Mohali news: आई.आई.एस.ई.आर. मोहाली का 15वाँ दीक्षांत समारोह सम्पन्न; 348 विद्यार्थियों मिलीं को उपाधियाँ
भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (आई.आई.एस.ई.आर.) मोहाली का 15वाँ दीक्षांत समारोह आज संस्थान परिसर में आयोजित किया गया। यह समारोह विज्ञान शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में संस्थान की बढ़ती प्रतिष्ठा और उपलब्धियों का प्रतीक रहा। समारोह में कुल 348 विद्यार्थियों को उपाधियाँ प्रदान की गईं।
मोहाली: भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (आई.आई.एस.ई.आर.) मोहाली का 15वाँ दीक्षांत समारोह आज संस्थान परिसर में आयोजित किया गया। यह समारोह विज्ञान शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में संस्थान की बढ़ती प्रतिष्ठा और उपलब्धियों का प्रतीक रहा। समारोह में कुल 348 विद्यार्थियों को उपाधियाँ प्रदान की गईं। इनमें एकीकृत बीएस-एमएस कार्यक्रम के 215 विद्यार्थी, बीएस कार्यक्रम के 10 विद्यार्थी, बीएस ऑनर्स कार्यक्रम के 2 विद्यार्थी, एमएस कार्यक्रम के 5 विद्यार्थी, एकीकृत एमएस-पीएचडी कार्यक्रम के 9 विद्यार्थी तथा पीएचडी कार्यक्रम के 107 विद्यार्थी सम्मिलित थे।
दीक्षांत समारोह की अध्यक्षता संस्थान के शासक मण्डल के अध्यक्ष प्रो. जे. एस. यादव ने की, तथा संस्थान के निदेशक एवं सीनेट अध्यक्ष प्रो. अनिल कुमार त्रिपाठी ने संस्थान की वार्षिक प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की।
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समारोह के मुख्य अतिथि भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के पूर्व अध्यक्ष श्री ए. एस. किरण कुमार थे। अपने दीक्षांत भाषण में श्री किरण कुमार ने विद्यार्थियों से विज्ञान और प्रौद्योगिकी का उपयोग राष्ट्र निर्माण तथा समाज कल्याण के लिए करने का आह्वान किया। भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम में अपने दीर्घ एवं विशिष्ट अनुभवों का उल्लेख करते हुए उन्होंने संचार, नौवहन, मौसम पूर्वानुमान, आपदा प्रबंधन तथा प्राकृतिक संसाधनों के प्रबंधन में वैज्ञानिक नवाचारों की अभूतपूर्व भूमिका को चिन्हित किया। उन्होंने विद्यार्थियों को उत्कृष्टता के साथ-साथ समाज सेवा की भावना को भी अपने जीवन का अभिन्न अंग बनाने के लिए प्रेरित किया।
इस वर्ष के दीक्षांत समारोह की एक विशेष उपलब्धि डॉ. मनमोहन सिंह शैक्षणिक उत्कृष्टता पुरस्कारों का प्रथम वितरण रहा। ये पुरस्कार डॉ. मनमोहन सिंह ट्रस्ट द्वारा आई.आई.एस.ई.आर. मोहाली के समन्वय से स्थापित किए गए हैं। इनका उद्देश्य स्नातक हो रहे विद्यार्थियों में उत्कृष्ट शैक्षणिक प्रदर्शन को सम्मानित करना तथा पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के आई.आई.एस.ई.आर. मोहाली और सभी आई.आई.एस.ई.आर. संस्थानों की स्थापना में योगदान का स्मरण करना है।

पुरस्कार वितरण समारोह में डॉ. मनमोहन सिंह ट्रस्ट के ट्रस्टी एवं योजना आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष श्री मोंटेक सिंह अहलूवालिया तथा डॉ. मनमोहन सिंह के परिवार से डॉ. विजय टंखा विशेष रूप से उपस्थित रहे। डॉ. मनमोहन सिंह शैक्षणिक उत्कृष्टता पुरस्कार के पुरस्कार विजेता जैविक विज्ञान में कौस्तुभ पुरोहित, रासायनिक विज्ञान में नंदना के. के., गणितीय विज्ञान में पाहुल अरोड़ा तथा भौतिक विज्ञान में अमितेश गुप्ता रहे। प्रत्येक पुरस्कार के साथ 50,000 रुपये की नकद राशि प्रदान की गई।
