान जितेन्द्र तेवतिया ने कहा कि निजी कंपनियों को समानांतर वितरण लाइसेंस दिए जाने से सार्वजनिक विद्युत वितरण व्यवस्था कमजोर होगी, आम उपभोक्ताओं पर बिजली दरों का बोझ बढ़ेगा, क्रॉस-सब्सिडी व्यवस्था समाप्त होगी तथा अंततः बिजली क्षेत्र ने कहा कि यदि निजी कंपनियों को सार्वजनिक वितरण नेटवर्क का उपयोग करते हुए केवल लाभकारी उपभोक्ताओं को चुनने की अनुमति दी गई तो इससे राज्य के सार्वजनिक वितरण निगम आर्थिक रूप से कमजोर हो जाएंगे और किसानों, घरेलू उपभोक्ताओं तथा छोटे व्यावसायिक उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ेगा। उन्होंने कहा कि बिजली एक अनिवार्य सार्वजनिक सेवा है, इसे निजी लाभ कमाने का माध्यम नहीं बनाया जा सकता। उन्होंने दोहराया कि विद्युत अधिनियम किसी भी उपभोक्ता के साथ भेदभाव की अनुमति नहीं देता तथा सार्वजनिक वितरण नेटवर्क पर एकाधिक वितरण लाइसेंसधारियों की व्यवस्था सार्वभौमिक एवं समान विद्युत आपूर्ति के सिद्धांतों के विपरीत है। इसके अलावा बिजली कर्मचारियों की पंद्रह सूत्रीय मांग पत्र में शामिल मुख्य माँग जिसमे कच्चे कर्मचारियों को पक्का करने, मेडिकल सुविधा लागू करने, पुरानी पेंशन लागू करने, रिस्क अलाउंस देने की माँगो का समाधान किया जाए। रैली में पावर इंजीनियरों, बिजली कर्मचारियों ने बड़ी संख्या में भाग लिया और चेतावनी दी कि यदि जनहित की इन मांगों की अनदेखी की गई तो आंदोलन की अगली कड़ी में 3 अगस्त से 5 अगस्त तक सभी डिवीज़नो पर विरोध प्रदर्शन और 6 से 8 अगस्त तक सभी उपमण्डलों के कार्यालयों पर धरना प्रदर्शन करते हुए गांव गांव जाकर सरकार की निजीकरण की नीतियों के बारे में चर्चा करतेहुए समर्धन जुटाया जाएगा। 11 अगस्त से 13 अगस्त तक तीन दिवसीय हड़ताल होगी, जिसमे सभी कर्मचारी और अधिकारी शामिल होंगे। इसके बाद भी सरकार समाधान नहीं करती है तो और व्यापक एवं तीव्र आंदोलन किया जाएगा। उन्होंने पुनः दोहराया कि वह सार्वजनिक विद्युत क्षेत्र की रक्षा तथा सभी उपभोक्ताओं को सस्ती, विश्वसनीय एवं गुणवत्तापूर्ण बिजली उपलब्ध कराने के लिए अपना संघर्ष जारी रखेगा। प्रदर्शन में बिजली कर्मियों के नेता राजन वर्मा, राजकुमार डागर, सरजीत सिंह, नरेंद्र सोरोत, वेदपाल तेवतिया, योगराज दीक्षित, वीरपाल, योगेश पाठक, पवन कुमार, चंदर शेखर, नंद किशोर, महेंद्र, इजहार, मनोहरी मौजूद थे।

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