Gurugram news: निगम का कमाल कारनामा : ढाई करोड़ मिट्टी में मिलाए, अब फिर बनेगा नाला, खर्च होंगे चार करोड़ रुपए

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नगर निगम गुरुग्राम में एक के बाद एक कारनामे आम है। अब एक नया कारनामा सामने आया है। पैसों की बर्बादी और भ्रष्टाचार के लिए देश में ख्याति बटोर चुके नगर निगम ने अब नाले के निर्माण पर ढाई करोड़ रुपए खर्च कर मिट्टी में मिला दिए। मजे की बात यह है कि अब दोबारा इस नाले का निर्माण होगा और इस बार दोगुनी राशि यानी चार करोड़ रुपए की  राशि फिर खर्च की जाएगी।

गुरुग्राम: नगर निगम गुरुग्राम में एक के बाद एक कारनामे आम है। अब एक नया कारनामा सामने आया है। पैसों की बर्बादी और भ्रष्टाचार के लिए देश में ख्याति बटोर चुके नगर निगम ने अब नाले के निर्माण पर ढाई करोड़ रुपए खर्च कर मिट्टी में मिला दिए। मजे की बात यह है कि अब दोबारा इस नाले का निर्माण होगा और इस बार दोगुनी राशि यानी चार करोड़ रुपए की राशि फिर खर्च की जाएगी। बताया जाता है कि नगर निगम की इंजीनियरिंग विंग में तैनात लापरवाह अधिकारियों ने उच्च अधिकारियों को छोटा नाला होने की बात कह गुमराह किया। हालांकि पहले बने नाले में भी  पानी की निकासी हो रही है। इसके बाद भी निगम अधिकारियों ने निगम के राजस्व को नुकसान पहुंचाने के लिए नियमों को अनदेखा करके इस नाले का दोबारा निर्माण किया जा  रहा है 

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निगम की इस कार्यप्रणाली से स्थानीय निवासियों में भारी रोष है। लोगों का सीधा आरोप है कि भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी के चक्कर में अधिकारी बार-बार नालों को तोड़ने और दोबारा बनाने का खेल खेल रहे हैं, जिससे न केवल जनता को परेशानी हो रही है बल्कि सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये का सीधा नुकसान पहुंचाया जा रहा है।

सेक्टर दस का पूरा मामला: पूरा मामला सेक्टर-10 का है, जहां स्थानीय नागरिक अस्पताल से लेकर अल्पाइन स्कूल तक जाने वाले मुख्य मार्ग के किनारे इस बरसाती नाले का निर्माण किया जा रहा है। स्थानीय लोगों के अनुसार, वर्ष 2022 के दौरान ही नगर निगम ने इस पूरे स्ट्रेच पर जलभराव की समस्या से निपटने के नाम पर लगभग 2.50 करोड़ रुपये की लागत से एक मजबूत आरसीसी बरसाती नाले का निर्माण पूरा किया था। चार साल के भीतर इस नाले में न तो कोई टूट-फूट हुई थी और न ही यह कहीं से धंसा था। इसके बावजूद, पिछले कुछ दिनों से निगम के ठेकेदार ने जेसीबी मशीनें लगाकर इस पक्के नाले को तोड़ना शुरू कर दिया है। अब इसी जगह पर लगभग चार करोड़ रुपये का नया टेंडर जारी कर दोबारा से नया नाला खड़ा किया जा रहा है।

कार्यशैली पर उठ रहे सवाल: नगर निगम के इस अजब-गजब फैसले पर सेक्टर-10 और आसपास के इलाकों के लोगों ने अधिकारियों को आड़े हाथों लिया है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि जब चार साल पहले ढाई करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे थे, तब निगम के आला इंजीनियरों, मुख्य तकनीकी अधिकारियों और सलाहकारों ने इस क्षेत्र में होने वाली बारिश और पानी के बहाव का आकलन क्यों नहीं किया था? यदि वह नाला छोटा था, तो उस समय उसे सही साइज का क्यों नहीं बनाया गया? और यदि वह नाला उस समय के एस्टीमेट के हिसाब से बिल्कुल सही था, तो आज अचानक वह छोटा कैसे हो गया? निवासियों का आरोप है कि नाला निर्माण और ड्रेनेज सुधार के नाम पर गुरुग्राम नगर निगम में एक बड़ा घालमेल चल रहा है। हर दो-तीन साल में पुरानी फाइलों को बंद कर नए टेंडर छोड़ दिए जाते हैं ताकि ठेकेदारों और अधिकारियों की जेबें भरी जा सकें।


ड्रेनेज के नाम पर करोड़ों का खेल: यह कोई पहला मामला नहीं है जब गुरुग्राम में किसी बनी-बनाई ड्रेनेज लाइन या सड़क को चंद महीनों या सालों में दोबारा उखाड़ दिया गया हो। सेक्टर-10 के लोगों का कहना है कि बार-बार नाले को तोड़ने और बनाने से इस मुख्य मार्ग पर हमेशा धूल का गुबार उड़ा रहता है, जिससे राहगीरों और दुकानदारों का जीना मुहाल हो चुका है। सिविल हॉस्पिटल आने वाले मरीजों और अल्पाइन स्कूल जाने वाले छोटे बच्चों को इस अधूरी खुदाई और मलबे के कारण रोजाना हादसों का शिकार होना पड़ रहा है।

 उच्च स्तरीय जांच और अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग: स्थानीय लोगों ने इस मामले की शिकायत मुख्यमंत्री, शहरी स्थानीय निकाय विभाग और सतर्कता विभाग (विजिलेंस) को भेजने की तैयारी कर ली है। सेक्टर वासियों की मांग है कि इस नाले को तोड़ने के आदेश देने वाले संबंधित कार्यकारी अभियंता, एसडीओ  और जूनियर इंजीनियर के खिलाफ तुरंत विभागीय जांच बैठाई जानी चाहिए। जनता के पैसे की इस बर्बादी को तुरंत रोका जाना चाहिए और जो ढाई करोड़ रुपये तीन साल पहले खर्च हुए थे, उसकी रिकवरी दोषी अधिकारियों के वेतन से की जानी चाहिए। 

नाले को तोड़कर दोबारा क्यों बनाया जा रहा है इसको लेकर संबधित अधिकारी से जवाब मांगा जाएगा। मामले की जांच करवाई जाएगी। जांच के बाद जो भी तथ्य सामने आएंगे उसके अनुसार आगामी कार्रवाई की जाएगी।

- प्रदीप दहिया, निगम आयुक्त, गुरुग्राम।
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