सामाजिक जागरूकता से ही रुकेंगे साइबर फ्रॉड, नशा व दहेज जैसी कुरीतियां : सेशन जज डॉ. सुशील

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा लगातार चलाए जा रहे हैं जागरूकता अभियान

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जिला एवं सत्र न्यायाधीश-सह-चेयरमैन जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, डॉ. सुशील कुमार गर्ग ने कहा कि समाज में बढ़ते साइबर फ्रॉड, नशाखोरी, दहेज प्रथा तथा अन्य सामाजिक अपराधों पर रोक लगाने के लिए व्यापक जनजागरूकता अत्यंत आवश्यक है।

नूंह: जिला एवं सत्र न्यायाधीश-सह-चेयरमैन जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, डॉ. सुशील कुमार गर्ग ने कहा कि समाज में बढ़ते साइबर फ्रॉड, नशाखोरी, दहेज प्रथा तथा अन्य सामाजिक अपराधों पर रोक लगाने के लिए व्यापक जनजागरूकता अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि शिक्षा का अभाव इन अधिकांश समस्याओं का मूल कारण है तथा जागरूक समाज ही इन बुराइयों को समाप्त कर सकता है।IMG-20260515-WA0047
उन्होंने कहा कि जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से लगातार स्कूलों, कॉलेजों तथा विभिन्न संस्थानों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि सीजेएम एवं सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण नेहा गुप्ता द्वारा विभिन्न सरकारी एवं निजी शिक्षण संस्थानों में नशे, साइबर अपराध और सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ विद्यार्थियों को जागरूक किया जा रहा है। मेवात इंजीनियरिंग कॉलेज, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल तथा मारिया मंडी स्कूल सहित अनेक संस्थानों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं।
डॉ. गर्ग ने कहा कि नशे की लत सीधे तौर पर अपराधों को बढ़ावा देती है। नशा करने वाले व्यक्ति कई बार अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए चोरी, छीना-झपटी और अन्य अपराधों की ओर बढ़ जाते हैं। उन्होंने कहा कि जिले में नशे के मामले अन्य सीमावर्ती क्षेत्रों की तुलना में कम हैं, लेकिन फिर भी इसे गंभीरता से लेते हुए निरंतर जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं।
उन्होंने बताया कि जिला प्रशासन, पुलिस विभाग तथा न्यायालय समय-समय पर संयुक्त बैठकों एवं कार्यक्रमों के माध्यम से साइबर अपराध, नशा उन्मूलन और सामाजिक बुराइयों के खिलाफ लोगों को जागरूक कर रहे हैं। जेल परिसर में भी कैदियों एवं हवालातियों के बीच साइबर अपराध और नशे के दुष्परिणामों को लेकर विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं।
उन्होंने कहा कि साइबर अपराध जिले के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। कई मामलों में यह सामने आया है कि शिक्षा के अभाव के बावजूद कुछ लोग साइबर फ्रॉड जैसी गतिविधियों में शामिल हो रहे हैं। ऐसे में समाज, मीडिया और प्रशासन को मिलकर लोगों को जागरूक करना होगा ताकि इस प्रकार के अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सके।
डॉ. गर्ग ने दहेज प्रथा को भी गंभीर सामाजिक कुरीति बताते हुए कहा कि समाज के सभी वर्गों को मिलकर इसके खिलाफ आवाज उठानी होगी। उन्होंने कहा कि मीडिया, सामाजिक संगठनों और शिक्षण संस्थानों की भूमिका इस दिशा में अत्यंत महत्वपूर्ण है।
इस अवसर पर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट-सह-सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, नेहा गुप्ता भी उपस्थित रहीं।
उन्होंने कहा कि जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से भविष्य में भी जागरूकता कार्यक्रमों को और अधिक व्यापक स्तर पर चलाया जाएगा ताकि समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाया जा सके।
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