Faridabad News : श्रीकृष्ण रूपी संतान के लिए देवकी सा संकल्प और यशोदा सा समर्पण ज़रूरी: अंजलि आर्या

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आर्य समाज सेक्टर 28-31 के तत्वावधान में सात दिवसीय संगीतमय 'योगीराज युगपुरुष श्री कृष्ण वैदिक कथा' के दूसरे दिन कथावाचिका विदुषी बहन अंजलि आर्या ने श्रीकृष्ण जन्म प्रसंग की दिव्य व्याख्या की।

आर्य समाज सेक्टर 28-31 के तत्वावधान में सात दिवसीय संगीतमय 'योगीराज युगपुरुष श्री कृष्ण वैदिक कथा' के दूसरे दिन कथावाचिका विदुषी बहन अंजलि आर्या ने श्रीकृष्ण जन्म प्रसंग की दिव्य व्याख्या की। a

अंजलि आर्य ने कहा कि परमेश्वर संपूर्ण ब्रह्मांड के स्वामी हैं और उनकी छत्रछाया से ही संसार में सब प्राणी तथा दिव्य आदर्श व्यक्तित्व जन्म लेते हैं। उन्होंने "मन मोड़ा फिर डर नहीं, कोई दूर प्रभु का घर नहीं" भजन के माध्यम से समझाया कि मन को सद्मार्ग पर ले जाने के लिए निरंतर प्रयास और अच्छे संस्कार बेहद आवश्यक हैं। उन्होंने "माता निर्माता भवति" के सिद्धांत पर जोर देते हुए कहा कि माता ही बच्चे के चरित्र, संस्कारों और जीवन की पहली मुख्य रचयिता होती है। एक श्रेष्ठ संतान के निर्माण के लिए देवकी जैसा दृढ़ संकल्प और यशोदा जैसा निस्वार्थ समर्पण अनिवार्य है। वासुदेव और देवकी के वैदिक विवाह को प्रसंग सुनाते हुए उन्होंने कहा कि देवकी की माता ने बताया कि गृहणी परिवार की नींव है, उन्हें मर्यादा और धर्म पर चलने की प्रेरणा दी थी,  लेकिन संस्कारों की कमी से आज परिवार टूट रहे हैं। कथा को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने बताया कि विवाह के बाद जब कंस स्वयं रथ चलाकर जा रहा था, तब एक गंभीर वाणी (आकाशवाणी) सुनी कि देवकी की आठवीं संतान आपके विनाश का कारण बनेगी। क्रोधित कंस ने देवकी पर तलवार उठा ली, तब वासुदेव ने संतान सौंपने का वचन देकर उनके प्राण बचाए। कंस ने दोनों को कारागार में डाल दिया। देवकी की संतानों को कंस ने निर्दयतापूर्वक मार डाला। भाद्रपद मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी को घनघोर वर्षा, आंधी-तूफान और आधी रात में देवकी की संतान के रूप में भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ। वासुदेव नवजात कृष्ण को सुरक्षित गोकुल में माता यशोदा के पास छोड़ उनकी नवजात कन्या को साथ लेकर वापिस कारागार में लौट आए। श्रीकृष्ण के जन्म का समाचार मिलते ही संपूर्ण ब्रजमंडल में आनंद की लहर दौड़ गई। नंद बाबा ने इस पावन अवसर पर गौमाता, स्वर्ण और वस्त्रों का मुक्त हस्त से दान किया।  विदुषी अंजलि आर्या ने कहा कि श्रीकृष्ण का बाल रूप और उनके वैदिक आदर्श जीवन हमें धर्म, सत्य और मर्यादा पालन का संदेश देते हैं। हमें उनके जीवन से प्रेरणा लेकर श्रेष्ठ जीवन मूल्यों को अपनाना चाहिए। इस अवसर पर आर्य समाज के प्रधान प्रवीण गोयल ने कथा वाचिका अंजलि आर्या सहित कथा श्रवण करने आए नंदलाल कालरा, वसु मित्र सत्यार्थी,  कर्मचंद शास्त्री, जितेन्द्र सरल, महेश आर्य, अशोक गर्ग, सत्यप्रकाश भारद्वाज, विमला ग्रोवर, चंद्रमणि, विनोद बाला, सरला गुप्ता तथा विभिन्न आर्य समाजों के प्रतिनिधियों, शहर के गणमान्य लोगों का स्वागत किया। कमेटी के पदाधिकारी राजीव आर्य, सुभाष नागपाल, आरके आर्य सहित सभी सदस्यों ने व्यवस्था को बनाए रखने में सहयोग प्रदान किया।

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