Faridabad News : परमानेंट लोक अदालत के अधिकार क्षेत्र को चुनौती देने वाली याचिका खारिज

याचिकाकर्ता दो स्कूलों पर लगाया 2-2 लाख का भारी जुर्माना

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हरियाणा अभिभावक एकता मंच के लीगल प्रयास से आरटीई के हकदार बच्चों को स्थाई लोक अदालत के फैसले से प्राइवेट स्कूलों में दाखिला मिल रहा है।

हरियाणा अभिभावक एकता मंच के लीगल प्रयास से आरटीई के हकदार बच्चों को स्थाई लोक अदालत के फैसले से प्राइवेट स्कूलों में दाखिला मिल रहा है। स्कूल संचालक अदालत के फैसले का सम्मान करके पात्र छात्रों को दाखिला भी दे रहे हैं और उन्हें किताब कॉपी वर्दी निशुल्क प्रदान कर रहे हैं लेकिन कुछ स्कूल संचालक ऐसे भी हैं जो अदालत के फैसले को और अदालत के अधिकार क्षेत्र को ही चुनौती दे रहे हैं। b

ऐसे ही दो स्कूल ग्रैंड कोलंबस इंटरनेशनल 16ए और सरस्वती ग्लोबल स्कूल तिगांव ने पहले तो आरटीई के पात्र छात्र-छात्रा को दाखिला नहीं दिया,दाखिला देने के शिक्षा विभाग के आदेश को भी नहीं माना और जब पीड़ित छात्र ने अदालत का सहारा लिया तो अदालत के नोटिस का भी जवाब नहीं दिया,उल्टा याचिका डालकर अदालत के अधिकार क्षेत्र को ही चुनौती दे दी। इन स्कूलों की याचिका पर 12 जून को सुनवाई हुई। दोनों पक्षों के वकीलों की दलीलों को सुनने के बाद परमानेंट लोक अदालत की बेंच ने स्कूलों की याचिका को खारिज करते हुए दोनों स्कूलों पर दो-दो लाख का भारी जुर्माना/हर्जाना के साथ लगाया है और जुर्माने की रकम को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण केे खाते में जमा कराने के आदेश दिये हैं। इस आदेश की एक प्रति DLSA को इस निर्देश के साथ भेजी गई है कि यदि स्कूल द्वारा 30 दिनों के भीतर उनके पास यह 2,00,000/- रुपये की राशि जमा नहीं की जाती है तो सचिव DLSA द्वारा निष्पादन आवेदन दाखिल करके नियमानुसार इस राशि की वसूली की जाए। एडवोकेेट बिरदी ने कहा है कि छात्र कार्तिक व छात्रा भाविका की इन स्कूलों में दाखिला दिलाने की याचिका पर अभी फैसला आना बाकी है। अदालत ने अपने फैसले में कहा है कि स्कूल का रवैया बेहद अड़ियल है और वे अपनी सुविधानुसार नियमों की व्याख्या कर रहे हैं। हरियाणा सरकार के अनुसार शिक्षा या शैक्षणिक संस्थान स्पष्ट रूप से 'जनोपयोगी सेवाओं' की सूची में आते हैं। इसलिए परमानेंट लोक अदालत का क्षेत्राधिकार न होने का दावा पूरी तरह से गलत है। हरियाणा अभिभावक एकता मंच के प्रदेश महासचिव कैलाश शर्मा व प्रदेश लीगल एडवाइजर एडवोकेट बीएस बिरदी ने अदालत के फैसले का स्वागत करते हुए कहा है कि स्कूल संचालक अपने स्कूल में मोटी व मनमानी फीस लेकर अमीर अभिभावकों के हजारों बच्चों को तो दाखिला दे देते हैं लेकिन शिक्षा विभाग के आदेश के बावजूद एक दो गरीब छात्रों को शिक्षा अधिकार कानून के तहत दाखिला देने से मना कर देते हैं जबकि सरकार उनकी पढ़ाई का खर्चा देने के लिए तैयार होती है। पीड़ित छात्रों के अभिभावक मजबूरी में अदालत का सहारा लेते हैं। 
मंच की ओर से एडवोकेट बिरदी अपनी निशुल्क लीगल सेवाएं प्रदान करते हैं। मंच ने कहा है कि ग्रैंड कोलंबस इंटरनेशनल स्कूल ने तो गरीब बच्चों को निशुल्क दाखिला देने का एफिडेविट देकर अरबों रुपए की बेशकीमती सरकारी जमीन HSVP से 99 साल के पट्टे पर कौड़ियों के भाव खरीदी है। उसके बावजूद उसने एक गरीब छात्र कार्तिक को शिक्षा विभाग के आदेश के बावजूद दाखिला देने से मना कर दिया। 
मंच के प्रदेश अध्यक्ष एडवोकेट ओपी शर्मा व प्रदेश संरक्षक सुभाष लाबां ने कहा है कि गत वर्ष सीबीएसई के 28 प्राइवेट स्कूलों ने पात्र छात्रों को दाखिला देने से मना कर दिया था जिनकी शिकायत जिला शिक्षा अधिकारी ने दो बार शिक्षा निदेशक पंचकूला से की और दोषी स्कूलों के खिलाफ उचित कार्रवाई करने की मांग की लेकिन शिक्षा निदेशक ने कोई भी उचित कार्रवाई नहीं की। इस बार भी जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी ने आरटीई के तहत पात्र छात्रों को दाखिला न देने वाले सीबीएसई के 44 प्राइवेट स्कूलों की शिकायत शिक्षा निदेशक से की है लेकिन अभी तक इन स्कूलों के खिलाफ कोई भी उचित कार्रवाई नहीं की गई है। इसी के चलते स्कूल संचालकों के हौंसले बुलंद हैं। मंच लीगल प्रयास से गरीब बच्चों को दाखिला दिलवा रहा है। अब तक डीपीएस,होली चाइल्ड, डायनेस्टी स्कूलों में गरीब बच्चों का दाखिला दिलवाया जा चुका है। छात्रों के अभिभावकों ने मंच खासकर एडवोकेट विरदी का आभार प्रकट किया है। कैलाश शर्मा ने अभिभावकों से कहा है कि वे जागरुक व एकजुट होकर प्राइवेट स्कूलों की प्रत्येक मनमानी का खुलकर बिना किसी डर के विरोध करें, जरूरत पड़ने पर मंच का सहारा लें।

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