Gurugram News: गुरुग्राम नगर निगम परिसर बना जलभराव का शिकार, अधिकारियों की मानसून तैयारियों पर बड़ा सवाल
शहर की सफाई, सीवर और जलनिकासी व्यवस्था संभालने वाले नगर निगम गुरुग्राम के अपने कार्यालय परिसर की तस्वीरें ही व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं। बुधवार को नगर निगम कार्यालय परिसर में सीवर का पानी ओवरफ्लो होकर सड़क पर फैल गया। कार्यालय के भीतर पानी जमा होने और वाहनों के आसपास गंदा पानी खड़ा होने की तस्वीरें सामने आने के बाद सवाल उठ रहा है कि जब नगर निगम का अपना परिसर ही सीवर की समस्या से नहीं बच पा रहा तो आम गुरुग्रामवासी किस व्यवस्था पर भरोसा करें?
गुरूग्राम: शहर की सफाई, सीवर और जलनिकासी व्यवस्था संभालने वाले नगर निगम गुरुग्राम के अपने कार्यालय परिसर की तस्वीरें ही व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं। बुधवार को नगर निगम कार्यालय परिसर में सीवर का पानी ओवरफ्लो होकर सड़क पर फैल गया। कार्यालय के भीतर पानी जमा होने और वाहनों के आसपास गंदा पानी खड़ा होने की तस्वीरें सामने आने के बाद सवाल उठ रहा है कि जब नगर निगम का अपना परिसर ही सीवर की समस्या से नहीं बच पा रहा तो आम गुरुग्रामवासी किस व्यवस्था पर भरोसा करें?
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यह स्थिति उस समय सामने आई है, जब मानसून के दौरान शहर में जलभराव और सीवर ओवरफ्लो को रोकने के लिए नगर निगम की ओर से बड़े स्तर पर तैयारियां किए जाने के दावे किए गए थे। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, गुरुग्राम के करीब 652.34 किलोमीटर लंबे स्टॉर्म वाटर ड्रेनेज नेटवर्क में से नगर निगम अधिकारियों ने मानसून से पहले 534.82 किलोमीटर की सफाई का लक्ष्य रखा था। जून के अंत तक करीब 375.82 किलोमीटर नालों की सफाई होने की जानकारी सामने आई थी, यानी लगभग 159.66 किलोमीटर का काम बाकी था।
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155 जलभराव वाले स्थान, फिर भी सवाल बरकरार: नगर निगम ने शहर में 155 जलभराव संभावित स्थानों को चिन्हित कर वहां मानसून से पहले काम पूरा करने का लक्ष्य रखा था। इनमें 41 हाइपर-क्रिटिकल, 54 मध्यम और 60 सामान्य श्रेणी के स्थान शामिल थे। वहीं जून में सामने आई एक रिपोर्ट के अनुसार नगर निगम ने 155 चिन्हित स्थानों में से 70 जगहों पर सुधार कार्य पूरा होने की जानकारी दी थी।
इसके बावजूद बारिश के बाद शहर के अलग-अलग हिस्सों में जलभराव और सीवर ओवरफ्लो की शिकायतें सामने आती रहीं। अगस्त में हुई बारिश के बाद भी कई इलाकों में पानी घंटों तक जमा रहने की खबरें सामने आईं। 23 अगस्त को गुरुग्राम में सुबह आठ बजे तक 75 मिमी बारिश दर्ज की गई थी और उस समय भी नगर निगम के अनुसार 71 किलोमीटर नालों की डी-सिल्टिंग बाकी थी।
अधिकारी दावे ज़मीनी हकीकत से परे: सवाल सिर्फ यह नहीं है कि नगर निगम कार्यालय में सीवर क्यों ओवरफ्लो हुआ। बड़ा सवाल यह है कि जिस विभाग के अधिकारियों को शहर के लाखों लोगों के लिए जलनिकासी की व्यवस्था सुनिश्चित करनी है, क्या उनके अपने कार्यालय में नियमित निरीक्षण और रखरखाव की व्यवस्था भी ठीक से नहीं है?
नगर निगम अधिकारियों से यह पूछा जाना चाहिए कि कार्यालय परिसर में सीवर ओवरफ्लो की वजह क्या थी? संबंधित सीवर लाइन की आखिरी बार सफाई कब हुई थी? समस्या की सूचना मिलने के बाद कितनी देर में कार्रवाई हुई? और इस लापरवाही के लिए जिम्मेदारी किस अधिकारी या एजेंसी की तय की गई?
गुरुग्राम में जलभराव कोई नई समस्या नहीं है। बारिश के दौरान सड़कें जलमग्न होने, यातायात प्रभावित होने और सीवर का पानी सड़कों पर आने की शिकायतें लगातार सामने आती रही हैं। ऐसे में नगर निगम परिसर की यह तस्वीर ‘दावा बनाम हकीकत’ का सवाल खड़ा करती है।
आखिर जब नगर निगम का अपना परिसर ही सीवर के पानी से बेहाल हो जाए, तो शहर के नागरिकों से बेहतर जलनिकासी व्यवस्था की उम्मीद कैसे की जा सकती है? अब जरूरत केवल बैठकों, आंकड़ों और तैयारियों के दावों की नहीं, बल्कि जवाबदेही तय करने और जमीन पर दिखाई देने वाले स्थायी समाधान की है।

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