रेवाडी पुलिस की एडवाइजरी : क्रिकेट बुकी और सट्टेबाजों के चंगुल में न फंसे, जीवन अमूल्य है
पुलिस की अपील : संदिग्ध गतिविधियों की तुरंत दे सूचना, सट्टेबाजी से रहें दूर
पुलिस अधीक्षक हेमेंद्र कुमार मीणा के निर्देश अनुसार रेवाड़ी पुलिस द्वारा आमजन के लिए एक महत्वपूर्ण एडवाइजरी जारी की गई है।
रेवाड़ी। पुलिस अधीक्षक हेमेंद्र कुमार मीणा के निर्देश अनुसार रेवाड़ी पुलिस द्वारा आमजन के लिए एक महत्वपूर्ण एडवाइजरी जारी की गई है।
पुलिस ने स्पष्ट किया है कि युवाओं को सट्टेबाजी और ऑनलाइन जुए जैसी अवैध गतिविधियों से दूर रखना तथा इसके दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करना अत्यंत आवश्यक है। समाज के प्रत्येक नागरिक का जागरूक और सतर्क रहना ऐसे अपराधों की रोकथाम में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
सावधान रहें, सतर्क रहें: सट्टेबाजी एक अपराध है
रेवाड़ी पुलिस ने चेताया है कि क्रिकेट बुकी और ऑनलाइन सट्टेबाज युवाओं को भारी मुनाफे का लालच देकर अपने जाल में फंसाते हैं। शुरुआत में लाभ का झांसा दिया जाता है, लेकिन धीरे-धीरे व्यक्ति बड़ी धनराशि हारकर मानसिक तनाव, कर्ज और अवसाद जैसी गंभीर स्थितियों में पहुंच जाता है। अनेक बार ऐसी परिस्थितियां व्यक्ति और उसके परिवार के लिए गंभीर सामाजिक एवं आर्थिक समस्याएं उत्पन्न कर देती हैं।
रेवाड़ी पुलिस की अपील:
पुलिस अधीक्षक श्री हेमेंद्र कुमार मीणा, आईपीएस ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी अनजान व्यक्ति, मोबाइल ऐप, वेबसाइट या ऑनलाइन लिंक के माध्यम से किसी भी प्रकार की सट्टेबाजी अथवा जुए से जुड़ी गतिविधियों में शामिल न हों। क्रिकेट मैचों पर ऑनलाइन या ऑफलाइन सट्टा लगाना एक दंडनीय अपराध है। इससे पूरी तरह दूर रहें।
उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति को आर्थिक नुकसान या मानसिक तनाव का सामना करना पड़ रहा हो तो वह अपने परिजनों, मित्रों, परामर्श केंद्रों अथवा नजदीकी पुलिस थाना से संपर्क कर सहायता प्राप्त करे। यदि किसी को किसी बुकी, सट्टेबाज या संदिग्ध गतिविधि की जानकारी हो तो वह तुरंत पुलिस को सूचित करे। सूचना देने वाले की पहचान पूर्णतः गोपनीय रखी जाएगी।
हरियाणा सार्वजनिक जुआ (निषेध) अधिनियम, 2025 के अंतर्गत सजा के प्रमुख प्रावधान:
धारा 5: मैच फिक्सिंग / स्पॉट फिक्सिंग
* पहली बार: 3 से 5 वर्ष की सजा और न्यूनतम ₹5 लाख जुर्माना।
* पुनरावृत्ति: 5 से 7 वर्ष की सजा और न्यूनतम ₹7 लाख जुर्माना।
धारा 6: सट्टेबाजी में सहायता या उकसाना
* जितना दंड अपराधी को मिलेगा, उतना ही सहायक या उकसाने वाले को भी मिलेगा।
धारा 7: संगठित जुआ सिंडिकेट में शामिल होना
* पहली बार: 3 से 5 वर्ष की सख्त सजा और ₹5 लाख जुर्माना।
* पुनरावृत्ति: 5 से 7 वर्ष की सख्त सजा और ₹5 लाख से कम नहीं जुर्माना।
धारा 8: पहचान छिपाकर सट्टेबाजी में शामिल होना
* पहली बार: 3 वर्ष तक की सजा, ₹10,000 जुर्माना या दोनों।
* पुनरावृत्ति: 3 से 5 वर्ष की सजा और ₹20,000 से कम नहीं जुर्माना।
पुलिस की कार्रवाई और निगरानी जारी
पुलिस अधीक्षक श्री हेमेंद्र कुमार मीणा, आईपीएस ने बताया कि जिले में सट्टेबाजी और अवैध जुए के विरुद्ध लगातार अभियान चलाया जा रहा है। पुलिस की स्पेशल टीमें व क्राइम यूनिट ऑनलाइन और ऑफलाइन सट्टेबाजों की गतिविधियों पर लगातार नजर रखे हुए हैं। ऐसे मामलों में हरियाणा सार्वजनिक जुआ (निषेध) अधिनियम, 2025, आईटी एक्ट तथा भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की संबंधित धाराओं के तहत कठोर कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
रेवाड़ी पुलिस ने आमजन से अपील की है कि वे स्वयं भी सट्टेबाजी से दूर रहें तथा अपने परिवार और युवाओं को भी इसके दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करें, ताकि समाज को इस बुराई से बचाया जा सके।

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