इंदिरा गांधी ने भी 1973 में युवाओं को हलके में लिया था :संजय मग्गू

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संजय मग्गू

इतिहास में रुचि रखने वाले यह बात जरूर जानते होंगे कि 1975 में इंदिरा गांधी के देश में इमरजेंसी लगाने के पीछे दिसंबर 1973 में अहमदाबाद के छात्रों द्वारा की गई हड़ताल की बहुत बड़ी भूमिका थी। हॉस्टल मेस का खर्च तीस रुपये महीना बढ़ा दिया गया था। इसको लेकर गुजरात में छात्रों ने हड़ताल की। पहले तो यह हड़ताल छात्रों तक ही सीमित रही, लेकिन बाद में धीरे-धीरे कर्मचारी संगठन भी आ जुटे। आम जनता ने भी भाग लेना शुरू किया। तो छात्रों का यह आंदोलन देखते ही देखते राज्य स्तरीय भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन में तब्दील हो गया। आज की ही तरह इंदिरा गांधी को तब अजेय माना जाता था। दो साल पहले ही यानी 1971 में बांग्लादेश का निर्माण और चुनावी जीत के बाद कोई सोच भी नहीं सकता था कि इंदिरा गांधी को कोई हरा सकता है। गुजरात के छात्र आंदोलन को समर्थन देने के लिए जय प्रकाश नारायण गुजरात पहुंचे।

हालांकि वह इससे पहले बिहार में छात्रों का आंदोलन शुरू कर चुके थे। बिहार और गुजरात के छात्रों का यह आंदोलन रंग लाया। इंदिरा गांधी पर दबाव बढ़ा और संयोग से उसी समय चुनावी कदाचार संबंधी हाईकोर्ट का फैसला आया और इंदिरा गांधी को इमरजेंसी लगाने पर मजबूर होना पड़ा। गुजरात में 63 दिनों तक चले आंदोलन में 103 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी। 310 लोग घायल हुए थे और आठ हजार से अधिक लोग विभिन्न कानूनों में गिरफ्तार किए गए थे। सन 1976 में हुए चुनाव में इंदिरा गांधी को सत्ता से हाथ धोना पड़ा। यह युवाओं की ही ताकत थी जिसने इंदिरा गांधी जैसी अजेय समझी जाने वाली नेता को शिकस्त दी थी। युवाओं ने हमेशा सत्ता पलटने में अपनी भूमिका निभाई है।

दिल्ली के जंतर मंतर पर 36 दिनों तक चले आंदोलन ने उस सरकार को झुकने पर मजबूर कर दिया जिसके बारे में कहा जाता था कि उसे कोई झुका नहीं सकता है। भाजपा 2014 में इन्हीं युवाओं की बदौलत सत्ता पर काबिज हुई थी। पिछले बारह साल से ध्रुवीकरण भाजपा का सबसे बड़ा हथियार रहा है। वह हिंदू वोटों का ध्रुवीकरण करके चुनाव जीतती आई है। पीएम मोदी की छवि गढ़ने में मीडिया और भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं ने बहुत मेहनत की थी। विरोधी दल तो पीएम मोदी की लोकप्रियता के स्तर तक पहुंचने की कल्पना भी नहीं कर सकते थे।

पीएम मोदी के बारे में कहा जाता था कि मोदी है तो मुमकिन है। लेकिन कॉकरोच आंदोलन ने एक झटके में पीएम मोदी की छवि को ही छिन्न भिन्न कर दिया। अब तो ऐसा लगता है कि भाजपा का आत्म विश्वास ही हिल गया है। भाजपा ने अब तक जो भी अपनी तस्वीर बनाई थी, उसको कॉकरोचों ने मटियामेट कर दिया। कॉकरोचों के इस सफल आंदोलन में देश में राजनीति की हवा ही बदल दी है। कॉकरोचों ने यह जाहिर कर दिया है कि यदि संगठित होकर लड़ा जाए, तो सरकार को झुकने पर मजबूर किया जा सकता है।

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नीलोफर हाशमी, देश रोजाना ऑनलाइन में सीनियर पत्रकार हैं। वे करंट अफेयर्स, ह्यूमन नेचर, सोशल और पॉलिटिक्‍स से जुड़ी खबरें बनाती हैं। मीडिया में नीलोफर को सालों का अनुभव है।

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