New Delhi News: पूर्व सीजेआई ने किया जस्टिस मुइयां की टिप्पणी का विरोध
जस्टिस गवई बोले मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन, एसआईआर प्रक्रिया पर बयान मर्यादा के खिलाफ
पूर्व सीजेआई बीआर गवई और दिल्ली हाईकोर्ट के दो रिटायर्ड जजों ने सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस उज्जल भुइयां की टिप्पणी की आलोचना की है। उन्होंने कहा कि एसआईआर का मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन हैं। जस्टिस गवई ने सोमवार को कहा कि किसी लंबित मामले पर सुप्रीम कोर्ट के मौजूदा जज को सार्वजनिक टिप्पणी नहीं करनी चाहिए। उन्होंने इसे न्यायिक मर्यादा के खिलाफ बताया।
नई दिल्ली: पूर्व सीजेआई बीआर गवई और दिल्ली हाईकोर्ट के दो रिटायर्ड जजों ने सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस उज्जल भुइयां की टिप्पणी की आलोचना की है। उन्होंने कहा कि एसआईआर का मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन हैं। जस्टिस गवई ने सोमवार को कहा कि किसी लंबित मामले पर सुप्रीम कोर्ट के मौजूदा जज को सार्वजनिक टिप्पणी नहीं करनी चाहिए। उन्होंने इसे न्यायिक मर्यादा के खिलाफ बताया।

जस्टिस भुइयां ने रविवार को एनएएलएसएआर यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ में 19वीं जस्टिस बोध राज साहनी मेमोरियल मूट कोर्ट प्रतियोगिता के समापन समारोह में भाषण दिया था। उन्होंने कहा था कि लाखों भारतीय नागरिकों को वोट देने के अधिकार से वंचित करने वाली कोई भी प्रक्रिया मूल रूप से मनमानी है। यह संवैधानिक व्यवस्था को नकारने जैसी है।
जस्टिस भुइयां ने कहा था कि संविधान नागरिकों के दो वर्ग नहीं बनाता। एक वर्ग वोट देने के अधिकार वाला और दूसरा बिना वोटिंग अधिकार वाला नहीं हो सकता। उन्होंने कहा था कि ऐसी प्रक्रिया को किसी भी तरह की 'व्हाट अबाउटरी' से सही नहीं ठहराया जा सकता। गवई ने कहा, न्यायिक मर्यादा उन्हें उस मामले पर टिप्पणी करने की इजाजत नहीं देती, जो अदालत में विचाराधीन है। सुप्रीम कोर्ट के मौजूदा जज को ऐसे मुद्दे पर बयान नहीं देना चाहिए, जिस पर उसी अदालत में सुनवाई चल रही हो। गवई की राय से दिल्ली हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज एसएन ढींगरा और आरएस सोढ़ी भी सहमत रहे

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