Gurugram News: निर्माण कार्यों में आ सकती है दिक्कत, आरएमसी प्लांट संचालक हड़ताल पर
बोले, गुरुग्राम और फरीदाबाद में प्लांट को लेकर अलग अलग नियम क्यों? किराए की जमीन का सीएलयू संभव नहीं
गुरुग्राम में रेडी मिक्स कंक्रीट यानी आरएमसी प्लांट संचालकों ने प्रशासन और प्रदूषण विभाग के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। सैकड़ों की संख्या में एकजुट होकर प्लांट संचालकों ने जिला उपायुक्त को ज्ञापन सौंपा और अपनी मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल का ऐलान कर दिया है।
गुरुग्राम: गुरुग्राम में रेडी मिक्स कंक्रीट यानी आरएमसी प्लांट संचालकों ने प्रशासन और प्रदूषण विभाग के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। सैकड़ों की संख्या में एकजुट होकर प्लांट संचालकों ने जिला उपायुक्त को ज्ञापन सौंपा और अपनी मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल का ऐलान कर दिया है।
संचालकों का कहना है कि प्रशासन द्वारा बेवजह सख्ती की जा रही है, जबकि नियमों को लेकर गुरुग्राम और फरीदाबाद में अलग-अलग मानक अपनाए जा रहे हैं।
संचालकों का कहना है कि प्रशासन द्वारा बेवजह सख्ती की जा रही है, जबकि नियमों को लेकर गुरुग्राम और फरीदाबाद में अलग-अलग मानक अपनाए जा रहे हैं। गुरुग्राम और मानेसर क्षेत्र में संचालित 100 से अधिक आरएमसी प्लांटों के मालिक और संचालक बड़ी संख्या में एकत्र हुए। प्रदर्शन के बाद उन्होंने जिला उपायुक्त को ज्ञापन सौंपकर अपनी समस्याएं रखीं। आरएमसी प्लांट संचालकों का आरोप है कि प्रदूषण विभाग और प्रशासन की ओर से लगातार कार्रवाई की जा रही है, जिससे उद्योग प्रभावित हो रहा है।
प्लांट संचालकों का कहना है कि हाल ही में कई आरएमसी यूनिटों पर कार्रवाई करते हुए करोड़ों रुपये का जुर्माना लगाया गया। उनका दावा है कि पिछले दिनों करीब 25 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया, जिससे उद्योग जगत में भारी नाराजगी है। संचालकों का आरोप है कि प्रशासन की सख्ती के कारण उद्योग चलाना मुश्किल होता जा रहा है।
आरएमसी प्लांट मालिकों का एक बड़ा सवाल यह भी है कि गुरुग्राम और फरीदाबाद में एक ही तरह के उद्योग के लिए अलग-अलग नियम क्यों लागू किए जा रहे हैं। आरएमसी एसोसिएशन के प्रधान बिजेंद्र राणा का कहना है कि यदि दोनों जिले एक ही राज्य के अंतर्गत आते हैं तो नियमों और शर्तों में भी समानता होनी चाहिए। संचालकों ने मांग की है कि इस विषय पर स्पष्ट नीति बनाई जाए।
सुनील जिंदल ने कहा कि प्रशासन उनसे किराए की जमीन पर सीएलयू यानी चेंज ऑफ लैंड यूज की शर्त पूरी करने की अपेक्षा कर रहा है, जबकि किरायेदार के रूप में ऐसा करना संभव नहीं है। उनका कहना है कि जमीन मालिक और संचालक अलग-अलग होने की स्थिति में कई तकनीकी और कानूनी दिक्कतें सामने आती हैं। आरएमसी प्लांट संचालकों की हड़ताल का असर अब शहर के विकास कार्यों पर भी पड़ सकता है।
परियोजनाओं पर लग सकता है अड़ंगा
गुरुग्राम और मानेसर में चल रही अनेक निर्माण परियोजनाएं, सड़क निर्माण, सरकारी और निजी इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स आरएमसी की सप्लाई पर निर्भर हैं। ऐसे में यदि हड़ताल लंबी चली तो निर्माण कार्यों की गति प्रभावित हो सकती है और कई परियोजनाओं में देरी होने की आशंका है। गुरुग्राम में बिल्डरों के कई सारे प्रोजेक्ट इन आरएमसी प्लांट पर निर्भर है जबकि सरकारी विकास कार्य भी इन्हीं प्लांट्स पर निर्भर है। ऐसे में अगर ये सभी प्लांट हड़ताल पर रहे तो इस शहर की विकास की रफ्तार पर ब्रेक लग सकते है।
"नियम तोड़ने वालों पर ही कार्रवाई"
दूसरी ओर प्रदूषण विभाग का कहना है कि शहर में बढ़ते प्रदूषण स्तर को देखते हुए नियमों का सख्ती से पालन कराया जा रहा है। प्रदूषण अधिकारी आकांक्षा तंवर ने कहा कि जिन आरएमसी प्लांटों में पर्यावरणीय मानकों, धूल नियंत्रण व्यवस्था और अन्य आवश्यक नियमों का पालन नहीं किया जा रहा, उनके खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। विभाग का दावा है कि यह कार्रवाई केवल पर्यावरण संरक्षण और जनता के स्वास्थ्य को ध्यान में रखकर की जा रही है।
मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया तो जारी रहेगी हड़ताल
आरएमसी प्लांट संचालकों ने साफ कर दिया है कि जब तक उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक उनकी हड़ताल जारी रहेगी। ऐसे में एक तरफ उद्योग जगत प्रशासन की सख्ती पर सवाल उठा रहा है, तो दूसरी तरफ प्रदूषण विभाग पर्यावरणीय नियमों के पालन को लेकर अपने रुख पर कायम है। अब देखना होगा कि प्रशासन और आरएमसी प्लांट संचालकों के बीच बातचीत से कोई समाधान निकलता है या फिर इसका असर शहर के विकास कार्यों पर और गहरा होता है।

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नीलोफर हाशमी, देश रोजाना ऑनलाइन में सीनियर पत्रकार हैं। वे करंट अफेयर्स, ह्यूमन नेचर, सोशल और पॉलिटिक्स से जुड़ी खबरें बनाती हैं। मीडिया में नीलोफर को सालों का अनुभव है।
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