संस्थान द्वारा अपने वार्षिक पदक एवं अन्य शैक्षणिक सम्मान भी प्रदान किए गए। कौस्तुभ पुरोहित को समस्त स्नातक विद्यार्थियों में सर्वोच्च शैक्षणिक प्रदर्शन के लिए राष्ट्रपति स्वर्ण पदक प्रदान किया गया। प्रोफेसर एस. एन. कौल पदक, जो सर्वश्रेष्ठ समग्र प्रदर्शन के लिए दिया जाता है, दीप सहगल को प्रदान किया गया।
वार्षिक प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए प्रो. अनिल कुमार त्रिपाठी ने स्नातक हो रहे विद्यार्थियों को बधाई दी और संस्थान की उपलब्धियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि संस्थान के संकाय सदस्यों और शोधकर्ताओं ने पिछले वर्ष प्रतिष्ठित अंतर्राष्ट्रीय शोध पत्रिकाओं में 500 से अधिक शोधपत्र प्रकाशित किए तथा लगभग 25 करोड़ रुपये मूल्य की 49 बाह्य वित्तपोषित शोध परियोजनाएँ प्राप्त कीं। संस्थान के अनेक संकाय सदस्यों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित सम्मान प्राप्त हुए। साथ ही, आईआईएसईआर मोहाली ने अपने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय शोध सहयोगों को और सुदृढ़ किया। संस्थान के प्रौद्योगिकी व्यवसाय इनक्यूबेटर i-RISE ने अब तक जैव-प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य सेवा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और सतत विकास जैसे क्षेत्रों में 50 से अधिक स्टार्टअप्स को समर्थन प्रदान किया है।
स्नातक विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए प्रो. त्रिपाठी ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता और तकनीकी क्रांति के इस युग में जिज्ञासा, सृजनात्मकता, नैतिक उत्तरदायित्व और अंतर्विषयी सोच के महत्व पर बल दिया। उन्होंने विद्यार्थियों को आजीवन सीखते रहने तथा अपने वैज्ञानिक ज्ञान का उपयोग समाज के व्यापक हित में करने के लिए प्रेरित किया।
आई.आई.एस.ई.आर. मोहाली की स्थापना वर्ष 2007 में भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के अंतर्गत राष्ट्रीय महत्व के संस्थान के रूप में की गई थी। उच्च गुणवत्तायुक्त शिक्षा और अग्रणी शोध को एकीकृत करने की अपनी विशिष्ट अवधारणा के कारण आज यह संस्थान देश के प्रमुख विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान केन्द्रों में गिना जाता है। इसके विद्यार्थी और शोधार्थी विश्व के प्रतिष्ठित संस्थानों, जैसे ऑक्सफोर्ड, कैम्ब्रिज, एमआईटी, स्टैनफोर्ड, कैलटेक, कॉर्नेल, भारतीय विज्ञान संस्थान, टाटा मूलभूत अनुसंधान संस्थान (टी.आई.एफ.आर.), राष्ट्रीय जैविक विज्ञान केंद्र (एन.सी.बी.एस.) तथा अन्य अग्रणी विश्वविद्यालयों और शोध संस्थानों, में उच्च शिक्षा और शोध कार्य कर रहे हैं।
संस्थान वर्तमान में बी.एस., बी.एस.-एम.एस., एम.एस., एकीकृत एम.एस.-पीएच.डी. तथा पीएच.डी. कार्यक्रम संचालित करता है और वैज्ञानिकों, नवप्रवर्तकों तथा भावी शैक्षणिक नेतृत्व की नई पीढ़ी को तैयार करने के अपने मिशन के प्रति प्रतिबद्ध है।

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