आंध्र प्रदेश में स्थापित होगी वर्ल्ड की सबसे पहली कोको सिटी। प्रगतिशील किसानों का बनेगा केंद्र।
प्रशिक्षित किये जाएंगे एक लाख किसान, बरती जाएगी पूरी पारदर्शिता।
आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने राज्य का पहला समर्पित कोको शहर बनाने की घोषण की। उन्होंने अधिकारियों को इस परियोजना के लिए 250 एकड़ भूमि का चयन करने के निर्देश दिए हैं। जो प्रगतिशील किसानों के लिए एक अनुभव केंद्र के रूप में कार्य करेगा।

आंध्र प्रदेश में बनेगी दुनिया की पहली कोको सिटी।
आंध्र प्रदेश सरकार ने बागवानी को 50 लाख एकड़ तक बढ़ाने और 250 एकड़ में कोको सिटी बनाने की योजना तैयार करने के निर्देश दिए हैं। किसानों की आय बढ़ाने के लिए मल्टी-क्रॉपिंग, प्राकृतिक खेती और नई फसलों पर फोकस किया जाएगा। एक कोको शहर स्थापित करने और किसानों की आय बढ़ाने के लिए कृषि को मजबूत करने के निर्देश दिए। जिसमें बाजार आधारित और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दिया जायेगा। इस योजना में विभिन्न फलों और सब्जियों की खेती बढ़ाना और गरीबी रेखा से नीचे यानी बीपीएल किसानों को सहायता प्रदान करना शामिल है। सामान्य से कम मानसून वर्षा की आशंका के कारण 20 लाख एकड़ में पीएमडीएस जैसे उपाय लागू किए जाएंगे।
किसानो को उत्तम प्रशिक्षण की व्यवस्था और सहायता
जी हाँ, आंध्र प्रदेश दुनिया का पहला 'कोको सिटी' स्थापित करने की तैयारी कर रहा है। मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने हाल ही में अधिकारियों को इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए उपयुक्त स्थान की पहचान करने के निर्देश दिए हैं। इस योजना के अंतर्गत कम से कम एक लाख किसानों को उत्तम प्रशिक्षण देने की व्यवस्था करने को कहा है। जो किसान इस योजना में शामिल होंगे, उन्हें सब्सिडी और सरकारी सहायता भी दी जाएगी। माल अच्छे दामों पर बिके इसके लिए मंडी से लेकर बाजार तक सभी सुविधाए उपलब्ध कराई जाएंगी।

इस परियोजना की मुख्य विशेषताएं
इस परियोजना को प्रगतिशील किसानों के लिए एक अनुभव और प्रशिक्षण केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा, जहाँ उन्हें कोको की आधुनिक खेती और अंतरराष्ट्रीय मानकों के बारे में सिखाया जाएगा। यह कोको सिटी लगभग 250 से 500 एकड़ के क्षेत्र में फैली होगी। शुरुआती प्रस्तावों के अनुसार, इसे एलुरु (Eluru) जिले में स्थापित किया जा सकता है, जो वर्तमान में देश का शीर्ष कोको उत्पादक क्षेत्र है। यहाँ कोको की खेती, प्रसंस्करण (processing) और विपणन (Marketing)के लिए एक एकीकृत हब बनाया जाएगा, जो अंतरराष्ट्रीय मानकों पर आधारित होगा। यह पहल राज्य के कृषि क्षेत्र को मजबूत करने और बागवानी (Horticulture) को 50 लाख एकड़ तक विस्तारित करने की बड़ी योजना का हिस्सा है।
कब तक पूरी होगी योजना ?
आंध्र सरकार 2030-31 तक करीब एक लाख किसानों को इसके लिए प्रशिक्षित करेगी, इसके लिए विकास केंद्र स्थापित किये जायेंगे। 25 मिलियन पौधे वितरित किये जायेंगे। कोको उत्पादन में पारदर्शिता लाने के लिए लाइट डिजिटल किसान रजिस्ट्री शुरू करने की भी सिफारिश की गई है

सब्सिडी और सरकारी सहायता
आंध्र प्रदेश सरकार इस पर एक बड़ा काम करने जा रही है आज केंद्र और राज्य सरकार कोको और बागवानी को बढ़ावा देने के लिए अनेक सब्सिडी और योजनाएं प्रदान कर रही हैं, विशेषकर नारियल और सुपारी के बागानों में अंतर-फसल के रूप में लगाने को कहा जाता जिससे एक साथ कई फसल लगा कर किसान दोहरा लाभ ले सकें।
कोको विकास निदेशालय (DCCD) और बागवानी विभाग इसके लिए प्रमुख वित्तीय सहायता देते हैं। जैसे- नई कोको रोपण के लिए प्रति हेक्टेयर 20,000 रुपये तक की वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। हाइब्रिड फसल लगाने और इंटर क्रॉपिंग के लिए भी 60 से 40 के अनुपात में सहायता प्रदान की जाती है। आंध्र प्रदेश सरकार कोको कंपनियों के माध्यम से उपज बेचने पर 50 रुपये प्रति किलोग्राम तक की अतिरिक्त सब्सिडी भी दे रही है। सरकार किसानो के प्रशिक्षण और कार्यशालाओं के लिए भी सब्सिडी उपलब्ध कराती है, जिसमें प्रति बैच जिसमे 50 किसान शामिल होते हैं उन्हें 3.50 लाख रुपये तक की सहायता भी दी जाती है।
आंध्र सरकार कोको की खेती को बढ़ावा देने के लिए इतना बड़ा कदम उठाने जा रही है। ये प्रयोग अगर सफल रहता है तो देश ही दुनिया में पहली कोको सिटी हमारे देश में होगी।

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